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गंगा के कटान से निजात दिलाने के लिए बल्लियों का सहारा, तस्वीरों में देखें लोगों की मुश्किलों का हाल

Thu, 08 Aug 2019 06:18 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
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गंगा से हो रहे कटान को रोकने के लिए बल्लियां और बाेरियां लगाते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर जनपद के मंडावर थाना क्षेत्र में गंगा के कटान से बचाव के लिए सिंचाई विभाग ने कुछ गांवों के किनारे अस्थायी तटबंध बनाने शुरू कर दिए हैं। गंगा किनारे बल्लियां गाड़कर उनके बीच में मिट्टी से भरी बोरी रखी जा रही हैं। इससे कटान से कुछ निजात मिली है। गांव वालों ने गंगा के कटान से निजात दिलाने के लिए स्थायी तटबंध बनवाने की मांग की है।
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मंडावर के ग्राम सिमली के पास हो रहे कटान को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा लगवाई जा रही बल्लियां - फोटो : अमर उजाला
गांव सिमली, फतेहपुर सभाचंद के सामने गंगा की धारा तेजी से कटान कर रही है। गंगा खेतों की मिट्टी काटते हुए तेजी से गांवों की ओर बढ़ रही है। मंगलवार को डीएम रमाकांत पांडेय, पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह आदि ने कटान का निरीक्षण किया था। बुधवार को गांव में कटान से निजात दिलाने के लिए अस्थायी तटबंध बनने शुरू हो गए हैं। सिंचाई विभाग ने गंगा किनारे बल्ली की दो बाड़ लगाई हैं। इनके बीच में करीब दो फीट का अंतर रखा गया है। इनके बीच में मिट्टी भरे बोरे रखे जा रहे हैं।
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गंगा नदी के कटान को दिखाते गांव गौसपुर के किसान - फोटो : अमर उजाला
गंगा की तेज लहरें अब तट के पास कटान करने के बजाए मिट्टी भरी बोरियों से टकराकर लौट रही हैं। गांव सिमली, फतेहपुर सभाचंद के पास ये अस्थायी तटबंध बनाए जा रहे हैं।

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गांव गौसपुर की कृषिभूमि का गंगा नदी ने किया कटान - फोटो : अमर उजाला
सिंचाई विभाग के जेई जोगेंद्र कुमार की देखरेख में अस्थायी तटबंध बनाए गए। गांव कुंदनपुर, मिर्जापुर, मीरापुर, कोहरपुर, डेबलगढ़, राजारामपुर, चाहड़वाला, रावली आदि गांवों की ओर भी गंगा कटान करते हुए बढ़ रही है। इन गांवों को बचाने के लिए अभी तक कोई प्रयास शुरू नहीं किए गए हैं।
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ग्राम शाहलीपुर कोटरा के पास बने पुल की टूटी सड़क - फोटो : अमर उजाला
क्षेत्रीय किसानों राजवीर सिंह, अतुल कुमार, नौबहार आदि का कहना है कि सिंचाई विभाग द्वारा अस्थायी कार्य किया जा रहा है। गंगा के उग्र रूप के सामने ये बल्लियां नहीं टिक पाती हैं। पहले भी ऐसा कार्य किया जा चुका है, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। सिंचाई विभाग को गंगा किनारे पत्थरों के स्थायी तटबंध बनाने चाहिएं। गंगा के कटान से निजात न दिलाने पर गांव वालों ने आंदोलन करने की चेतावनी दे रखी है।
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सैडिल बांध मार्ग पर पहाड़ों से टूटकर गिरे चट्टान के टुकड़े - फोटो : अमर उजाला
वहीं वर्षा के चलते गंगा नदी उफान के साथ बह रही है। गंगा नदी के कृषि भूमि का कटान करते हुए गांव गौसपुर की ओर बढ़ने किसानों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई हैं। ग्रामीण एक दशक से अधिक समय से कृषि भूमि और गांव को बचाने को लेकर प्रशासन से नदी क्षेत्र में पक्का तटबंध बनाने की मांग करते आ रहे हैं।

पर्वतीय व मैदानी क्षेत्र में भारी वर्षा के चलते गंगा नदी सहित मालन, रतनाल, सूखा, लकड़हान आदि नदियों को जलस्तर बढ़ रहा है। गंगा के बढ़े जलस्तर ने गौसपुर के किसानों की नींद उड़ा दी है। एक दशक पहले गंगा नदी गांव गौसपुर से दो किमी की दूरी पर बहती थी। करीब दस वर्ष पहले उत्तराखंड सीमा की ओर गंगा के पश्चिमी छोर पर पक्का तटबंध बनाए जाने के बाद गंगा नदी के मुख्य धारा गांव गौसपुर की तरफ मुड़ गई। प्रतिवर्ष मानसूनी वर्षा के दौरान गंगा नदी गौसपुर के किसानों की कृषिभूमि का कटान करते हुए गांव की ओर बढ़ रही है। अरविंद कुमार, अवनीश कुमार, राजेश, वीरेंद्र सिंह, लाल सिंह, पीतम सिंह आदि किसानों का कहना है कि गंगा नदी से कृषि भूमि और गांव को बचाने के लिए उन्होंने शासन प्रशासन से नदी क्षेत्र में तटबंध बनाने की मांग की। लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने बरसात के दौरान गांव का दौरा करते हुए नदी क्षेत्र में पक्का तटबंध बनवाने का आश्वासन देने के अलावा कुछ नहीं किया।

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