सीबीआई ने छापेमारी की
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अजय की मानें तो केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) ऑडिट अधीक्षक विकास कुमार चौधरी 22 अगस्त से उन पर रिश्वत देने का दबाव बना रहा था। 28 अगस्त को उसने दफ्तर बुलाया था और कहा कि चार साल का ऑडिट है, दो लाख रुपये हर साल के हिसाब से देने होंगे। 31 अगस्त को ऑडिट होगा। तुम्हारे जो कागज हैं वह सब फर्जी हैं। ठेकेदार ने मान मनौव्वल की, मगर बात नहीं बनी। 31 को अजय सीजीएसटी दफ्तर नहीं आया। अधीक्षक ने उसे फोन किए। आठ सितंबर को पांच लाख रुपये पर बात तय हुई।