मेरठ विकास प्राधिकरण का गेट नंबर 2 मौत का द्वार समझा जाता है। जैसे ही यह गेट खोला तो किसी न किसी कर्मचारी की मौत हो जाती है। लगभग पांच बार गेट खोला गया।
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एमडीए कर्मचारी
जब भी गेट खुला किसी न किसी कर्मचारी की या तो हृदय गति रुक जाने से मौत हो गई या दुर्घटना में मौत हो गई। इतना ही नहीं एक बार तो यहां निर्माण कार्य में लगे ठेकेदार की गेट खुलते ही मौत हो गई।
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एमडीए द्वार
तभी से इस गेट को पनौती समझा जाता है और पिछले 15 साल से इस गेट पर ताला लगा है। कोई भी अधिकारी इस गेट को खोलने की हिम्मत नहीं करता। यही कारण है कि गेट नंबर 1 से ही एमडीए में लोग आते जाते हैं।
यहां के कर्मचारियों का भी मानना है कि इस गेट को बंद ही रखा जाए। कर्मचारी संघ के अध्यक्ष तथा अन्य कर्मचारी भी इसी बात की आला अधिकारियों से मांग कर चुके हैं इस गेट को कतई न खोला जाए।