कारगिल के युद्ध में शहीद हुए लांस नायक सत्यपाल सिंह जितने बहादुर थे, उतना ही बहादुर उनका परिवार भी है। वीर नारी बबीता देवी के इस हौसले को सलाम कि उन्होंने पति की शहादत के बाद भी बच्चों को सेना में जाने का पाठ सिखाया। उनकी बेटी दिव्या सेना में अफसर बनने की तैयारी में जुटी हैं। वे कहती हैं कि मुझे फख्र है अपने पिता पर, जिन्हें मैंने देखा तो नहीं, लेकिन उनकी बहादुरी के किस्से सेना के जवानों-अफसरों की जुबानी खूब सुने हैं।