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पहले प्यार की याद में आंसू बहा रहीं सारस को मिला नया साथी, भावुक कर देगी ये कहानी...

Sat, 17 Nov 2018 05:23 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
सालों से मेरठ के शोभापुर में प्रवास कर रहे सारस के एक जोड़े के साथी का शिकार कर लिया गया। साथी के वियोग में दूसरा सारस महीनों से आंसू बहा रहा था। दिन रात उसकी तेज आवाज सुनकर तालाब के पास रहने वाले किसान भी दुखी हो रहे थे। इससे पहले कि वो अपने साथी के वियोग में प्राण त्याग देता उसे एक नए सारस ने अपना लिया।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
अब ये जोड़ा रोज खेतों में अठखेलियां करता नजर आ रहा है। तालाब के पास रहने वाले किसानों ने अब इनकी देखरेख और निगरानी शुरू कर दी है।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
प्रदेश के राजकीय पक्षी सारस के संरक्षण के लिए वन विभाग 20 नवंबर के बाद जिले में इनकी गणना शुरू करने जा रहा है। पिछले रिकॉर्ड के मुताबिक, हस्तिनापुर में 25 सारस हैं। सारस को लेकर आर्नीथोलिजिस्ट डॉ. रजत भार्गव ने बताया कि शोभापुर के तालाब में सारस का करीब 50 सालों से बसेरा है। तालाब में रहने वाले सारस के बारे में पास ही के फॉर्म हाउस मालिक से बात की गई तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। इस दुर्लभ पक्षी के शिकार का सच उजागर हुआ।

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
रिटायर्ड ब्रिगेडियर का परिवार करता है देखभाल

शोभापुर गांव के बाहर रिटायर ब्रिगेडियर ज्ञान सिंह का फॉर्म हाउस है। ज्ञान सिंह माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वाली टीम के मुखिया थे। उन्हें राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया था। ज्ञान सिंह के पोते रंजीत सिंह मांगट यहां पर खेती करते हैं।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
करीब 45 वर्षीय रंजीत सिंह ने बताया कि वह बचपन से यहां सारस देखते आ रहे हैं। पहले यहां छह तक सारस थे। पिछले साल यहां पर सारस के दो बच्चे भी पैदा हुए। बड़े होने पर वे जोड़ा बनाने के लिए कहीं और चले गए। उसके बाद से यहां पर दो सारस थे। करीब तीन माह पहले उन्होंने दिन-रात सारस की तेज आवाज सुनी तो वे तालाब के पास गए। उन्होंने देखा कि अकेली सारस तेज आवाज में रो रही थी।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
वहीं जानकारी करने पर पता चला कि यहां पर कुछ मजदूर आए थे। वे एक सारस को मारकर ले गए। रंजीत सिंह बताते हैं कि सारस की पीड़ा देखकर उनको लगता था कि अब ये मर जाएगी। लेकिन 20 दिन पहले यहां पर एक दूसरा सारस कहीं से आ गया। अब ये जोड़े में रह रहे हैं।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
घट रही है सारस की संख्या

तालाबों में गंदगी और अतिक्रमण जलीय जीवों के लिए खतरा बना हुए हैं। विषैले कीटनाशक, गैर कानूनी शिकार से पक्षी कम हो रहे हैं। मलेशिया, फिलीपींस और थाइलैंड में तो सारस विलुप्त हो चुके हैं। डॉ. रजत भार्गव बताते हैं कि शोभापुर तालाब में दुनियाभर के प्रवासी पक्षी आते हैं। यहां का रहवास जलीय पक्षियों के लिए बेहद उपयुक्त है। ऐसे में प्रशासन को यह जगह सुरक्षित करानी चाहिए। ताकि पक्षियों की संख्या बढ़ सके।

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
रामायण में भी है सारस के वियोग का जिक्र

'मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगम: शाश्वती: समा:। यत्क्त्रसैंचमिथुनादेकमवधी काममोहितम्।' महर्षि वाल्मीकि ने रामायण के बालकांड में लिखे इस श्लोक में क्रौंच (सारस) पक्षी के वध का वर्णन किया है। इसका अर्थ है कि हे निषाद, तुम अनंत वर्षों तक प्रतिष्ठा प्राप्त न कर सको, क्योंकि तुमने क्रौंच पक्षियों के जोड़े में से कामभावना से ग्रस्त एक का वध कर डाला है। इसमें ऋषि ने बहेलिये को श्राप दिया है। क्योंकि सारस अपने साथी से बिछड़ने के बाद स्वयं भी प्राण त्याग देता है।

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
एक नजर में सारस  

- विश्व में सारस की आठ प्रजातियों में से चार मिलती हैं भारत में।  
- पांचवीं साइबेरियन क्रेन भारत से सन् 2002 में हो गई विलुप्त।
- दुनिया का सबसे विशाल उड़ने वाला पक्षी है सारस।
- विश्व में सबसे ज्यादा सारस भारत में 10 हजार के करीब।
- गंगा के मैदानी और भारत के उत्तरी और उत्तर पूर्वी समान जलवायु वाले भागों में मिलता है।

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
- सारस दलदल, नदी, तालाब, जलाशय, नहर रिसाव क्षेत्र में पाए जाते हैं।
- घनी वनस्पतियों से भरे उथले तालाबों के पास बनाते हैं घोंसला।
- एक बार में दो अंडे देती है, जिन्हें मादा और नर बारी-बारी से सेते हैं।
- 28 से 31 दिन में निकलते हैं अंडे से चूजे, तेजी से बड़े होते हैं चूजे।
- सात से नौ महीने बाद अपने माता-पिता पर निर्भर नहीं रहते सारस।
- दलदल में उपलब्ध प्रोटीनयुक्त आहार (कीड़े, मोलस्क, मछली) पर निर्भर।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
वर्जन
सारस के संरक्षण को लेकर कदम उठाए जा रहे हैं। वन विभाग 20 नवंबर के बाद इनकी गणना शुरू कर रहा है। हम जिले के दूसरे स्थानों को चिन्हित करा रहे हैं, जहां पर सारस हैं। इनकी सुरक्षा को लेकर जरूरी कदम उठाएं जाएंगे। लोग भी ऐसे पक्षियों के बारे में जानकारी दें। अदिति शर्मा, डीएफओ

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