पुलिस कांस्टेबलों के 41610 पदों पर भर्ती के मामले में संशोधित परिणाम जारी होने के बाद रिक्त हुए पदों पर फिलहाल पुलिस भर्ती बोर्ड नियुक्तियां नहीं करेगा। बोर्ड ने हाईकोर्ट में इस आशय का हलफनामा दाखिल किया है। कोर्ट ने रिक्त पदों पर भर्ती के बाबत भर्ती बोर्ड से कई सवाल किए हैं। पूछा है कि आज की तारीख में कुछ कितने पद रिक्त हैं, जिन पर नियुक्तियां होनी हैं।
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इन पदों को भरने के लिए बोर्ड क्या प्रक्रिया अपनाएगा। आरक्षित कोटे के तहत जिन पदों पर गलत नियुक्तियां हो गई थीं, क्या उन पदों को भी इन रिक्त पदों के साथ जोड़ा जा रहा है। अवैध रूप से नियुक्त हुए अभ्यर्थियों को हटाने के बाद रिक्त हुए पदों पर नियुक्तियां की गई हैं अथवा नहीं। कोर्ट ने पुलिस भर्ती बोर्ड के सचिव को इन सवालों पर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर जवाब देने के लिए कहा है।
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- फोटो : अमर उजाला
इस बीच भर्ती बोर्ड की ओर से हलफनामा दाखिल कर बताया गया कि वह फिलहाल रिक्त पदों पर नियुक्तियां नहीं करेगा। प्रमोद कुमार सिंह और अन्य की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र सुनवाई कर रहे हैं। याचिका पर अधिवक्ता सीमांत सिंह ने पक्ष रखा। पुलिस भर्ती 2013 में गलत तरीके से क्षैतिज आरक्षण लागू करते हुए आरक्षित वर्ग की महिलाओं को सामान्य की सीटों पर नियुक्ति दे दी गईं।
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- फोटो : अमर उजाला
हाईकोर्ट ने इसे सुधार कर संशोधित परिणाम जारी करने का आदेश दिया। संशोधित परिणाम आरक्षित वर्ग की महिलाओं को उनके वर्ग में भेज दिया गया, जिससे उनके वर्ग के कुछ अभ्यर्थी चयन से बाहर हो गए। अब सामान्य वर्ग के रिक्त हुए पदों पर नियुक्ति के लिए भर्ती बोर्ड ने 10 अप्रैल 2018 को विज्ञाप्ति निकाली जिसमें कट ऑफ मेरिट में आने वाले सभी अभ्यर्थियों को बुलाया गया। 13 अगस्त 2018 को बोर्ड ने विज्ञप्ति बदल कर सिर्फ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले अभ्यर्थियों को ही मौका देने का निर्णय लिया।
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इसके खिलाफ फिर मामला कोर्ट में चला गया। हाईकोर्ट ने सभी पात्र अभ्यर्थियों को बुलाने का निर्देश दिया। इसके बाद बोर्ड ने विज्ञप्ति संशोधित कर सभी अभ्यर्थियों को बुला लिया। प्रमोद सिंह और अन्य की याचिका में कहा गया कि क्षैतिज आरक्षण में संशोधन के बाद रिक्त हुए पदों पर सिर्फ सामान्य पुरुष अभ्यर्थियों का ही चयन हो सकता है जबकि बोर्ड ने ओबीसी और एससीएसटी वर्ग को भी बुला लिया है।
खुद बोर्ड ने हलफनामा दाखिल कर कहा है कि रिक्त पदों पर सामान्य अभ्यर्थियों का ही चयन होगा। इसके अलावा आरक्षित वर्ग में महिला अभ्यर्थियों को समायोजित करने से जो अभ्यर्थी चयन से बाहर हुए हैं, उनको निकाला नहीं गया बल्कि वह अभी भी नौकरी कर रहे हैं। याचिका पर तीन अक्तूबर को अगली सुनवाई होगी।