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यूपी: 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' कितनी सफल, तस्वीरों के साथ एक क्लिक में जानिए

Fri, 06 Jul 2018 09:13 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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चूल्हे पर रोटी बनाती महिला - फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में जिले के 33746 लाभार्थी परिवार दोबारा गैस का सिलिंडर नहीं भरवा पाए हैं। आर्थिक तंगी के चलते इन परिवारों को चूल्हे पर ही रोटी बनाने के लिए विवश होना पड़ा है। मुजफ्फरनगर में उज्ज्वला योजना में अब तक 84,365 परिवारों को गैस का कनेक्शन दिया जा चुका है। 40 प्रतिशत परिवार ऐसे हैं, जो गरीबी के कारण दोबारा गैस का रिफिल नहीं ले पाए हैं। इन घरों में प्रधानमंत्री उज्जवला योजना में मिला सिलिंडर और चूल्हा शोपीस बनकर रह गया है।
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चूल्हे पर रोटी बनाती महिला - फोटो : अमर उजाला
ग्रामीण अंचल के गरीब परिवारों की महिलाओं को चूल्हे के धुएं से मुक्ति दिलाने के लिए चलाई जा रही प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में आर्थिक तंगी आडे़ आ रही है। अत्यंत गरीब परिवारों को योजना के तहत कनेक्शन दिया गया। हालांकि अधिकतर जरूरतमंद परिवार दोबारा गैस नहीं खरीद पाए। रिफिल का रेट उनके हिसाब से इतना महंगा है कि उसे वह वहन नहीं कर सकते। चूल्हे में जलाई जाने वाली लकड़ी इन परिवारों को मुफ्त में मिल जाती है।
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चूल्हे पर रोटी बनाती महिला - फोटो : अमर उजाला
पशुओं के पालने के कारण उपले भी परिश्रम कर मुफ्त में बना लेते हैं। जिले में 31 दिसंबर 2017 तक 78,692 परिवारों को कनेक्शन का लक्ष्य रखा गया था। इनमें से 60,870 परिवारों को योजना में कनेक्शन दिए गए। 2017-18 में जिले में 32,470 कनेक्शन प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में देने का टारगेट है। इसमें अब तक 23,495 लाभार्थी परिवारों को कनेक्शन दिए जा चुके हैं। अब तक कुल 84,365 परिवारों को उज्ज्वला योजना में लाभ दिया जा चुका है। योजना के लाभार्थी 40 प्रतिशत परिवार ऐसे हैं, जिन्होंने दोबारा गैस नहीं ली है। 33,746 परिवारों में गैस का चूल्हा और सिलिंडर शोपीस बनकर रह गया है। दोबारा सिलिंडर नहीं लेने वालों में ग्रामीण क्षेत्रों के लाभार्थी अधिक हैं।

पढ़ें : ग्राउंड रिपोर्ट: सांसद के गोद लिए गांव ने खोल दी 'उज्ज्वला योजना' की पोल, देखें तस्वीरें

