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वो आखिरी चिट्ठी... और देश पर कुर्बान हो गए लांस नायक सत्यपाल, पढ़िए उनकी बहादुरी के किस्से

Sun, 26 Jul 2020 05:16 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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लांस नायक सत्यपाल सिंह का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
कारगिल के युद्ध में शहीद हुए लांस नायक सत्यपाल सिंह जितने बहादुर थे, उतना ही बहादुर उनका परिवार भी है। वीर नारी बबीता देवी के इस हौसले को सलाम कि उन्होंने पति की शहादत के बाद भी बच्चों को सेना में जाने का पाठ सिखाया। उनकी बेटी दिव्या सेना में अफसर बनने की तैयारी में जुटी हैं। वे कहती हैं कि मुझे फख्र है अपने पिता पर, जिन्हें मैंने देखा तो नहीं, लेकिन उनकी बहादुरी के किस्से सेना के जवानों-अफसरों की जुबानी खूब सुने हैं।
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शहीद सत्यपाल सिंह का फाइल फोटो और साइड में पत्नी व बेटी - फोटो : अमर उजाला
शहीद सत्यपाल सिंह मूलरूप से गढ़मुक्तेश्वर के गांव लुहारी के रहने वाले थे। फिलहाल उनका परिवार मेरठ में कंकरखेड़ा के डिफेंस एनक्लेव में रहता है। वीर नारी बबीता देवी बताती हैं कि 1999 में वे छुट्टी काटकर ग्वालियर पहुंचे तो उनका तबादला जम्मू हो गया। बटालियन जम्मू पहुंची ही थी कि कारगिल की जंग शुरू हो गई। उनकी बटालियन सेकेंड राजपूताना राइफल्स को कारगिल पहुंचने के आदेश हुए। वह लड़ाई में चले गए, लेकिन घर पर इसकी जानकारी किसी को नहीं दी। 
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कारगिल युद्ध - फोटो : सोशल मीडिया
जंग में उनकी यूनिट के तीन साथी सैदपुर गुलावठी के चमन, सुरेंद्र और जसवीर के शहीद होने की खबर आई तो परिजन चिंता में पड़ गए। उनको चिट्ठी लिखी तो पता चला कि वे भी कारगिल में मोर्चें पर हैं। चिट्ठी में जवाब आया कि उनकी यूनिट ने तोलोलिंग चोटी पर कब्जा कर लिया है और लड़ाई जारी है। युद्ध खत्म होने से पहले नहीं आ पाऊंगा। चिंता मत करना। मैं ठीक हूं। इस चिट्ठी के बाद दो जुलाई 1999 को थाने से सूचना आई कि 28 जून को लांस नायक सत्यपाल सिंह द्रास सेक्टर में शहीद हो गए। 

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शहीद लांस नायक का परिवार - फोटो : अमर उजाला
बेटा चार और बेटी थी पौने दो साल की 
वीर नारी बबीता देवी बताती हैं कि जब वो शहीद हुए तो बेटा पुलकित चार साल और बेटी दिव्या पौने दो साल की थी। कई साल तक समझ ही नहीं आया कि ये क्या हो गया। जख्म बहुत हैं, लेकिन उन्हें कुरेदने से कोई फायदा नहीं। वे कहती हैं कि बेटे-बेटी को पढ़ा लिखा दिया है। हमेशा दोनों से यही कहा कि उनके पिता ने देश के लिए शहादत दी, इसलिए सेना में जाने का प्रयास जरूर करना। बेटे पुलकित ने एसएसबी दिया, लेकिन वे चयनित नहीं हो पाए। बेटी दिव्या भी एक बार एसएसबी दे चुकी हैं। दोबारा इंटरव्यू देने की तैयारी में जुटी हैं। 
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शहीद लांस नायक का फाइल फोटो और साइड में बेटा - फोटो : अमर उजाला
प्रदेश सरकार ने नहीं दिया नौकरी में कोटा 
वीर नारी बबीता देवी कहती हैं कि कारगिल के शहीदों के लिए प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरी में कोई कोटा नहीं दिया। शहीदों के बेटे-बेटियों को नौकरी में कोटा दिया जाना चाहिए था।

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