प्रदेश में सत्ता की कमान योगी आदित्यनाथ के हाथों में आने के बाद पशुओं के अवैध कमेले और मीट प्लांट में हड़कंप मच गया है।
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मीट प्लांट
मेरठ में हापुड़ रोड पर बने मीट प्लांट भले ही बाहर से किसी आलीशान कॉरपोरेट ऑफिस की तरह से दिखते हों। लेकिन अंदर पशुओं के कत्ल को देखते ही पैरों के नीचे से जमीन खिसक जाती है।
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मीट प्लांट
सैकड़ों बीघे जमीन में मीट प्लांट बने हुए हैं। मीट प्लांट के चारो तरफ ऊंची ऊंची दीवारें है, मेन रोड की तरफ लोहे का मजबूत गेट है। कई गार्ड मेन गेट पर हथियार लेकर देखे जा सकते हैं।
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मीट की जांच करते कर्मचारी
अंदर प्लांट में पशुओ को कटान के लिए अलग कतार बनी रही हैं। पशु काटने वाले लोग दिन की मजदूरी पर जाते हैं, जिनका पेशा ही पशु काटना होता है। खास बात यह है कि यहां काम करने वालों में महिलाओं की संख्या हजारों में है।
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मीट प्लांट
पशुओं की लंबी लाइन लगा दी जाती है, जहां सबसे पहले उनकी गर्दन के नीचे लंबे छुरे से वार किया जाता है, एक या दो छूरे गर्दन के नीचे लगने पर पशु खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़ता है।
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मीट की जांच करती महिलाएं
पशु की खाल को उतारने के बाद उसके अवशेषों को अलग अलग निकालकर रख दिया जाता है। पशु की खाल अलग, मीट अलग और अन्य अवशेष अलग कर दिए जाते हैं। नाली में खून ऐसे बहता है जैसे नाला चल रहा हो।
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मांस
एक लाइन में 50 से 100 पशुओं तक रहते हैं। एक पशु को काटने में चार या पांच मिनट का वक्त लगता है, जबकि मशीन से पशु काटने में सिर्फ 20 से 30 सेकेंड का ही वक्त लगता है।
सुबह से लेकर शाम तक मीट प्लांटों में पशुओं का कटान किया जाता है। गोदामों में मीट को पेकिंग भी किया जाता है। हजारों लोग एक मीट प्लांट में काम करते हैं। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद लगातार दूसरे दिन सोमवार को मेरठ में पशु कटान बुरी तरह प्रभावित रहा।