उत्तर प्रदेश के मेरठ में नगर निगम की नवनिर्वाचित पहली बोर्ड बैठक में जमकर बवाल हुआ। बसपा और भाजपा पार्षद आपस में भिड़ गए। इस दौरान पार्षदों के बीच जमकर लात-घूसे चले। वहीं भाजपाइयों ने वंदेमातरम, भारत माता की जय के नारे लगाए तो बसपा पार्षदों ने जय भीम के नारे लगाए। जबकि कुछ मुस्लिम पार्षदों ने अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाए। पाषर्द हंगामा करते समय सदन की गरिमा भी भूल गए। यानी कुर्सियां छोड़ मेज पर चढ़कर हंगामा करने लगे।
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निगम की बोर्ड बैठक में भाजपा-बसपा पार्षदों में चले लात-घूसे
- फोटो : अमर उजाला
सदन में जहां राष्ट्र गीत पर राजनीति हुई। वहीं राष्ट्रगान का भी खूब अपमान किया गया। महापौर की मेज से भाजपाइयों ने माइक भी नीचे गिरा दिया। बसपा की महापौर के सामने भाजपाईयों की एक नहीं चली। महापौर ने भाजपा के पार्षदों को अपना कोई प्रस्ताव रखने का मौका ही नहीं दिया। जबकि बसपा की एक महिला पार्षद ने छह प्रस्ताव बोर्ड में रखे। हालांकि महापौर खेमे के अलावा किसी ने भी प्रस्तावों को सहमति नहीं दी। आनन फानन में राष्ट्रगान के बाद बोर्ड बैठक समाप्त कर दी गई। यानी पहली ही बोर्ड बैठक में शहर के विकास पर चर्चा होने की बजाय, राजनीति की भेंट चढ़कर रह गई। पहली ही बोर्ड बैठक में हंगामे की नींव रख दी गई।
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निगम की बोर्ड बैठक में भाजपा-बसपा पार्षदों में चले लात-घूसे
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टाउन हॉल के तिलक भवन में महापौर सुनीता वर्मा की अध्यक्षता और नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान के संचालन में परिचय बैठक की शुरूआत हुई। महापौर ने वंदेमातरम का कोई विरोध नहीं किया। लेकिन साउंड सिस्टम पर वंदेमातरम की धुन नहीं बल्कि फिल्मी गीतों की धुन बजने पर भाजपाइयों ने हंगामा कर दिया। साउंड सिस्टम पर वंदेमातरम की शुरूआत होने से पहले ही मुस्लिम पार्षद मौहम्मद कासिम, दिलशाद, हाजी सईद, गफ्फार, इरफान आदि सहित सभी पार्षद सदन से बाहर चले गए। जैसे ही भाजपाइयों ने साउंड सिस्टम पर वंदेमातरम का विरोध किया तो मुस्लिम पार्षद सदन में पहुंच गए और जय भीम, अल्लाह-हू-अकबर बोलने लगे। उधर से भाजपाइयों ने भारत माता की जय के नारे लगाए।
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निगम की बोर्ड बैठक में भाजपा-बसपा पार्षदों में चले लात-घूसे
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इस दौरान बसपा और भाजपा के सभी पार्षद आमने सामने आ गए। दोनों पक्षों में जमकर धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू हो गई। सदन में गालियों की भी बौछार हुई। महापौर को अपनी कुर्सी छोड़कर पीछे कमरे में जाना पड़ा। हंगामे की सूचना पर एसपी सिटी, सीओ और कई थानों की पुलिस ने पहुंचकर मामला संभाला। दोबारा से सदन में वंदेमातरम का गायन हुआ। बोर्ड बैठक में पार्षद विपिन जिंदल, राकेश शर्मा, नीरज ठाकुर, पूनम गुप्ता, प्रिया, अंशुल गुप्ता, संदीप रेवड़ी आदि सहित सभी पार्षद रहे।
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महापौर बोली, परिचय के दौरान कोई प्रस्ताव नहीं
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महापौर सुनीता वर्मा
