नकली पेट्रोल-डीजल
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पुलिस के मुताबिक तेल माफिया राजीव जैन और प्रदीप गुप्ता ने नकली पेट्रोल-डीजल बनाने का तरीका बताया कि उनके पास थिनर और सॉलवेंट का लाइसेंस है। करीब दस साल से थिनर और सॉलवेंट में रंग मिलाकर वह नकली तेल बनाते हैं। फैक्टरी में पांच-छह कर्मचारी काम करते थे, अधिकांश काम मशीनों से होता था। जिसका दोनों ने डेमो भी करके दिखाया। जमीन में दबे टैंक में थिनर, सॉलवेंट व बैंजीन नोजिल पंपों के जरिये डालकर रंग मिलाया जाता था। एक टैंकर तेल में 30-40 फीसदी नकली पेट्रोल-डीजल मिलाकर पेट्रोल पंपों पर सप्लाई होता था।
मेरठ में तेल माफिया जलेबी के रंग से नकली पेट्रोल और डीजल तैयार करते थे। फैक्टरी के अंदर जमीन में बड़े लोहे के टैंक दबे थे। जिसमें थिनर, सॉलवेंट और बैंजीन का मिश्रण होता था। उसके बाद जलेबी वाला रंग मिलाया जाता था। मिश्रण का रंग पेट्रोल-डीजल जैसा हो जाता था। जिसके बाद इसको टैंकरों में नोजिल के जरिये भरा जाता था।