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जयंती: पिता का साया उठा तो संघर्ष में तपकर कुंदन बने टिकैत, सिसौली से संसार तक पहुंचाई किसानों की आवाज

Thu, 06 Oct 2022 11:36 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत - फोटो : अमर उजाला
भाकियू के दिवंगत अध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की 87वीं जयंती गुरुवार को मुजफ्फरनगर के सिसौली में किसान-मजदूर अधिकार दिवस के रूप में मनाई जा रही है। बालियान खाप के चौधरी टिकैत ने मुश्किल समय में किसानों को एकजुट कर आंदोलन खड़ा किया। इसके बाद तो जैसे हालात बदलने शुरू हो गए। किसान चेतना का नया दौर शुरू हुआ, जिसमें किसान अपनी बात कहने और हक मांगने लगे। यह बाबा की नेतृत्व क्षमता और किसानों की एकजुटता थी कि सिसौली के किसान भवन पर राजनीतिक लोगों ने शीश झुकाया।

भाकियू अध्यक्ष रहे बालियान खाप के चौधरी स्वर्गीय महेंद्र सिंह टिकैत की जयंती के उपलक्ष में किसान भवन पर हवन-पूजन के साथ मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला और रालोद अध्यक्ष जयंत सिंह भी शामिल होंगे। आगे विस्तार से जानें किसानों के मसीहा कहे जाने वाले चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के संघर्ष का सफर।
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चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत - फोटो : अमर उजाला
किसान मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की यादें और बातें आज भी किसानों के जेहन में है। बाबा ने किसानों को एकजुट कर अधिकारों के लिए संघर्ष करना सिखाया। उनकी दी हुई ताकत पर ही किसान आज अपनी बात पंचायतों से लेकर सरकारी कार्यालयों तक कहने में नहीं हिचकते।

यह भी पढ़ें: Muzaffarnagar: सिसौली में हवन कर मनाई जा रही चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की जयंती, रालोद अध्यक्ष भी होंगे शामिल
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चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
पिता का साया उठा तो संघर्ष में तपकर कुंदन बन गए टिकैत
सिसौली के सामान्य किसान और बालियान खाप के चौधरी रहे चौहल सिंह का असमय निधन परिवार के लिए बड़ी विपत्ति थी। इसके बाद कम उम्र में ही चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को खाप की पगड़ी पहना दी गई।

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चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत से बातचीत करते हुए चंद्रपाल सिंह फौजी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
कड़ी मेहनत के बल पर किया बदलाव
जीवन के संघर्ष यहीं से शुरू हुआ। लेकिन कड़ी मेहनत से टिकैत ने परिवार और समाज में बड़ा बदलाव खड़ा कर दिया। खाप  के मुखिया के तौर पर उन्होंने गरीब किसानों, मजदूरों की मुश्किलों को बहुत ही नजदीकी से देखा और उनके हक की लड़ाई लड़ने के कारण महात्मा टिकैत के नाम से प्रसिद्ध हो गए ,और हमेशा गरीब किसान और मजदूर के हक की लड़ाई लड़ते रहे।

 
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चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत - फोटो : amar ujala
बिना किसी भेद भाव से किया संघर्ष
मजहब और जातपात की भावनाओ से कोसों दूर उनका जीवन हमेशा गांव और किसान और मजदूर के हितों के चिंतन में लगा रहा, हर किसी की मुश्किलों को बड़े ध्यान से सुनते और कोई राह दिखाते।  किसान आंदोलन के चलते उनकी लोकप्रियता देश विदेश में छा गई थी। लोकप्रियता का नशा उन्हे छू न सका। और उन्होंने अपना ठेठ देहाती अंदाज नहीं बदला। 
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चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत - फोटो : अमर उजाला
करमूखेड़ी की हुंकार से हिली दुनिया
किसानों पर किसी भी अत्याचार के खिलाफ वह अक्सर पंचायत करते रहे।  विद्युत विभाग द्वारा किसानों का शोषण उनसे बर्दाश्त नहीं हुआ, तो उन्होंने मार्च 1987 में भाकियू का गठन कर करमूखेड़ी शामली में पहला आंदोलन किया। उन्होने किसानों की ताकत के बूते प्रदेश और देश की सरकारों को झुकाया। चौधरी टिकैत किसानों के दु:ख दर्द के हमराही बन गए। ठेठ देहाती अंदाज के कारण किसानों के दिलों पर ताउम्र राज किया। 15 मई वर्ष 2011 को बाबा टिकैत की बुलंद आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई।
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