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महापौर सुनीता वर्मा के निर्देश पर पार्षद और अधिकारियों का जैसे ही परिचय शुरू हुआ तो भाजपा पार्षद ललित नागदेव ने परिचय देने के साथ ही महापौर से शहर के विकास संबंधी प्रस्ताव रखने की अनुमति चाही। लेकिन महापौर ने परिचय के दौरान कोई अन्य प्रस्ताव पर चर्चा न करने की बात कहकर भाजपा पार्षद को बैठने की नसीहत दे दी। इसके उपरांत किसी भी पार्षद ने प्रस्ताव रखने की हिम्मत नहीं जुटाई।
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बसपा पार्षद को ही मिली महापौर की अनुमति
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निगम की बोर्ड बैठक में भाजपा-बसपा पार्षदों में चले लात-घूसे
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बसपा की महापौर ने अपने ही दल यानी बसपा पार्षद सविता को ही परिचय बोर्ड बैठक में जनहित के प्रस्ताव रखने की अनुमति दी। बसपा पार्षद ने नए वार्डों में स्वच्छता मित्रों की तैनाती, संख्या बढ़ाने, एलईडी लाइटों को ठीक कराने, नालों की तली झाड़ सफाई कराने, खराब पड़े हैंडपंप और सबमर्सिबल ठीक कराने, सभी विभागों की समितियां गठित करने जैसे प्रस्ताव रखे।
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सदन में हंगामे के बाद परिचय देने खड़े हुए कांग्रेसी मुस्लिम पार्षद बोले कि अगर मुझे पता होता है कि बोर्ड बैठक में शहर के विकास पर चर्चा नहीं बल्कि हंगामा होता है तो मैं कभी पार्षदी न लड़ता।
निगम की बोर्ड बैठक में सांसद राजेन्द्र अग्रवाल और मेरठ दक्षिण विधायक डा. सोमेन्द्र तोमर पहुंचे। भाजपा पार्षदों का अपमान भी दोनों जनप्रतिनिधियों के सामने हुआ। इतना ही नहीं वंदेमातरम से लेकर धार्मिक नारे लगाए गए। हालांकि दोबारा से वंदेमातरम कराने के बाद सांसद और विधायक सदन से चले गए।
हाथ में ही रह गए भाजपाइयों के प्रस्ताव
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निगम की बोर्ड बैठक में भाजपा-बसपा पार्षदों में चले लात-घूसे
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भाजपा पार्षद शहर के विकास संबंधी प्रस्ताव तैयार करके लाए थे। लेकिन महापौर की सख्ती के सामने न तो वह सदन में बोलकर अपने प्रस्ताव रख पाए और न ही पत्र के माध्यम से प्रस्तावों को महापौर की टेबिल तक पहुंचाने का प्रयास कर पाए। भाजपाइयों ने महापौर को विकास विरोधी बताकर नारेबाजी करके अपनी इज्जत बचायी।
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निगम की बोर्ड बैठक में भाजपा-बसपा पार्षदों में चले लात-घूसे
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जिसका डर था वही हुआ। टाउन हॉल में लगाई गई फोर्स और निगम प्रशासन बाहरी लोगों को सदन में रोकने में कामयाब नहीं हो सका। बाहरी लोगों ने सदन में ही जमावड़ा नहीं किया बल्कि तिलक हॉल के पीछे हॉल में खासकर बसपाइयों का कब्जा रहा। यही कारण है कि हंगामे के दौरान बाहरी लोगों ने भी पार्षदों पर हाथ साफ किए। हालांकि बाद में पुलिस ने बाहरी लोगों को सदन से खदेड़ा।
निगम की बोर्ड बैठक में भाजपा-बसपा पार्षदों में चले लात-घूसे
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बोर्ड बैठक में लगाए गए साउंड सिस्टम पर वंदेमातरम का अपमान किए जाने के मामले पर भाजपाइयों ने इसको साजिश करार किया। भाजपाइयों ने निगम के कुछ अधिकारी और बसपाइयों पर साजिश का आरोप लगाया। साथ ही सभी के खिलाफ नगरायुक्त से कार्रवाई की मांग की। नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान ने तत्काल साउंड सिस्टम संचालक को ब्लैक लिस्ट करने और समिति कक्ष प्रभारी, व्यवस्था में लगे लिपिकों से स्पष्टीकरण मांगने के लिए अपर नगरायुक्त को निर्देश दिए।
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