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इंटरनेशनल गैंग ने मुंबई से दुबई तक फैलाया नेटवर्क, सोता रहा इंटेलीजेंस और खुफिया विभाग

Thu, 03 Oct 2019 06:06 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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पुलिस द्वारा पकड़े गए मोबाइल - फोटो : अमर उजाला
योगी सरकार बनने के बाद से अपराधियों पर शिकंजा कसा रहा है। लेकिन शरद के सामने सारा सिस्टम फेल हो गया। चोरी और लूट के मोबाइलों को देशभर में लूटकर विदेशों तक पहुंचाता रहा और पुलिस अंजान रही।

वह जानी में भोला की झाल पर 2500 गज में थ्री स्टार होटल बनवा रहा था। चार सितंबर को तीन बदमाश मुठभेड़ में पकड़े गए तो शरद फरार आरोपी बनाया गया था। आगे स्लाइड्स में जानें आखिर कैसे मुंबई से लेकर दुबई तक फैला था इन बदमाशों का कारोबार: -
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वारदात का खुलासा करते एडीजी प्रशांत कुमार - फोटो : अमर उजाला
शरद ने 28 पुलिस वालों के खिलाफ वाद दायर किया तो पुलिस जागी
20 सितंबर को इस गैंग के सरगना शरद गोस्वामी ने फर्जी मुठभेड़ का आरोप लगाकर 28 पुलिसवालों के खिलाफ वाद दायर किया तो वह पुलिस के रडार पर आ गया था।

जिसके बाद पुलिस ने शरद की ब्रह्मपुरी थाने में हिस्ट्रीशीट (85-ए) खोली। उस पर बीस हजार का इनाम घोषित िकया। पुलिस लगातार उसका पीछा कर रही थी और उसका गैंग बेनकाब कर दिया।
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वारदात का खुलासा करते एडीजी प्रशांत कुमार - फोटो : अमर उजाला
मोबाइल ट्रेस कराना चुनौती 
शरद समेत सात आरोपियों से बरामद 280 मोबाइल बरामद कहां से लूटे, इसकी जांच भी चुनौती है। पुलिस ने प्रेस वार्ता में तीन-चार वारदातों को ही बताया। 

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पकड़े गए बदमाश - फोटो : अमर उजाला
एसआईटी करेगी जांच 
एडीजी ने बताया कि इस मामले में आईपीएस धवल जायसवाल के नेतृत्व में एसआईटी जांच होगी। विदेशों से कहां-कहां और कितना पैसा आया, शरद के संबंध कितने पुलिस वालों से और गैंगों से हैं, इसकी जांच होगी।

गैंग में शामिल रुबीना उर्फ चांदनी और सोनिया की तलाश है। वहीं, पुलिस ने दावा किया कि बदमाश चोरी और लूट के मोबाइल के पार्ट्स चीन में बेचते थे। सवाल है कि चीन में खुद ही पार्ट्स इतने सस्ते मिलते हैं, तो वह कितने में खरीदते होंगे। इसको लेकर भी संदेह हो रहा है। 
 
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चोरों से बरामद वाहन - फोटो : अमर उजाला
मुंबई, दुबई और नेपाल में नेटवर्क 
शरद का मुख्य साथी नदीम मुंबई में गैंग संभालता है। उसी के माध्यम से चोरी/लूट के मोबाइल विदेशों में भेजे जाते थे। आईफोन के पासवर्ड क्रेक कर उनके पार्ट्स बेचे जाते थे। मुंबई, इंदौर, बंगलूरू में भी मोबाइल बेचे जाते थे। शरद पूरा नेटवर्क बिजली बंबा बाईपास स्थित एक अपार्टमेंट से चलाता था। उसकी योजना होटल बनने पर वहां से पूरा गैंग चलाने की थी। 

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पकड़े गए आरोपी - फोटो : अमर उजाला
बिलाल के बाद चलाया गैंग
ठक-ठक गैंग की शुरूआत शरद ने मेरठ से की थी। साल 2010 में नजाकत व बिलाल गैंग से जुड़ा था। बिलाल की हत्या के बाद शरद ने गैंग से 100 से ज्यादा बदमाश जोड़े। चोरी और लूट के जो मोबाइल देशभर में चोरी होते थे, वह शरद के पास आने लगे।

मोबाइलों के आईएमईआई नंबर बदलने के लिये उसने इंजीनियर रखे। धंधा तेजी से फैला तो विदेशों से कनेक्शन जोड़े। माधवपुरम के पुश्तैनी मकान में उसका साथी अमरीश रहता है। जबकि शरद हमेशा हुलिया बदलकर रहता था।
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