leopard
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यहां पर शिकार भरपूर मात्रा में मौजूद रहता है। यह क्षेत्र खादर के हैं। यहां से थोड़ी दूर आगे ही मालन नदी गंगा में मिल जाती है। खादर में नीलगाय, बारहसिंगा, चीतल, खरगोश आदि की भरमार है। मालन नदी के बाद अगर गुलदार गंगा किनारे पहुंच गई तो वहां से उसका जाना मुश्किल है। वहां इंसानी गतिविधियां भी कम हैं। वन विभाग ने गुलदार की पहचान के लिए सेवानिवृत्त डीएफओ जीएस खुशारिया को बुलाया था।
उन्होंने डीएफओ एम सेम्मारन के साथ असगरपुर व मोहंडिया में गुलदार के पदचिह्न की जांच की। जांच में प्रथम दृष्ट्या दोनों जगह के पदचिह्न एक जैसे मिले हैं। दोनों की बनावट के आधार पर वे मादा गुलदार के निकले। रिटायर्ड डीएफओ जीएस खुशारिया के अनुसार दोनों जगह गुलदार के पदचिह्न प्रथम दृष्टया एक से हैं। इनकी और गहराई से जांच की जाएगी।