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गर्मी का कहर लगातार: दौर बदला..., लेकिन मटके और सुराही की ठंडक आज भी बरकरार

Thu, 27 Jun 2019 04:21 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मटके व सुराही - फोटो : अमर उजाला
हम कितने भी आधुनिक हो जाएं, लेकिन पारंपरिक चीजों का अपना अलग महत्व है। वजह इनका उपयोग हमारे स्वास्थ्य लाभ से जुड़ा हुआ है। गर्मी के सीजन में हम फ्रिज में ठंडे किए गए कितने भी शीतल पेय पी लें, लेकिन मटके के ठंडे पानी जितनी संतुष्टि कोई नहीं दे सकता है। समय के साथ इसके निर्माताओं ने इसके रंग, आकार और डिजायन में सुविधाजनक बदलाव भी किए हैं। 

देसी फ्रिज यानि मटके में रखा पानी शीतल होने के साथ स्वास्थ्य के लिए लाभदायक भी होता है। आज लोग ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों का प्रयोग कर रहे हैं। वे स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हैं। इसी के चलते लोगों में मटके और सुराही का प्रयोग बढ़ा है। 
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मटके व सुराही - फोटो : अमर उजाला
घर के एक कोने में रखा मिट्टी का घड़ा या सुराही स्टेटस सिंबल के तौर पर भी देखा जाने लगा है। ऐसे में मटके बनाने वाले कारीगर इन्हें खूबसूरत और फैशनबल बना रहे हैं।

साधारण मटकों के साथ अब अलग स्टाइल और डिजाइन वाले घड़े व सुराही भी बाजार में उपलब्ध हैं। टोंटी वाले और कैंफर जैसे आकार वाले घड़े भी बाजार में हैं। खास बात यह है कि कलरफुल और पेंटिंग वाले मटके भी आप ऑर्डर देकर बनवा सकते हैं। इसके लिए आपको साढ़े तीन सौ से पांच सौ रुपये खर्च करने होंगे।
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मटके व सुराही - फोटो : अमर उजाला
ये हैं कीमत
साधारण मटका -100 से 120 रुपये
टोंटी वाला मटका -150 रुपये तक
डिजाइनर मटका -250 से 400 रुपये
पेंटिंग वाला मटका- 350 से 500 रुपये
सुराही - 150 से 450 तक
 

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मटके व सुराही - फोटो : अमर उजाला
फायदेमंद है मटके का पानी
मिट्टी में क्षारीय गुण मौजूद होते हैं। मिट्टी के घड़े में पानी रखने से वह क्षारीय अम्लता के साथ प्रभावित होकर उचित पीएच प्रदान करता है। यह पानी सेहत के लिए फायदेमंद है। इसे पीने से एसिडिटी और पेट दर्द में राहत मिलती है। मटके का पानी पीने से कब्ज, एसिडिटी और गला खराब होने जैसी समस्याएं नहीं होतीं।

 
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मटके व सुराही - फोटो : अमर उजाला
इन बातों का रखें ध्यान
-मटके से पानी निकालने के लिए साफ बर्तन का उपयोग करें।
-घड़े को पानी भरने के बाद नमी वाले और ऊंचाई वाले स्थान पर रखें।
-पानी शीतल रहे इसके लिए घड़े के ऊपर जूट या सूती कपड़ा लपेट दें।
-घड़े को हमेशा ढककर रखें।
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मटके व सुराही - फोटो : अमर उजाला
मिट्टी के लिए करनी पड़ती है मशक्कत
कारीगर बीर सिंह बताते हैं कि घड़े बनाने के लिए चिकनी मिट्टी प्रयोग होती है। इस मिट्टी से बना घड़ा पानी को ज्यादा ठंडा करता है। तालाबों की घटती संख्या के कारण मिट्टी नहीं मिल पाती है।

गर्मी में मिट्टी की किल्लत के चलते कारीगर सर्दी के मौसम में घड़े व सुराही बनाकर स्टाक कर लेते हैं। विक्रेता नीरज बताते हैं कि पिछले चार साल में इस उद्योग में 90 फीसदी उछाल आया है। आज संभ्रांत परिवारों के लोग भी इसका प्रयोग कर रहे हैं। 
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