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पॉलिथीन से बनाईं इंटरलॉकिंग टाइल्स, इंजीनियर्स के कमाल से कूड़े पर खिलेंगे फूल

Sat, 27 Oct 2018 02:52 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ न्यूज - फोटो : meerut news
पर्यावरण के लिए सबसे बड़ी दुश्मन पॉलिथीन का मेरठ कैंट बोर्ड के इंजीनियर्स ने तोड़ निकाल लिया है। पॉलिथीन और ईंट-पत्थर के कूड़े से उन्होंने टाइल्स बनाने का काम शुरू कर दिया। ये टाइल्स आमतौर पर बनने वाली टाइल्स से कम नहीं हैं। कैंट बोर्ड इन टाइल्स की लैब में टेस्टिंग भी करा रहा है। दूसरी तरफ पॉलिथीन के पहाड़ को इंजीनियर्स ने मिट्टी से ढककर ऐसा रूप दे दिया है कि कुछ दिनों तब वहां सुंदर फूल खिले नजर आएंगे। एसजीएम गार्र्डन के सामने कूड़े की जगह को मॉडल बनाया जा रहा है।  
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meerut news - फोटो : अमर उजाला
देश ही नहीं दुनियाभर में पॉलिथीन बड़ी समस्या बनती जा रही है। सालों तक इसके नष्ट न होने से पर्यावरण दूषित हो रहा है। मेरठ शहर का भी कोई कोना ऐसा नहीं बचा है जहां पर पॉलिथीन के अंबार न लगा हो, लेकिन देश को सबसे स्वच्छ कैंट बनाने की कवायद में जुटे मेरठ कैंट बोर्ड के इंजीनियर्स ने नया इनोवेशन किया है। सीईओ प्रसाद चव्हाण ने बताया कि कैंट बोर्ड के एई पीयूष गौतम ने टीम के साथ पॉलिथीन वेस्ट से टाइल्स के सैंपल तैयार किए हैं। इनमें रंगीन टाइल्स भी शामिल हैं। इनको पॉलिथीन और घर से निकलने वाले ईंट-पत्थर के वेस्ट के साथ स्टोन डस्ट मिक्स करके बनाया गया है। एक टाइल्स में 150 से 200 प्लास्टिक के बैग इस्तेमाल में आ जाते हैं। प्लास्टिक को 85 डिग्री तक गर्म करके स्टोन डस्ट में मिक्स करके टाइल्स के सांचे में डाला जाता है।
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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
इनमें कलर डालकर रंगीन भी बनाया जा रहा है। बिना सीमेंट के बनी ये इंटरलॉकिंग टाइल्स बनाने में खर्चा भी ज्यादा नहीं होगा। सीईओ ने बताया कि दूसरा काम कैंट में कूड़े वाले ढेर की जगह को मॉडल बनाकर किया जा रहा है। सीईई अनुज सिंह ने टीम के साथ ऐसी जगहें चिह्नित की हैं। सबसे पहले एसजीएम गार्डन के सामने पड़े प्लास्टिक के ढेर को मिट्टी से पूरी तरह से ढक दिया गया है। इसके चारों तरफ जाली लगा दी गई है। अब यहां पर पौधे लगाएं जाएंगे।

पुराने पाइप से बना दिया था डिवाइडर 

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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
सप्लाई डिपो चौराहे से डेयरी फार्म मवाना रोड तक रोड पर आए दिन एक्सीडेंट होते थे। वजह थी कि यहां पर डिवाइडर नहीं था। डिवाइडर बनाने के लिए मोटी रकम चाहिए थी लेकिन कैंट बोर्ड ने फ्री में ही डिवाइडर बना दिया। सीईई अनुज सिंह ने पुराने पड़े अंग्रेजी जमाने के पाइपों को कटवाकर उन्हें जगह-जगह रखवाकर उनमें सुंदर पौधे लगा दिए, जिसके बाद से वहां पर अब शानदार डिवाइडर बन गया है।
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नगर निगम ले सबक

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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
जिस तरह से पॉलिथीन के कूड़े को मिट्टी से डंप करके कैंट बोर्ड पौधे लगा रहा है, उससे नगर निगम सबक क्यों नहीं ले रहा। मंगतपुरम में कूड़े के ढेर को आखिर मॉडल क्यों नहीं बनाया जा सकता है। अगर पहल की जाए तो मंगतपुरम भी एक ऐसे ही स्पॉट के रूप में विकसित किया जा सकता है।

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