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जिंदगीभर का दर्द... मेरठ बवाल में मुल्जिम बन गए कई परिवार, पांच ने गंवाई थी जान, तस्वीरें

Tue, 24 Dec 2019 03:21 AM IST
कपिल kapil गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ में हुआ था भारी बवाल - फोटो : अमर उजाला
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुआ बवाल कई परिवारों को जिंदगीभर का दर्द दे गया। पांच युवाओं ने जान गवां दी। कई परिवार ‘मुल्जिम’ बन गए। पुलिस और पब्लिक के बीच विश्वास का धागा भी टूटने की कगार पर है। अब इस विश्वास को मजबूत करने के लिए पुलिस व प्रशासन को काफी मशक्कत करनी होगी।
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पथराव करते उपद्रवी - फोटो : अमर उजाला
पुलिस के प्रति इतना गुस्सा क्यों था, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। चार घंटे बवाल हुआ, जिसमें पुलिस को गोलियां चलानी पड़ी। पांच लोगों की जान चलीं गई। मरने वाले आसिफ, मोहसिन, जहीर, आसिफ और अलीम को पुलिस ने उपद्रवी घोषित कर दिया। उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। परिवार पर दोहरी मार पड़ी। बेटे की मौत भी हुई। उसके माथे पर उपद्रवी का ठप्पा भी लग गया।
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जमकर हुआ था पथराव किया - फोटो : अमर उजाला
वहीं बवाल में परिवार के नाम भी आ रहे हैं। पुलिस व प्रशासन के रिकॉर्ड में हाशिमपुरा, मलियाना, शास्त्रीनगर एल ब्लाक हिंसा और अब इस बवाल को भी दर्ज कर लिया गया। यह ऐसा दाग है जो शायद ही मिटे।

कैसे होगा विश्वास कायम 

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जमकर हुआ था पथराव - फोटो : अमर उजाला
पुलिस और पब्लिक में कैसे समन्वय स्थापित होगा, इसको लेकर मंथन चल रहा है। पब्लिक पुलिस पर और पुलिस पब्लिक पर गोलियां चला रही थी। बवाल के दौरान दोनों एक दूसरे के दुश्मन थे। कभी ऐसा दौर था कि एक सिपाही ही आवाज देता था तो सब चुपचाप अपने घर वापस चले जाते थे। शुक्रवार को पुलिस टीम पर हमला बोला गया।
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अब नजरिया भी बदल गया 

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पथराव करते उपद्रवी - फोटो : अमर उजाला
लिसाड़ीगेट में पांच हजार से अधिक लोगों के खिलाफ उपद्रव में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस लिसाड़ीगेट के लोगों को मुल्जिम की नजर से देख रही है। पुलिस के जिन लोगों से अच्छे संबंध थे या शांति व्यवस्था बनाने की मीटिंग में जो भी लोग आते थे, उनमें भी विश्वास टूट रहा है। सोमवार को पुलिस ने कई लोगों को बुलाकर वीडियो और फोटो दिखाए। उपद्रवियों की पहचान कराई। जिसमें कोई परिचित या रिश्तेदार के नाम बताए जा रहे।
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अपना नाम बताने में डरने लगे

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आंसू गैस गोले फैंके - फोटो : अमर उजाला
बवाल में मारे गए आसिफ, मोहसिन और जहीर के परिजन कहते हैं कि अब यहां रहना भी ठीक नहीं है। वह जल्द ही घर बेचकर दूसरी जगह चले जाएंगे। अलीम के परिजनों का कहना है कि समाज में इतनी बदनामी हो गई कि अपना नाम बताने से भी डर लगने लगा है। पुलिस ने इतने अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमे लिखे हैं, उनको डर है कि कहीं उनके दूसरे बच्चों के नाम उपद्रव में न खुल जाए।
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बेकसूर न डरें

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पुलिस चौकी में लगा दी थी आग - फोटो : अमर उजाला
पुलिस और पब्लिक के बीच विश्वास कायम करने का प्रयास किया जाएगा। कानून व्यवस्था बनाने की अपील लोगों से की जा रही है। जो उपद्रवी हैं, उन्हीं को जेल भेजा जाएगा। बेकसूर लोग न डरें, पुलिस कोई गलत कार्रवाई नहीं करेगी। - अजय साहनी, एसएसपी 

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