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डेंगू से डरें नहीं बरतें ये सावधानी, चिकनगुनिया भी हो सकता है साधारण बुखार, ऐसे करें पहचान

Sun, 16 Sep 2018 07:25 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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डेंगू
मौसम का मिजाज़ बदलते ही डेंगू और चिकनगुनिया जैसे खतरनाक मच्छरों का लोगों में खौफ चढ़ने लगा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार,पूरे प्रदेश में अब तक डेंगू के भी 11 मरीज सामने आए हैं जबकि चिकनगुनिया के 11 मरीज सामने आए हैं। वहीं अब तक शहर में डेंगू के दो मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। आइए जानते हैं कैसे डेंगू और चिकनगुनिया से बचा जा सकता है और क्या रखें सावधानी:-  
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डेंगू ने दी दस्तक, रहें होशियार

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डेंगू
डेंगू और चिकनगुनिया का घातक वार शुरू हो गया है। मेरठ में डेंगू के अब तक दो मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। शनिवार को डेंगू का एक और मरीज मिला है। यह मरीज तारापुरी निवासी गुलजार (24) है। बुखार होने पर मंगलवार को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार को ब्लड सैंपल की जांच कराने पर डेंगू की पुष्टि हुई है।इस पूरे सीजन में अब तक मेरठ में चार मरीजों को डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। इनमें मेरठ का यह दूसरा मरीज है, बाकी दो मरीज बागपत और बुलंदशहर के रहने वाले हैं। पिछले साल मेरठ में डेंगू के 660 मरीज मिले थे, जबकि 2016 में 183 मरीजों को डेंगू की पुष्टि हुई थी। 
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यहां पनपता है डेंगू का लार्वा

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डेंगू
पुराने कबाड़, टायरों, ड्रम और कूलर में भरे पानी में डेंगू का लार्वा ज्यादातर पनपता है। इसलिए जमा पानी जमा होने के कारण डेंगू का खतरा बढ़ा हुआ है। पिछले पांच दिन में चार मरीजों को डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। सीएमओ डॉ. राजकुमार का कहना है कि सिर्फ प्लेटलेट्स गिरने पर यह नहीं समझें कि डेंगू हैं। सामान्य बुखार भी हो सकता है। जांच कराने के बाद ही सही तरीके से पता चलता है कि डेंगू है या नहीं। मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी लैब और जिला चिकित्सालय की लैब में जांच के बाद ही आधिकारिक तौर से डेंगू की पुष्टि मानी जाती है। निजी लैब में पुष्टि होने पर भी इन्हीं लैब में पूरी तरह से पुष्टि करने के लिए सैंपल भेजे जाते हैं।

ऐसे समझें डेंगू और चिकनगुनिया में फर्क

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डेंगू
मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया ये सभी जानलेवा बीमारियां मच्छर के काटने से फैलती हैं । बावजूद इसके इन सभी बीमारियों के लक्षण और इलाज में काफी फर्क होता है।हर साल मौसम बदलते ही ये बीमारियां अपने चरम पर रहती हैं और ज्यादातर लोग इन बीमारियों के बीच का फर्क समझ नहीं पाते।जिसकी वजह से रोगी का इलाज सही ढंग से नहीं हो पाता। आइए जानते हैं मच्छर से होने वाली इन दोनों बीमारियां के बीच आखिर क्या बड़ा फर्क है। 
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ऐसे करें डेंगू की पहचान

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डेंगू के मच्छर
डेंगू में बुखार के साथ हाथ-पैर में दर्द रहता है। इंसान को भूख कम लगने लगती है। जी मचलाना और उल्टी करने का भी मन होता है। डेंगू का बुखार बहुत तेज होता है और ठंड के साथ बुखार आता है। डेंगू के बुखार का एक खास लक्षण होता है सिर में और आंखों में तेज दर्द। कभी-कभी आंख और नाक से खून आने के लक्षण भी दिख सकते हैं। स्किन में लाल धब्बे पड़ना भी कभी-कभी देखा गया है। डेंगू की सबसे अहम पहचान होती है कि मरीज को बुखार के साथ कमजोरी लगने लगती है क्योंकि उसके प्लेटलेट्स कम होने लगते हैं।
 
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डेंगू नहीं चिकनगुनिया भी हो सकता है बुखार

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डेंगू मच्छर
चिकनगुनिया के लक्षण भी डेंगू से मिलते जुलते हैं लेकिन इसमें प्लेटलेट्स काउंट कम नहीं होते हैं इसलिए मरीज को डेंगू की तलना में कमजोरी कम लगती है। चिकनगुनिया का सबसे अहम लक्षण शरीर  में चकत्ते या दाने पड़ना होता है। जिनका रंग हल्का लाल रंग का होता है। इसमें तेज बुखार के साथ जोड़ों में दर्द चिकनगुनिया का सामान्य लक्षण होता है। जब भी बुखार आता है तो तेज सरदर्द और चक्कर आने जैसे लक्षण भी देखे जा सकते हैं। चिकनगुनिया में शरीर में जकड़न की समस्या भी रहती है। 
 
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इनसे मिलेगा लाभ

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गिलोय
आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार गिलोय एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है, डेंगू में इसके पत्तों के रस का सेवन करने से लाभ मिलता है। डेंगू का बुखार 5 से 6 दिन के अंदर अपना असर दिखाना शुरू कर देता है। जिसकी वजह से शरीर में तेजी से प्लेटलेट्स का स्तर कम होने लगता है। इससे निजात पाने के लिए गिलोय और 7 तुलसी के पत्तों का रस पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह रक्त के प्लेटलेट्स का स्तर भी बढ़ाता है। गिलोय की कड़वाहट को कम करने के लिए इसे किसी अन्य जूस में मिलाकर पी सकते हैं।
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ऐसे करें डेंगू चिकनगुनिया से बचाव 

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डेंगू - फोटो : amar ujala
चिकनगुनिया से बचने के लिए फिलहाल कोई टीका अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाया है। इस बीमारी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है खुद को मच्छरों से बचाए रखें। अपने घर के आसपास की जगह पर सफाई रखें। घर के पास पानी ना जमा होने दें। बात दें, डेंगू और चिकनगुनिया के मच्छर साफ पानी में ही पैदा होते हैं। चिकनगुनिया के मच्छर ज्यादातर दिन के समय काटते हैं। इसलिए सिर्फ रात ही नहीं बल्कि दिन में भी मच्छरों से बचाव जरूरी है। इनसे बचने के लिए मच्छरदानी का इस्तमाल करें। इस मौसम में कोशिश करें कि हमेशा पूरी बाजू के ही कपड़े पहनें। लक्षणों के आधार पर डॉक्टर से सलाह लेकर ही दवा लें। डॉक्टर को दिखाए बिना अपनी मर्जी से ही कोई दवा लेने की भूल बिल्कुल ना करें। 
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