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हाशिमपुरा कांड: दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को अलग-अलग चश्मे से देख रहे सियासतदां

Fri, 02 Nov 2018 03:10 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ न्यूज
मेरठ के हाशिमपुरा कांड में आया हाईकोर्ट का फैसला अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है। कुछ की नजर में यह नासूर बन चुके दर्द का मरहम है तो कुछ को लग रहा है कि इसकी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में लड़ी जानी चाहिए। दरअसल, राजनीतिक दलों के चश्मे से इस प्रकरण के सियासी मायने अलग-अलग दृष्टिकोण बयां कर रहे हैं। यहां तक कि इसे चुनावी मुद्दों में शामिल करने पर भी विचार शुरू हो चुका है।
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मेरठ न्यूज
देर से सही पर इंसाफ मिला
हाशिमपुरा कांड पर आए फैसले के बाद अब इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार आ रही हैं। इस घटना और उस पर आए फैसले पर अपने-अपने ढंग से नजरिया रखा जा रहा है। समाजवादी पार्टी इस फैसले पर बेहद खुशी का इजहार कर रही है और मिठाई तक बांटी जा रही है। सपाइयों का कहना है कि देर से ही सही, पर इंसाफ मिला। हालांकि यह निर्णय काफी पहले आना चाहिए था। लेकिन सपा अब भी इसे जीत बता रही है।
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सोच समझकर दे रहे प्रतिक्रिया
बसपाई कह रहे हैं कि हाशिमपुरा कांड वास्तव में दिल दहला देने वाला था। अब पीड़ित परिवारों को न्याय मिला है। 31 साल इंतजार किया। लेकिन परिणाम सही आया। उधर, कांग्रेसी सधे तरीके से प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं। किसी का कहना है कि अभी ठीक से हाईकोर्ट का निर्णय पढ़ तो लें तो कुछ कह रहे हैं कि ठीक हुआ। कुछ कह रहे हैं कि पीएसी के जवानों की ओर से पैरवी ठीक नहीं हुई।

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ठीक से पैरवी होनी चाहिए
अब इस पूरे प्रकरण पर भाजपाई अपने ही तरीके से प्रतिक्रिया दे रहे हैं। अधिकतर भाजपाई कह रहे हैं कि अदालत के आदेश का सम्मान है। लेकिन इस पूरे प्रकरण की सुप्रीम कोर्ट में ठीक से पैरवी होनी चाहिए। उनका कहना है कि निचली अदालत से सब बरी हो गए थे। हाईकोर्ट में दोषी साबित हो गए यानी पीएसी जवानों की पैरवी कमजोर हुई।
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अलग-अलग दिख रहा नजरिया
दरअसल सियासी लोगों के बयान यह बता रहे हैं कि पार्टी इस पूरे प्रकरण को किस नजरिए से देख रही है। यहां तक कि इस मामले को चुनाव के मुद्दों में शामिल करने तक पर विचार हो रहा है। मेरठ बेहद संवेदनशील रहा है और जरा-जरा सी बात पर यहां माहौल खराब होता रहा है। जाति, धर्म, समुदाय का यहां के चुनाव में अहम रोल है और राजनीतिक दल इसे भुनाने की पूरी कोशिश करते हैं। बड़ी संख्या में वोटों का बंटवारा इसी नाम पर होता आया है। इस प्रकरण को कौन किसी तरह से लेगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा पर त्वरित प्रतिक्रियाएं इस तरफ इशारा कर रही हैं।

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