फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी: आदमखोर मादा गुलदार का आतंक, अब तक ली दो लागों की जान, पदचिन्हों से हुई पहचान

Mon, 30 Dec 2019 01:34 PM IST
Dimple Sirohi अजीत चौधरी, अमर उजाला, बिजनौर
विज्ञापन
1 of 8
leopard - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के बिजनौर में गांव असगरपुर व मोहंडिया में दो लोगों को मारने वाली मादा गुलदार है। दोनों घटनाओं को मादा गुलदार द्वारा मारने की बात ही सामने आ रही है। दोनों घटनाओं पर पदचिह्न एक जैसे मिले हैं।

मादा गुलदार ने मालन नदी के किनारे के क्षेत्र को अपना ठिकाना बनाया है। वह मालन नदी के किनारे ही चल रही है। वहां पर शिकार की भरमार है। आगे मालन नदी गंगा में मिल जाती है। माना जा रहा है कि मादा गुलदार ने यही इलाका रहने के लिए चुन लिया है।
विज्ञापन

2 of 8
leopard - फोटो : अमर उजाला
27 नवंबर को गुलदार ने पहला शिकार किया था। गांव चमरू नवादा निवासी समला देवी को गुलदार ने मार डाला था। इसके बाद दस दिसंबर को गुलदार ने सराय आलम निवासी चमन को मार डाला। यह गांव मालन नदी के किनारे है। इसके बाद गुलदार ने मालन नदी के किनारा ही पकड़ लिया है।

15 दिसंबर को गांव अकबरपुर चौगांवा निवासी रोहांश, 25 दिसंबर को गांव असगरपुर निवासी शानू व 26 दिसंबर को गांव बिचपड़ी निवासी शफीक को गांव मोहंडिया के जंगल में मारा था। ये सभी गांव मालन नदी के किनारे बसे हैं। मालन नदी के किनारे ही वन्यजीव रहना पसंद करते हैं। 
विज्ञापन

3 of 8
leopard - फोटो : अमर उजाला
यहां पर शिकार भरपूर मात्रा में मौजूद रहता है। यह क्षेत्र खादर के हैं। यहां से थोड़ी दूर आगे ही मालन नदी गंगा में मिल जाती है। खादर में नीलगाय, बारहसिंगा, चीतल, खरगोश आदि की भरमार है। मालन नदी के बाद अगर गुलदार गंगा किनारे पहुंच गई तो वहां से उसका जाना मुश्किल है। वहां इंसानी गतिविधियां भी कम हैं। वन विभाग ने गुलदार की पहचान के लिए सेवानिवृत्त डीएफओ जीएस खुशारिया को बुलाया था। 

उन्होंने डीएफओ एम सेम्मारन के साथ असगरपुर व मोहंडिया में गुलदार के पदचिह्न की जांच की। जांच में प्रथम दृष्ट्या दोनों जगह के पदचिह्न एक जैसे मिले हैं। दोनों की बनावट के आधार पर वे मादा   गुलदार के निकले। रिटायर्ड डीएफओ जीएस खुशारिया के अनुसार दोनों जगह गुलदार के पदचिह्न प्रथम दृष्टया एक से हैं। इनकी और गहराई से जांच की जाएगी।

4 of 8
leopard - फोटो : अमर उजाला
लंबा होता है मादा गुलदार का पंजा
मादा गुलदार के पंजों की उंगलियां पतली होती हैं। इनका पंजा थोड़ा लंबा होता है। नर गुलदार के पंजे   की उंगली मोटी और गोल होती हैं। इसका पंजा मादा गुलदार से ज्यादा चौड़ा होता है।
विज्ञापन

5 of 8
leopard trapped - फोटो : अमर उजाला
अभी अकेली है गुलदार
जहां भी मादा गुलदार ने शिकार किया या फिर जहां भी उसकी लोकेशन मिली, वहां पर शावकों के पंजों के कोई निशान नहीं मिले हैं। अभी तक मादा गुलदार अकेली ही घूम रही है। ऐसा हो सकता है कि वह गर्भवती हो। 
विज्ञापन

6 of 8
leopard - फोटो : अमर उजाला
चकरोड से ही तय करता है सफर
गुलदार हमेशा बने बनाए रास्ते पर ही चलता है। वह खेतों में केवल छिपने के लिए जाता है। एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए वह चकरोड का सहारा लेता है। गुलदार के पंजे नाजुक होते हैं। इसलिए वह चकरोड पर ही चलता है।
विज्ञापन

7 of 8
leopard - फोटो : अमर उजाला
मादा गुलदार के हैं निशान
डीएफओ डा.एम सेम्मारन केमुताबिक मोहंडिया व असगरपुर के पास मिले पंजे के निशान मादा गुलदार के हैं। गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया जा रहा है। गांववाले गुुलदार के पकड़े जाने तक सावधान होकर काम करें।
विज्ञापन

8 of 8
leopard - फोटो : अमर उजाला
गांव मोहंडिया में गुरुवार को किसान शफीक को मारने के बाद से गुलदार लगातार मोहंडिया के जंगल में ही देखा जा रहा है। गांव महेश्वरी में रविवार को उसने एक किसान पर हमला भी बोला। शनिवार शाम को जंगल में भी गांव मोहंडिया में वन विभाग की टीम को गुलदार दिखा था।

वन विभाग ने गांव मोहंडिया में गुलदार की लोकेशन का पता करने को पांच ट्रैप कैमरे लगाए हैं। एक खेत में लगे कैमरे में शनिवार रात गुलदार कैद हो गया है। गुलदार को पकड़ने के लिए वन विभाग पिंजरा पहले ही लगा चुका है। अब घटनास्थल से एक किमी दूर कैमरा लगाने की तैयारी चल रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें