Meerut News: मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को सौरभ की हत्या में 14 अक्तूबर को फांसी की सजा दी गई थी। बचाव पक्ष ने चाकू, ड्रम, सीमेंट और दवाएं बेचने वाले दुकानदारों की गवाही पर सवाल उठाए थे। मंगलवार को फांसी की सजा के खिलाफ अपील पर सुनवाई होगी।
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सौरभ का फाइल फोटो व मुस्कान और साहिल
- फोटो : अमर उजाला
नीले ड्रम वाले सौरभ राजपूत हत्याकांड में फांसी की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला की याचिका पर मंगलवार को पहली सुनवाई होगी। मेरठ की अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने पुलिस की विवेचना से लेकर गवाहों के बयानों तक पर सवाल उठाए थे।
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मुस्कान
- फोटो : अमर उजाला
चाकू, उस्तरा, नीला ड्रम, सीमेंट और दवाएं बेचने वाले दुकानदारों की गवाही को चुनौती दी गई थी। साथ ही घटनास्थल से फिंगरप्रिंट नहीं लेने, डीएनए जांच नहीं कराने और मोबाइल से पर्याप्त साक्ष्य नहीं जुटाने जैसी करीब 15 कमियां गिनाई गई थीं।
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सौरभ हत्याकांड, मुस्कान
- फोटो : अमर उजाला
ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र में सौरभ राजपूत की उसकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी व प्रेमी साहिल शुक्ला ने आठ मार्च 2025 को निर्मम हत्या कर दी थी। हत्या करने के बाद दोनों ने मिलकर शव को नीले ड्रम में भरकर ऊपर से सीमेंट डाल दिया था। इसके बाद दोनों दोषी कसौल घूमने के लिए चले गए थे। 18 मार्च को वापस आने पर सौरभ के परिजनों ने मुस्कान से बेटे के बारे में जानकारी की थी। परिजनों ने अनहोनी की आशंका के चलते पुलिस में शिकायत की थी।
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मुस्कान और सौरभ।
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस की सख्ती के बाद मुस्कान ने हत्या करने की बात बताई थी। पुलिस ने दोषी साहिल को भी गिरफ्तार कर लिया था। खुलासे के बाद से ही दोनों जेल में बंद हैं। एक अक्तूबर को जिला जज ने दोनों को दोषी माना था। 14 अक्तूबर को जिला जज ने दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी।
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मुस्कान रस्तोगी।
- फोटो : अमर उजाला
फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद दोनों ने हाईकोर्ट में सजा के खिलाफ अपील दायर की थी। मंगलवार को दोनों की अपील पर सुनवाई होगी। सौरभ की मां रेनू देवी व भाई राहुल ने बताया कि वह दोनों को फांसी पर लटकता हुआ देखा चाहते हैं। दोषियों के खिलाफ मजबूती से पैरवी करेंगे।
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मुस्कान की फाइल फोटो।
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दुकानदारों की गवाही पर उठाए थे सवाल
मुकदमे में अभियोजन पक्ष ने चाकू, उस्तरा, ड्रम, सीमेंट और दवाएं बेचने वाले दुकानदारों को गवाह बनाया था। बचाव पक्ष ने उनकी गवाही पर सवाल उठाते हुए कहा था कि खरीद के बिल और रसीदें पेश नहीं की गईं।
दुकानों की सीसीटीवी फुटेज भी नहीं थी और न ही स्वतंत्र गवाहों से खरीद की पुष्टि कराई गई। गवाहों के बयान दर्ज करने में हुई देरी और आरोपियों की पहचान को लेकर भी आपत्ति जताई गई थी। बचाव पक्ष ने गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए थे।