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Blast In Factory: चलती रही मौत की फैक्टरी, आठ घंटे तक अफसर छिपाते रहे पटाखों की बात, लाशों का जिम्मेदार कौन..?

Wed, 18 Oct 2023 10:55 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ में विस्फोट - फोटो : Amar Ujala
मेरठ के लोहियानगर में रिहायशी इलाके में मंगलवार सुबह 7:16 बजे पटाखा फैक्टरी में पहले धमाके के बाद जगह-जगह खून बिखरा था। लाशें इधर-उधर पड़ी हुईं थी...हर कोई यही पूछ रहा था कि इन लाशों का जिम्मेदार कौन है? घायल सिसक-सिसक कर सवाल कर रहे थे कि रिहायशी इलाके में रहना उनका कसूर है क्या? तब तक मौके पर अधिकारी पहुंचे। रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ। इसी बीच 8:48 बजे दूसरा विस्फोट हो गया। इसमें दो फायरकर्मी भी घायल हो गए। दो जेसीबी के शीशे टूट गए। जेसीबी का चालक घायल हो गया। हादसे की भयावहता पर लोगों का यही कहना था कि आखिर मौत की इस फैक्टरी पर किसी ने ध्यान देने की जरूरत क्यों नहीं समझी। क्यों उनको बिना कारण ये दर्द झेलना पड़ रहा है।
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मेरठ में हादसा - फोटो : Amar Ujala
लोहियानगर के सी पाॅकेट के रिहायशी इलाके में लोगों ने ये सोचकर घर बनाए थे कि चैन से रहेंगे। लेकिन लालची लोग यहां भी मौत की फैक्टरी शुरू कर देंगे ये उन्होंने सोचा भी नहीं था। लोगों को बस इतना पता था कि यहां पर साबुन का छोटा काम होता है। धमाके के बाद पूरे इलाके में हर कोई स्तब्ध था। पटाखा फैक्टरी का नाम आते ही लोग सहम गए। बड़ी संख्या में घर के बाहर खड़ी महिलाएं बस इतना ही कह रहीं थी कि जरा सा घर में काम कर लो तो एमडीए का कर्मचारी पैसे मांगने आ जाता है।
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मेरठ में विस्फोट - फोटो : Amar Ujala
इतने दिनों से यहां पर ये अवैध पटाखा फैक्टरी चल रही थी लेकिन इसे किसी ने नहीं देखा। मजदूरों के क्षत-विक्षत शव देखकर हर कोई यही बोल रहा था कि बेचारे बिहार से हजारों किलोमीटर दूर परिवार का गुजर-बसर करने के लिए लिए मेरठ आए थे। दिन-रात मेहनत कर रहे थे। लेकिन उन्हें क्या पता था कि पैसों के लालच में मौत की फैक्टरी चलाने वाले उनकी जान लील लेंगे। इन बेचारों का क्या कसूर था। घायलों के परिजन अपनों को देखकर माथा पकड़े बैठे थे। वे व्यवस्था को कोसने के अलावा कुछ नहीं कर सकते थे। बोल रहे थे कि छोटा सा निर्माण कर लो तो वह अवैध हो जाता है और यहां पटाखा फैक्टरी चल रही थी किसी ने क्यों नहीं देखा। 

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मेरठ में विस्फोट - फोटो : Amar Ujala
एटीएस की टीम ने भी की पटाखों की पुष्टि 
धमाके के बाद नोएडा से एटीएस के सीओ अनुज कुमार और संब इंस्टेक्टर राजीव त्यागी के साथ टीम ने मौके पर पहुंचकर मलबे में जांच पड़ताल की। उन्होंने बारुद देखकर पुलिस अधिकारियों से चर्चा की कि हापुड़ के धौलाना में हुए धमाके में भी ऐसा ही विस्फोटक बरामद हुआ था। 
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मेरठ में विस्फोट - फोटो : Amar Ujala
स्काई बम और टॉय गन मिसाइल ने खोली पोल
पटाखा फैक्टरी में विस्फोट सुबह सवा सात बजे हुआ। मौके पर पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों का अमला पहुंच गए। सारे आला अधिकारियों ने निरीक्षण कर लिया। इसके बाद जब उनसे जानकारी ली गई तो बताया गया कि यहां पर कोई पटाखा फैक्टरी नहीं है। यहां तक कि मौके पर मिले चाइनीज टॉय गन की मिसाइल के भारी मात्रा में पैकेट को भी उन्होंने पटाखा होने से साफ इनकार कर दिया।
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मौके पर मौजूद लोग - फोटो : Amar Ujala
उसके बारे में बताया गया कि यह साबुन बनाने में इस्तेमाल किया जाता है, पटाखा नहीं है, जबकि इन्हीं मिसाइल और स्काई बम के रियेक्शन से इतना भीषण विस्फोट हुआ कि दो मंजिला बिल्डिंग पूरी तरह से उड़ गई। शाम साढ़े तीन बजे तक पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पटाखों में विस्फोट से इंकार करते रहे। एनडीआरएफ और फायर ब्रिगेड की टीम ने रेस्क्यू के दौरान जब धुंआ उठता देखा तो उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि यहां पर बारूद है, इसी के कारण धमाका हुआ। शाम को भारी मात्रा में स्काई बम भी बरामद हो गए। 
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अखिलेश यादव ने ट्वीट की अमर उजाला की खबर - फोटो : Amar Ujala
लोहियानगर में विस्फोट में हुई इन मौंतों पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने एक्स पूर्व ट्विटर पर पोस्ट करते हुए जांच की मांग की है। उन्होंने अमर उजाला मे माई सिटी के पहले पेज पर प्रकाशित खबर को भी शेयर किया है।

अखिलेश यादव ने लिखा कि मेरठ में रिहायशी इलाकों में जानलेवा बारूद के खतरनाग कारखानों को नाजायज तरीके से चलते रहने दिया गया व बिजली के कनेक्शन भी दिये गये और प्रशासन आंखें मूंदे रहा, क्या सिर्फ इसलिए कि ये कारखाने सत्ताधारी भाजपा के लोगों के थे। 

ये हादसे में हुई मौतें नहीं हैं बल्कि शासनिक-प्रशासनिक हत्याओं के समान हैं। इसकी तत्काल न्यायिक जांच और दंडात्मक कार्रवाई हो।
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