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लब खामोश, लेकिन व्यवस्था की पोल खोल रहा आंसूओं का सैलाब, प्लाजमा के अभाव में दम तोड़ रहे जरूरतमंद

Tue, 04 May 2021 04:02 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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corona in meerut - फोटो : amar ujala
हर तरफ मातम है। लोग अपनों के जाने के गम में डूबे हैं। लब खामोश हैं, लेकिन उनके आंसू व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं। प्राइवेट अस्पताल मरीजों को भर्ती नहीं कर रहे और मेडिकल कॉलेज में लंबी लाइन लगी है। हालात ये हैं कि मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के बाहर मरीज गाड़ियों और एंबुलेंसों में ऑक्सीजन लगाए भर्ती के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।

व्यवस्था चौपट है, लेकिन देखने वाला कोई नहीं है। प्राइवेट चिकित्सक मरीजों को साफ कह रहे हैं कि अगर आपको बुखार है तो हम नहीं देखेंगे। ऐसे में मरीज जाए कहां, किसे दिखाए। वहीं कुछ मेडिकल स्टोर संचालक महामारी के दौर में खूब कमाई कर रहे हैं। लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर महंगे दाम में दवाइयां बेच रहे हैं। हर तरफ आम आदमी तड़प रहा है और इंसानियत दम तोड़ रही है... 
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corona in meerut - फोटो : amar ujala
जरूरतमंदों को नहीं मिल रहा प्लाज्मा, तोड़ रहे दम
मेरठ में अब प्लाज्मा के अभाव में कोरोना संक्रमितों की सांसों की डोर टूूट रही है। अस्पताल में भर्ती मरीजों को समय पर प्लाज्मा नहीं मिल रहा है। अस्पतालों में प्लाज्मा दाताओं का अकाल पड़ गया है। मरीज और तीमारदार प्लाज्मा के लिए भटक रहे हैँ, मगर उन्हें सहायता नहीं मिल रही। तीमारदार सोशल मीडिया के सहारे प्लाज्मा की गुहार कर रहे हैं।

मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा थेरेपी की सुविधा है। अब तक 725 लोगों ने प्लाज्मा दान के लिए पंजीयन कराया है, लेकिन सिर्फ 35 ने ही प्लाज्मा दान किया है। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा देने वालों का अभाव है। केवल 13 लोग ऐसे हैं, जिनमें पर्याप्त एंटीबॉडी होने के कारण उनका प्लाज्मा लिया गया। एंटीबॉडी कम होने के कारण बाकी का प्लाज्मा नहीं लिया जा सका। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ये कर सकते हैं दान
ऐसे कोरोना मरीज जो पूरी तरह ठीक हो चुके हैं और ठीक होने के बाद 28 दिन का समय पूरा कर चुके हैं, वे तीन महीने तक प्लाज्मा का दान कर सकते हैं। मेडिकल में लगातार ऐसे मरीजों की सूची बन रही है, लेकिन दानदाता आगे नहीं आ रहे।

मेडिकल अस्पताल में कोविड वार्ड प्रभारी डॉ. सुधीर राठी के अनुसार अब तक 725 ने प्लाज्मा दान को पंजीयन कराया कुल 13 ने प्लाज्मा दिया है। अब अस्पताल के पास सिर्फ पांच यूनिट प्लाज्मा है, शेष इस्तेमाल हो चुका है। 

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Plasma Therapy for Covid 19 treatment - फोटो : Social Media
यह है प्लाज्मा थेरेपी
प्लाज्मा थेरेपी को मेडिकल साइंस में प्लास्माफेरेसिस कहते हैं। यह ऐसी प्रक्रिया है जो खून के तरल पदार्थ, प्लाज्मा को रक्त कोशिकाओं से अलग करती है। इसके बाद अगर किसी व्यक्ति के प्लाज्मा में अस्वस्थ टिशू मिलते हैं तो उसका इलाज समय रहते शुरू किया जाता है। 
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विलाप करती महिला - फोटो : amar ujala
हार्ट अटैक पड़ने के तीन दिन बाद मिला इलाज
महामारी के इस दौर में प्राइवेट कोविड अस्पताल अब कोविड से अलग मरीजों का उपचार नहीं कर रहे हैं। वहीं, अन्य प्राइवेट अस्पतालों ने बिना कोविड रिपोर्ट के लोगों को भर्ती करना बंद कर दिया। इसके चलते मरीजों का बुरा हाल है।

सूरजकुंड श्मशान में सोमवार को ब्रह्मपुरी निवासी महेश चंद्र जैन के परिजन उनके अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे। मौसा दिनेश जैन ने बताया कि मृतक के बेटे को चार दिन पूर्व हार्ट अटैक पड़ गया। उसका टेस्ट कराया गया। तीन दिन बाद रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती किया। सदमे में महेश चंद्र जैन की भी तबीयत बिगड़ गई। रविवार को मौत हो गई।
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meerut hospital - फोटो : amar ujala
कर्मचारी के परिजनों को भी नहीं मिला इलाज, हंगामा
मेडिकल कॉलेज कर्मचारी एसोसिएशन ने सोमवार को प्राचार्य से मुलाकात की और हंगामा किया। कहा कि मेडिकल में कर्मचारी और स्टाफ नर्स जो कोविड-19 का इलाज कर रहे हैं। उनके परिवार को कोई सुविधा नहीं दी जा रही है। 

स्टाफ नर्स के परिवार परिवार का सदस्य भर्ती था। उनके बार-बार अनुरोध करने पर भी ना तो वेंटिलेटर दिया गया और न ही रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाया गया। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि अगर सुविधा नहीं दी गई तो आंदोलन किया जाएगा। सुनीता तेवतिया, माधवी अग्रवाल, शर्ली भंडारी, बबीता गोस्वामी, एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव शर्मा मौजूद रहे।
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