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सरकारी गनर लेकर वीआईपी बना था कुख्यात 'बाफर', पश्चिमी यूपी के इन जिलों में जमाता था धौंस

Tue, 16 Jul 2019 12:28 PM IST
Dimple Sirohi गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ
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कुख्यात रोहित को संरक्षण देने वाला भूपेंद्र बाफर - फोटो : अमर उजाला
हिस्ट्रीशीटर भूपेंद्र बाफर को पुलिस-प्रशासन ने वीआईपी बनाया हुआ था। उसका आपराधिक रिकॉर्ड छुपाकर नियमों को धज्जियां उड़ाकर उसे दो सरकारी गनर दिए थे। सरकारी असलहों से लैस दोनों पुलिसकर्मियों के बीच बाफर चलता था। इनके जरिये बाफर मेरठ, मुजफ्फरनगर और बागपत जिले में धौंस जमाता था।

मुजफ्फरनगर में मिर्जापुर पुलिस की कस्टडी से भागे कुख्यात रोहित उर्फ सांडू को बाफर ने छुड़ाया। इसके बावजूद भी पुलिस की नींद नहीं टूटी। मुजफ्फरनगर सर्विलांस टीम की जांच में बाफर का नाम आया, तब जाकर गनर वापस हुए।
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मौके पर मौजूद पुलिस - फोटो : अमर उजाला
जेल से जमानत पर छूटने के बाद भूपेंद्र बाफर राजनीतिक लोगों के संपर्क में रहने लगा। जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा, जिसमें वह हार गया। पत्नी बीडीसी सदस्य का चुनाव जीत गई।

पुलिस के मुताबिक वह अपराध में एक्टिव रहने लगा। उसकी सुशील मूंछ से दुश्मनी चल रही है, इसकी जानकारी भी राजनीतिक लोगों को थी। दो माह पहले सुशील मूंछ जेल में चला गया। जिसके बाद बाफर ने अफवाह उड़ा दी कि वह पुलिस से साठगांठ करके जेल में गया है। 
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यूपी पुलिस - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद बाफर ने अपनी जान का खतरा बताना शुरू कर दिया। राजनीतिक लोगों ने पुलिस से सेटिंग कराकर उसे सरकारी गनर दिला दिए। पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों ने भी आंख मूंदकर हिस्ट्रीशीटर भूपेंद्र बाफर की सुरक्षा में दो गनर दे दिए थे। इसको अमर उजाला ने शुक्रवार के अंक में प्रकाशित किया। जिस पर शासन ने जांच बैठा दी।

एसएसपी अजय साहनी का कहना है कि बाफर को डीएम अनिल ढींगरा, तत्कालीन एसएसपी नितिन तिवारी और सीओ एलआईयू की अनुमति पर पुलिस लाइन से आर्म्स पुलिस के दो सिपाही सतीश, अमित दिए गए थे। दरोगा की हत्या कर रोहित उर्फ सांडू की फरारी में बाफर की गिरफ्तारी के दौरान भी दोनों गनर मौजूद थे। 

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कुख्यात रोहित को संरक्षण देने वाला भूपेंद्र बाफर - फोटो : अमर उजाला
कैसे मिलते हैं सुरक्षा के लिए गनर 
सरकारी सुरक्षा मुहैया कराने के लिए जनपदीय कमेटी बनी हुई है। जिसमें डीएम, एसएसपी, सीओ एलआईयू होते हैं। सीओ एलआईयू जांच करके रिपोर्ट डीएम-एसएसपी को देते हैं। उसके बाद डीएम-एसएसपी संस्तुति करते हैं। तभी सुरक्षा मुहैया होती है।

जांच रिपोर्ट में गनर देने वाले का आपराधिक रिकॉर्ड व मुकदमे भी देखे जाते हैं। जिसको गनर देना है, उसके जीवन में कितना भय है। किस मुकदमे में वादी या फिर गवाह बना है। यह तमाम प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही गनर दिया जाता है। हिस्ट्रीशीटर बाफर को गनर देने से पहले पुलिस ने इन नियमों का पालन किया या नहीं, इसका खुलासा जांच पड़ताल के बाद ही होगा। 
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बाफर की गिरफ्तार के दौरान मेरठ पुलिस - फोटो : अमर उजाला
दोनों सिपाहियों से होगी पूछताछ 
एसएसपी के मुताबिक दोनों सिपाही दो महीने तक बाफर के साथ रहे। बाफर किन नेताओें के पास और कहां-कहां जाता था। इसकी जानकारी सिपाहियों से भी ली जाएगी।

बाफर का अपराध की दुनिया में कितना हस्तक्षेप था, इसकी जांच कराई जा रही है। कुख्यात रोहित उर्फ सांडू को उसने कहां छुपाया है, इसकी तलाश मेरठ पुलिस ने भी शुरू कर दी।
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भूपेंद्र बाफर समेत अन्य गिरफ्तार आरोपी - फोटो : अमर उजाला
दरोगा की हत्या के बाद नहीं जागी पुलिस 
दो जुलाई को मुजफ्फरनगर में मिर्जापुर पुलिस के दरोगा को गोली मारकर कुख्यात रोहित उर्फ सांडू को छुड़ाया गया था। दरोगा की मौत हो गई, इसके बावजूद भी मेरठ पुलिस की नींद नहीं टूटी।

एक सप्ताह तक बाफर पुलिस के दो गनरों को लेकर घूमता रहा, लेकिन किसने उसको टोकना मुनासिब नहीं समझा। बाफर के पास दो गनर हैं, यह सुनकर मुजफ्फरनगर से आई टीम भी हैरत में पड़ गई थी। उन्हीं गनर के जरिये उसको पुलिस लाइन में बुलाया गया, तब जाकर गिरफ्तारी की गई।
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भूपेंद्र बाफर समेत अन्य गिरफ्तार आरोपी - फोटो : अमर उजाला
बाफर का हिस्ट्रीशीट नंबर-154 ए 
भूपेंद्र बाफर का जानी थानाक्षेत्र में बाफर गांव है। बाफर की जानी थाने में हिस्ट्रीशीट (154 ए) खुली हुई है। उनसे सन 1985 में बाफर ने अपने साथियों के साथ हैदराबाद में एक बैंक में डकैती व साल 1987 में आंध्र प्रदेश में बैंक लूटा था।

1991 में मुजफ्फरनगर में हत्या, 1992 में देहरादून में हत्या, 2007 में लिसाड़ीगेट में जानलेवा हमला किया। 2007 में सदर बाजार में हत्या, 2012 में लालकुर्ती में केबल कारोबारी की हत्या समेत 30 से अधिक आपराधिक मुकदमे हैं। जिसमें कई मुकदमों में बाफर बरी भी हुआ है। 
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