कोरोना ने जिंदगी के नियम, कायदे और मायनों को बदल दिया है। यहां तक की अंतिम संस्कार की रस्म भी। रविंद्रपुरी निवासी सब्जी विक्रेता की पत्नी, भाइयों और परिवारीजनों से इस महामारी ने अंतिम विदाई का हक भी छीन लिया। चंद लोगों को छोड़कर किसी को भी शवदाह गृह में आने की अनुमति नहीं थी।