दिव्या काकरान के पिता सूरज और मां संयोगिता ने अखाड़े में बेटी को उतारने का फैसला लिया। अपने सपनों को बेटी के सहारे पूरा करने के मकसद से पिता ने पुरबालियान गांव छोड़ दिया और दिल्ली के गोकलपुर में किराये पर मकान ले लिया, ताकि बेटी को प्रशिक्षण दिला सके। आगे पढ़िए दिव्या के जीवन से जुड़ी खास बातें और जकार्ता में क्यों ऐतिहासिक रही दिव्या की जीत।