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चूल्हे पर रोटी बनाती महिला - फोटो : अमर उजाला
गरीबों तक पहुंचा रहे लाभ: अभिषेक             
प्रधानमंत्री उज्जवला योजना को लेकर जिले के नोडल ऑफिसर बनाए गए अभिषेक कुमार ने बताया कि योजना का लक्ष्य प्रत्येक गरीब परिवार को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराना है। रिकॉर्ड में 40 प्रतिशत लोग ऐसे सामने आए हैं, जिन्होंने दूसरा सिलिंडर नहीं लिया है। इन लोगों को जागरूक करने और दोबारा रिफिल खरीदने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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चूल्हे पर रोटी बनाती महिला - फोटो : अमर उजाला
चूल्हे के 990 रुपये जमा करने होंगे       
उज्ज्वला योजना का प्रावधान है कि जिस गरीब परिवार की सदस्य महिला को मुफ्त में कनेक्शन मिलेगा। उसको चूल्हे के 990 रुपये संबंधित गैस एजेंसी में जमा कराने होंगे। अगर वह महिला चूल्हे के पैसे जमा करने के सक्षम नहीं है तो, उसका गैस कनेक्शन पर ऋण लागू कर दिया जाता है। इस ऋण के तहत कंज्यूमर को मिलने वाली सब्सिडी में से प्रतिमाह चूल्हे की कीमत लेने के लिए 210 रुपये 66 पैसे काट लिए जाएंगे। योजना के तहत जब तक कंज्यूमर से चूल्हे के 990 रुपये वसूल नहीं कर लिए जाएंगे, तब तक उसको सब्सिडी का पैसा नहीं मिलेगा। गैस सिलिंडर की कीमत 704 रुपये 50 पैसे है।
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चूल्हे पर खाना बनाती महिला - फोटो : अमर उजाला
उज्ज्वला योजना के तहत पात्रों को मिले कनेक्शनों के बारे में अमर उजाला ने देहात में पात्रों के घरों पर जाकर हकीकत जानी, तो पाया कि जिन पात्रों को कनेक्शन दिए गए हैं, वो आर्थिक रूप से कमजोर हैं, जो एक बार कनेक्शन लेने के बाद दोबारा गैस रिफलिंग नहीं करा पाए। कुछ पात्रों ने तो सिलिंडरों का इस्तेमाल ही नहीं किया। ऐसे में जिन पात्रों को धुएं से मुक्ति दिलाने के लिए सिलिंडर दिए गए थे, वे अधिकांश परिवार अब भी खाना बनाने को चूल्हा फूंकने को मजबूर हैं।

पढ़ें : ग्राउंड रिपोर्ट: दम तोड़ रही 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना', जानिए, इन गरीब परिवारों का हाल
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चूल्हे पर रोटी बनाती महिला - फोटो : अमर उजाला
रिफलिंग को पैसे नहीं जुटा सका परिवार 
खतौली के गांव शेखपुरा में ग्राम प्रधान सुदेश अधाना के सहयोग से करीब 150 गरीब परिवारों की महिलाओं को प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन दिया गया था। गांव की रहने वाली कपडिय़ा जाति की गीता पत्नी चंदी को पात्रता होने पर प्रधान के सहयोग से गैस कनेक्शन मिला था। तीन माह तक इस परिवार ने एलपीजी गैस से खाना पकाकर खाया। गैस खत्म हो गई तो परिवार सिलिंडर में गैस भरवाने तक के पैसे नहीं जुटा सका। गीता सडक़ों से लोहा बीनने का काम करती है। पति मजदूरी करता है। इस कारण से यह परिवार चूल्हे पर ही खाना बनाने को मजबूर हो गया।
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बिना छत के मकान में रह रहा परिवार - फोटो : अमर उजाला
घरों पर छत नहीं, सिलिंडर कहां से भरवाएं 
गांव रतनपुरी में करीब 50 परिवारों को उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन मिले थे। पांच-छह परिवारों को छोड़कर बाकी परिवार अभी भी चूल्हे पर ही खाना बनाते हैं। महेंद्री पत्नी सोमपाल ने बताया कि गैस कनेक्शन मिला था, वे अभी भी चूल्हे पर ही खाना पकाते हैं, क्योंकि गैस रिफिलिंग के लिए रुपयों का बंदोबस्त करना बड़ा मुश्किल होता है। नत्थो ने बताया कि परिजन मजदूरी करते हैं। गैस रिफिलिंग उनके लिए संभव नहीं है। इसलिए वे लोग खाना चूल्हे पर ही पकाते हैं। पूजा पत्नी तनवीर, रीना पत्नी रवि कुमार और रविता पत्नी श्याम सिंह का भी कहना है कि गैस रिफिलिंग के लिए रुपये का इंतजाम करना उनके बस में नहीं है। उनके पास सिर छुपाने के लिए मकान पर छत भी नही है, गैस रिफिलिंग की बात तो बहुत दूर है।

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