सती आशा देवी
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मंदिर के महंत सेवागिरी महाराज ने बताया कि दिल्ली के एक व्यापारी क्षेत्र में व्यापार करने आए थे। स्थानीय लोगों ने लालच वश व्यापारी की हत्या कर दी और शव को कुछ दूर एक खेत में मिट्टी में दबा दिया था। कहा जाता है कि व्यापारी की आत्मा ने दिल्ली में रह रही पत्नी को सपने में बताया कि स्थानीय लोगों ने उसे मारकर खेत में दबा दिया है। इस पर उनकी पत्नी बंजारन आशा देई और उनकी सास गांव अकबरपुर गढ़ी के जंगल में पहुंची। आशा देई ने गाय के गोबर के गोले बनाए और अपनी आध्यात्मिक शक्ति से कहा कि जहां पर उनके पति मौजूद हैं, ये गोले वहीं गिरें। जब उन्होंने गोले उछाले तो वे खेत में उसी स्थान पर गिरे, जहां व्यापारी का शव दबाया गया था।
आशा देई ने लोगों की मदद से पति के शव को निकाला और गंगा की ओर चल पड़ीं। गंगा मां ने उन्हें दर्शन दिए। इसके बाद आशा देई अपने पति के शरीर को गोद में लेकर बैठ गई। तभी वहां अग्नि प्रकट हो गई। आशा देई ने पति के साथ अपने शरीर को भी भस्म कर लिया था। बाद में यहीं पर मंदिर की स्थापना की गई।