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कोरोना का कहर: अंतिम विदाई का हक भी छीन रही ये महामारी, भावुक कर देंगी तस्वीरें

Fri, 08 May 2020 12:53 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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शवदाह गृह में शव ले जाते चंद लोग। - फोटो : अमर उजाला
कोरोना ने जिंदगी के नियम, कायदे और मायनों को बदल दिया है। यहां तक की अंतिम संस्कार की रस्म भी। रविंद्रपुरी निवासी सब्जी विक्रेता की पत्नी, भाइयों और परिवारीजनों से इस महामारी ने अंतिम विदाई का हक भी छीन लिया। चंद लोगों को छोड़कर किसी को भी शवदाह गृह में आने की अनुमति नहीं थी।
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coronavirus - फोटो : amar ujala
मेडिकल कॉलेज से एंबुलेंस में राजेश का शव सूरजकुंड स्थित शव दाह गृह पहुंचा। पुत्र और तीन रिश्तेदार वहां मौजूद थे। एंबुलेंस से उतारकर शव को पुरोहितों के आदेश पर पटरे पर रखा गया। चिता सजाई जा रही थी, तभी व्यापारी का 14 साल का किशोर पुत्र फफक-फफक कर रोने लगा। रिश्तेदारों ने संभाला और अंतिम संस्कार की क्रियाएं पूरी कराई।
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अंतिम संस्कार में शामिल हुए चंद लोग - फोटो : अमर उजाला
बेटा बोला-पापा ने कहा था गले में दर्द है
राजेश के दो बेटियां और एक बेटा है। बेटा सबसे छोटा है। सूरजकुंड पर उसने बताया कि दो दिन पहले पापा ने बताया था कि गले में दर्द है। इसके बाद ही उन्हें मेडिकल कॉलेज ले जाया गया था।
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अंतिम संस्कार की तैयारी करते चंद लोग - फोटो : अमर उजाला
फल और सब्जी का कारोबार
राकेश के पांच भाई सदर और नवीन मंडी में सब्जी का कारोबार करते हैं। एक भाई दिल्ली में परिवार के साथ रहता है। रिश्तेदारों के घर भी सदर में ही आसपास हैं। ज्यादातर लोग फल व सब्जी के कारोबार से जुड़े हैं।

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