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भाकियू कार्यकर्ताओं का जबरदस्त धरना प्रदर्शन, सरकारी कार्यालय में भरा गन्ना, देखें तस्वीरें

Fri, 26 Oct 2018 02:17 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
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किसान आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
यूपी के बिजनौर में मिल न चलने और गन्ना बकाया भुगतान न होने के विरोध में किसानों ने आंदोलन किया। भाकियू के बैनर तले किसान कलक्ट्रेट में दस ट्रैक्टर ट्राली गन्ना लेकर पहुंचे। किसान डीएम ऑफिस के सामने गन्ने की ट्रैक्टर ट्राली खड़ी करके धरने पर बैठ गए। कहा कि किसान इस बार कलक्ट्रेट से अधिकारियों को गन्ना बेचेंगे। गन्ने का भुगतान डिजिटल इंडिया के तहत उनके खाते में भिजवाया जाएगा।
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किसान आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
बिजली की जर्जर लाइनों के विरोध में किसानों ने एक ट्राली जला हुआ गन्ना विद्युत निगम के एसई कार्यालय में भर दिया। एसई के कक्ष में भी किसानों ने उनके सामने ही मेज पर जला हुआ गन्ना रख दिया और खूब खरीखोटी सुनाई। कहा कि जब तक चीनी मिल नहीं चलेंगी किसान ऐसे ही गन्ना छीलकर कलक्ट्रेट में भरते रहेंगे। भाकियू भानू ने कलक्ट्रेट में धरना देते हुए डीसीओ कार्यालय के सभी कक्षों की तालाबंदी कर कार्यालय पर कब्जा कर लिया। वहीं राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन का धरना अधिकारियों के आश्वासन पर समाप्त हो गया।
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किसान आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
भाकियू के बैनर तले किसान गन्ना समिति कार्यालय पर एकत्र हुए। किसान प्रदर्शन करते हुए गन्ने से भरी दस ट्रैक्टर ट्राली लेकर नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे। कलक्ट्रेट पर भारी पुलिस बल तैनात था, लेकिन किसानों को किसी ने अंदर जाने से नहीं रोका। किसानों ने डीएम ऑफिस के सामने गन्ने से भरी ट्रैक्टर ट्राली खड़ी कर दी और वहीं धरना देकर बैठ गए। जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह ने कहा कि वे 25 अक्तूबर से मिल चलाने का शासनादेश लेकर आए हैं। शासनादेश का पालन कराना प्रशासन का काम है।

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किसान आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि किसान गन्ना लेकर मिलों में गन्ना तुलवाने गए थे, लेकिन कोई मिल चलती नहीं मिली। मजबूरी में गन्ना लेकर यहां आए हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास गन्ने की वजन की पर्ची है। उसी के आधार पर प्रशासन गन्ने का भुगतान करे। अगर ऐसा नहीं कर सकता तो कलक्ट्रेट में धर्मकांटा लगवाए। अब किसान कलक्ट्रेट में डेरा नहीं डालेंगे। किसान खेतों में जाकर गन्ना छीलेंगे और कलक्ट्रेट में लाकर भरेंगे। अब तो रोज कलक्ट्रेट में और सभी सरकारी विभागों में किसान गन्ना तुलवाएंगे। जिलाध्यक्ष ने कहा कि डीसीओ चीनी मिल नवंबर में चलवाने की बात कह रहे हैं। शासनादेश मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव के आदेश के बाद जारी होता है। डीसीओ मुख्यमंत्री से भी बड़े हो गए हैं। किसानों ने कहा कि गन्ने की फसल बिजली की जर्जर लाइनों से जल रही है। इस सबके जिम्मेदार एसई हैं।
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किसान आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद किसान एक ट्राली जला हुआ गन्ना लेकर एसई (अधीक्षण अभियंता) कार्यालय पहुंचे और कार्यालय परिसर में ही गन्ना पलट दिया। किसानों ने एसई सीपी सिंह के कक्ष में भी गन्ना भर दिया और हंगामा किया। सीपी सिंह के सामने मेज पर भी गन्ना रख दिया। किसानों ने कहा कि किसान का जो भी गन्ना जलेगा उसका भुगतान एसई से लिया जाएगा। किसानों के धरने की अध्यक्षता मोहम्मद यामीन व संचालन राकेश प्रधान ने किया। मंडल महासचिव अतुल कुमार, मीडिया प्रभारी संदीप त्यागी, राकेश कुमार, सचिन कुमार, प्रदीप आदि किसान मौजूद रहे।
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किसान आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
अनिश्चितकालीन धरना शुरू 
प्रशासनिक अधिकारियों ने कलक्ट्रेट में भाकियू व डीसीओ कार्यालय में भाकियू भानु के पदाधिकारियों से अलग अलग वार्ता की। वार्ता में कोई नतीजा नहीं निकला। भाकियू के जिला मीडिया प्रभारी संदीप त्यागी के अनुसार अफसरों ने मिल अक्तूबर में चलाने से हाथ खड़े कर दिए हैं। किसानों का अनिश्चितकालीन धरना कलक्ट्रेट में शुरू कर दिया गया है। वहीं, भाकियू भानु का डीसीओ कार्यालय पर धरना छठे दिन भी जारी रहा। किसानों से वार्ता करने के लिए एडीएम प्रशासन विनोद कुमार गौड़ व मिलों के अधिकारी पहुंचे, लेकिन किसानों ने मिल न चलने तक धरना खत्म करने से इंकार कर दिया। किसानों ने डीसीओ कार्यालय के तालाबंदी से बचे कक्षों पर भी ताले जड़ दिए और कार्यालय पर कब्जा कर लिया। जिलाध्यक्ष वीर सिंह सहरावत ने कहा कि हर हाल में चीनी मिलों को 30 नवंबर तक चलाया जाए और गन्ना मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित हो। धरने में बाला देवी, सतवीर सिंह, मनीश चौधरी, डोरी पहलवान, राहुल कुमार, बीरबल आदि मौजूद रहे।
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किसान आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
एसपी सिटी भी धरने पर जाकर बैठ गए
भाकियू के धरने में वक्ताओं ने कहा कि किसानों की आरसी काटकर उन्हें पकड़ा जा रहा है। किसानों का गन्ना चीनी मिलों पर है। चीनी मिलों की आरसी कभी नहीं काटी जाती है। बिजली के तारों से आए दिन किसानों की फसल जल रही हैं। इसकी शिकायत करते हैं तो निगम के अधिकारी कहते हैं कि ज्यादा बिजली देने से तार पिघल रहे हैं। अगर तार पिघल रहे हैं तो इसमें क्या किसान की गलती है। किसान को न तो फसल का भुगतान मिलता है और न मुआवजा। एसपी सिटी डॉ. दिनेश सिंह तो बुधवार रात को अखिल भारतीय किसान संगठन के धरने में किसानों के बीच जाकर बैठ गए। कहा कि उनके साथ ही उठेंगे। भाकियू के पदाधिकारी अभी और बड़ा आंदोलन करने की बात कह रहे हैं।

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