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आईएमए डॉक्टरों का प्रदर्शन जारी, ममता बनर्जी मुर्दाबाद के लगाए नारे, सरकारी अस्पतालों में बढ़े मरीज

Mon, 17 Jun 2019 12:47 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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शामली में हड़ताल पर डॉक्टर - फोटो : अमर उजाला
पश्चिम बंगाल में जूनियर डॉक्टरों पर हमले के विरोध में राष्ट्रीय आईएमए द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन में मेरठ आईएमए पूर्ण रूप से भागीदारी कर रही है। जनपद के करीब 272 अस्पताल-नर्सिंग होम बंद किए गए हैं और आईएमए के करीब 1300 चिकित्सक हड़ताल पर हैं। इससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। । ऐसे में सरकारी चिकित्सालयों में मरीजों की संख्या बढ़नी शुरू हो गई है।
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शामली में सरकारी अस्पताल में मरीज - फोटो : अमर उजाला
मेरठ व शामली जनपद में डॉक्टरों जहां हड़ताल पर हैं। वहीं निजी चिकित्सालयों और नर्सिंग होम में इमरजेंसी सेवाएं खुली रखी गई हैं। इस कारण सरकारी अस्पतालों में सुबह से ही मरीजों की भीड़ बढ़नी शुरू हो गई। 
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शामली में सरकारी अस्पताल में मरीज - फोटो : अमर उजाला
यूपी के शामली में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर सुबह आठ बजे से ही मरीजों का पहुंचना शुरू हो गया। बताया गया कि यहां अब तक 640 मरीजों का पंजीकरण हो चुका है जबकि अन्य दिनों में यहां इतने मरीज इस समय तक नहीं पहुंचते हैं। 

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शामली में सरकारी अस्पताल में मरीज - फोटो : अमर उजाला
इस समय महिला ओपीडी में 36 महिला मरीज हैं लेकिन महिला चिकित्सक केवल एक ही है जिस कारण स्वास्थ्य केंद्र में आपाधापी मची हुई है। यही हाल बाल विशेषज्ञ ओपीडी का है। यहां 46 मरीज इलाज के इंतजार में बैठे हैं जबकि चिकित्सकों की संख्या बेहद कम है। अन्य ओपीडी का भी यही हाल है।  
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शामली में हड़ताल पर डॉक्टर - फोटो : अमर उजाला
उधर आईएमए से जुड़े चिकित्सकों ने अपने क्लीनिक पूरी तरह बंद किए हुए हैं। सभी चिकित्सक एकत्र होकर शामली के अग्रसेन पार्क में धरना देकर बैठे हैं। यह हड़ताल पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों पर हुए जानलेवा हमले के विरोध में की जा रही है।
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मेरठ में बंद पड़े डॉक्टर्स के क्लीनिक - फोटो : अमर उजाला
मेरठ चिकित्सकों ने आईएमए हॉल से बच्चा पार्क तक विरोध मार्च भी निकाला। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) मेरठ शाखा के अध्यक्ष डॉ. शिशिर जैन ने बताया कि आईएमए के चिकित्सकों ने निर्णय लिया है कि 17 जून को सुबह छह बजे से लेकर 18 जून की सुबह छह बजे तक 24 घंटे के लिए इमरजेंसी सेवा छोड़कर चिकित्सा सेवाएं पूर्णत: बंद रहेंगी।
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अस्पताल के बाहर लगा बोर्ड व इंतजार करते मरीज - फोटो : अमर उजाला
यह हैं चिकित्सकों की मांग
- केंद्र सरकार चिकित्सकों व अस्पतालों पर हिंसा के विरुद्ध सख्त कानून बनाए।
- हिंसा करने वालों की तुरंत गिरफ्तारी का प्रावधान हो।
- पश्चिमी बंगाल में दोषी व्यक्तियों पर त्वरित कार्रवाई कर शांति व्यवस्था बहाल हो।
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