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बुलंदशहर बवाल: नहीं सुना होगा फौजी के 'साहस' का ये किस्सा, STF अफसर भी साध गए थे चुप्पी

Tue, 11 Dec 2018 07:18 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
बुलंदशहर बवाल में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की हत्या के मामले में आरोपी फौजी जितेंद्र उर्फ जीतू को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वहीं एसएसपी एसटीएफ अभिषेक सिंह का कहना है कि अभी तक हमारे पास ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे फौजी को हत्यारोपी साबित किया जा सके। उधर, फौजी जीतू भी अपने आपको निर्दोष बता रहा हैं। ऐसे में हम आपको फौजी जीतू के 'साहस' का ऐसा किस्सा बताने जा रहे हैं, जिसे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। अगली स्लाइड में जानिए:-
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
पूछताछ के दौरान फौजी जितेंद्र उर्फ जीतू के साहस के किस्से सुनकर एसआईटी और एसटीएफ के अफसर भी एक बार को चुप्पी साध गए। सेना के उच्च अधिकारियों ने जितेंद्र को कमंडेशन डिस्क मेडल से सम्मानित किया था।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
महाव गांव निवासी जितेंद्र कुमार उर्फ जीतू साल 2013 में सेना में भर्ती हुआ। पहली पोस्टिंग रुड़की में हुई। उसके बाद तैनाती लद्दाख में मिली। यहां के बाद जोधपुर में तैनाती हुई। पिछले पौने दो साल से जम्मू के सोपोर में सेना की 22 आरआर कंपनी में तैनाती हुई।

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
वहीं पूछताछ में सामने आया कि 18 नवंबर को ही वह छुट्टी आया था। पहले नौ दिन की छुट्टी थी। लेकिन सात दिन की अतिरिक्त छुट्टी करा ली थी। यह भी बताया गया कि चार दिसंबर को जम्मू में वापसी के लिए रिपोर्टिंग होनी थी। चार को ही वापसी की।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
एक अधिकारी ने बताया कि पूछताछ और जांच में यह पता चला कि फौजी जितेंद्र 26 ऑपरेशनों में शामिल रहा है। फौजी ने भी यही बताया कि वह आखिर गोली क्यों मारता।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
एसटीएफ की पूछताछ में आरोपी फौजी जीतू ने बताया कि वह 16 दिनों की छुट्टी पर अपने गांव महाव आया था। जिस दिन बवाल हुआ उस दिन उसकी छुट्टी का 14वां दिन था। बवाल में इंस्पेक्टर समेत दो लोगों की मौत की खबर सुनते ही फौजी जीतू अगले दिन ही छुट्टी में ही जम्मू रवाना हो गया।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
बताया गया कि उसकी एक छुट्टी अभी बची हुई थी। इंस्पेक्टर की हत्या के मामले में जीतू को नामजद किया गया, इसकी जानकारी जीतू को लग गई थी। इससे पहले पुलिस उसको गिरफ्तार करती, वह अपनी छुट्टी रद्द कराकर जम्मू अपनी यूनिट में चला गया। बड़ा सवाल है कि अगर फौजी को ऐसा लग रहा था कि उसने बवाल में कोई गलती नहीं की या फिर किसी विवाद में वह शामिल नहीं था तो बीच में ही क्यों गया।

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