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बॉलीवुड के बड़े कलाकारों को जौहड़ी के छप्पर तक खींच लाई शूटर दादी, पढ़ें- कामयाबी के अनसुने किस्से

Fri, 10 May 2019 07:09 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
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शूटर दादी चंद्रो तोमर को नमस्कार करते संजय दत्त - फोटो : अमर उजाला
बागपत की शूटर दादी चंद्रो तोमर की कामयाबी की कहानी सैकड़ों लोगों के लिए प्रेरणा हैं। जौहड़ी गांव के छप्पर की शूटिंग रेंज में साधा गया पहला निशाना दस पर लगा तो इसके बाद चंद्रो तोमर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। पिछले 21 साल में वह देश की बालिकाओं और बुजुर्गों के लिए प्रेरणा बनीं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति बटोरी और राष्ट्रीय स्तर पर 50 से अधिक पदक जीतने में कामयाब हुई। मायानगर के कलाकार उन पर फिल्म बनाने गांव तक पहुंचें।
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शूटर दादी चंद्रो तोमर को सम्मानित करते सीएम योगी - फोटो : अमर उजाला
शामली के गांव मखमूलपुर में शूटर दादी का जन्म एक जनवरी 1932 को हुआ। सोलह साल की उम्र में जौहड़ी के किसान भंवर सिंह से उनकी शादी हो गई। भरे-पूरे परिवार में निशानेबाजी सीखने की दिलचस्प कहानी है। साल 1998 में जौहड़ी में शूटिंग रेंज की शुरुआत डॉ. राजपाल सिंह ने की। लाडली पौत्री शेफाली तोमर को निशानेबाजी सिखाने के लिए वह रोज घर से शूटिंग रेंज तक जाती। शेफाली शूटिंग सीखती और चंद्रो तोमर देखती रहती। एक दिन चंद्रो तोमर ने एयर पिस्टल शेफाली से लेकर खुद निशाना लगाया। पहला निशाना दस पर लगा... दादी की निशानेबाजी देख रहे बच्चों ने तालियां बजाई। यहीं से शुरू हुआ चंद्रो तोमर की निशानेबाजी का सफर।
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शूटर दादी चंद्रो तोमर के साथ तापसी पन्नू - फोटो : अमर उजाला
घर के अलावा वह शूटिंग रेंज में अभ्यास करने लगी। इसी साल चंडीगढ़ में आयोजित नेशनल में शूटर दादी ने रजत पदक जीता। शूटर दादी ने राष्ट्रीय स्तर पर 50 से अधिक पदक जीते हैं, जबकि उन्हें ख्याति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली। 21 साल के सफर में शूटर दादी का लोगों ने लोहा माना। बालिकाओं के लिए वह प्रेरणा बन गई।

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सांड की आंख पोस्टर
दीपावली पर रिलीज होगी सांड़ की आंख
शूटर दादी चंद्रो तोमर और प्रकाशो तोमर की बायोपिक सांड़ की आंख दीपावली पर रिलीज होगी। फिल्म की शूटिंग का अधिकतर हिस्सा गांव में ही फिल्माया गया है। इस फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह चंद्रो तोमर ने परिवार और समाज से संघर्ष कर खुद को आगे बढ़ाया।
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सांड की आंख - फोटो : अमर उजाला
एक साल बाद प्रकाशो ने शुरू की शूटिंग
जौहड़ी की छप्पर वाली शूटिंग रेंज में पहले शूटर दादी चंद्रो तोमर पहुंची, फिर उनके बाद उनकी देवरानी प्रकाशो तोमर ने भी यहां पर शूटिंग सीखना शुरू किया। शूटर दादी की जौहड़ी ने देशभर में धमाल मचा दिया।
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शूटर दादी चंद्रो तोमर - फोटो : अमर उजाला
ऐसा है परिवार
शूटर दादी चंद्रो तोमर के परिवार में बड़ा बेटा ओमवीर सिंह, विनोद कुमार के अलावा बेटी धर्मवीरी, कौशल्या और सविता हैं। शेफाली, चिराग, अंकित और पूजा उनके पौत्र और पौत्री हैं।
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शूटर दादी चंद्रो तोमर की जांच करते डॉक्टर - फोटो : अमर उजाला
दादी के ठीक होने की दुआ
जैसे ही लोगों को उनके बीमार होने का पता चला तो उनके ठीक होने के लिए दुआ का दौर शुरू हो गया। सोशल मीडिया, फेसबुक और ट्विटर पर लोगों ने उनके जल्द से जल्द ठीक होने की दुआएं की है।

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