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Vikas Dubey Arrested: यूपी पुलिस की नाकामी के सबूत हैं ये तीन बड़े मामले, जानकर होंगे हैरान, एनकाउंटर से बच गया विकास दुबे

Thu, 09 Jul 2020 12:29 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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विकास दुबे, बदन सिंह बद्दो और मुन्ना बजरंगी मर्डर केस का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश की पुलिस बार- बार नाकाम साबित होती है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ, जब किसी कुख्यात को यूपी पुलिस नहीं पकड़ पाई हो। पांच लाख के इनामी हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के अलावा एक और कुख्यात पिछले 15 माह से यूपी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। ढाई लाख का इनामी बदन सिंह बद्दो सवा साल पहले मेरठ के एक होटल से फरार हो गया था। यूपी पुलिस की नाकामी के सबूत हैं ये तीन बड़े मामले, आगे जानिए पूरा अपडेट-
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बदन सिंह बद्दो - फोटो : अमर उजाला
पहला मामला
पश्चिमी यूपी का कुख्यात बदन सिंह बद्दो 15 माह पहले पुलिस कस्टडी से फरार हो गया था। उसे फर्रुखाबाद जेल से फतेहगढ़ पुलिस गाजियाबाद कचहरी में पेशी पर लाई थी। पेशी कराने के बाद बद्दो ने साथ आए पुलिसकर्मियों को मेरठ के होटल मुकुट महल में शराब पार्टी दी थी। इस दौरान उसने पुलिसकर्मियों को शराब में नशीला पदार्थ पिला दिया और वह आसानी से होटल से फरार हो गया था।
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कुख्यात बदन सिंह बद्दो - फोटो : social media
बद्दो को साल 2017 में रविंद्र गुर्जर की हत्या में उम्रकैद की सजा गाजियाबाद कोर्ट ने सुनाई थी। तभी से बद्दो जेल में बंद था। मेरठ के बसपा नेता और जिला पंचायत सदस्य संजय गुर्जर की हत्या में भी बद्दो पर सुनवाई होनी थी। बद्दो की गाजियाबाद कोर्ट में पेशी थी। फतेहगढ़ थाने की पुलिस बद्दो को लेकर गाजियाबाद पहुंचे थे। पेशी कराकर फतेहगढ़ पुलिस बद्दो को मेरठ में दिल्ली रोड स्थित मुकुट महल होटल लेकर पहुंची थी। वहीं से वह फरार हो गया था। अब सवाल है कि 15 माह बाद तक भी यूपी पुलिस ढाई के इनामी कुख्यात को क्यों नहीं पकड़ पाई?

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मुन्ना बजरंगी व कुख्यात सुनील राठी बाएं - फोटो : अमर उजाला
दूसरा मामला 
बागपत के जिला कारागार में दो साल पहले माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या कर दी गई थी। उस समय भी यूपी पुलिस पर सवाल उठे थे कि आखिर जेल में मर्डर कैसे हो गया? जेल में पिस्टल कौन और कैसे ले गया? मुन्ना बजरंगी की हत्या में आज तक भी कई सवाल अनसुलझे हैं।
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मुन्ना बजरंगी हत्याकांड फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
ऐसे हुई थी हत्या
साल 2017 में बसपा के पू्र्व विधायक लोकेश दीक्षित से मुन्ना बजरंगी और सुल्तीन ने रंगदारी मांगी थी। साथ ही जान से मारने की भी धमकी दी थी। इसी केस में मुन्ना बजरंगी की कोर्ट में पेशी थी, झांसी जेल से लाकर उसे बागपत जेल में शिफ्ट किया था। बताया गया था कि सुनील राठी और मुन्ना बजरंगी में झगड़ा हुआ, जिसके बाद मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस दौरान कई राउंड फायरिंग हुई थी।
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माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी - फोटो : file photo
सवाल है कि आखिर जेल में पिस्तौल कब और कैसे पहुंची? वारदात में क्या अकेला सुनील राठी शामिल था या उसके गैंग के सदस्यों की भी कोई भूमिका है। सुनील राठी ने यह कहकर पुलिस अधिकारियों को चौंका दिया था कि पिस्तौल मुन्ना बजरंगी की थी। लेकिन सवाल यह भी था कि अगर ऐसा था तो फिर राठी ने पिस्तौल गटर में क्यों फेंक दिया था।
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गैंगस्टर विकास दुबे - फोटो : Amar Ujala
तीसरा मामला
अब तीसरा मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर से जुड़ा है। कानपुर जिले के चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में दबिश देने गई पुलिस पर हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे ने अपने साथियों के साथ मिलकर गोलियां बरसाईं थी। इसमें सीओ समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। इतनी बड़ी घटना को अंजाम देने के बाद हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे फरार हो गया था।
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कुख्यात अपराधी विकास दुबे गिरफ्तार - फोटो : ANI
कानपुर में सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के मुख्य आरोपी हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को यूपी पुलिस पकड़ नहीं पाई। वहीं गुरुवार को मध्य प्रदेश की पुलिस ने दुबे को उज्जैन के महाकाल मंदिर से गिरफ्तार किया तो फिर यह सवाल उठा कि आखिर सात दिनों में यूपी पुलिस पांच लाख के इनामी को क्यों नहीं पकड़ पाई?

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