श्रमिक
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शाहजहांपुर के नागेश बताते हैं कि वह सोनीपत की धागा फैक्टरी में काम करता था, होली मनाकर 21 मार्च को ड्यूटी पर लौटा था। एक दिन की ड्यूटी ही कर पाया कि लॉकडाउन लग गया। जब तक जेब में रुपये रहे, जिंदगी चलती रही। नगदी खत्म हुई तो फैक्टरी मालिक के पास पहुंचे। परिवार के सात लोगों के लिए मालिक ने पांच किलो आटा और एक लीटर तेल दिया। राशन खत्म हो चुका था, बच्चे भूख से बिलख रहे थे, तो उन्होंने किसानों के गेहूं काटे। घर न होने पर सड़क पर खाना बनाकर किसी तरह रातें गुजारी, अब बहुत हुआ, वह अपने गांव अपने घर जाना चाहते हैं।