दीपावली मेले में सरस्वती समूह के स्टाॅल पर मौजूद महिलाएं। संवाद
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शामली के गांव खोडसमा निवासी शाइस्ता और समूह सखी कविता तीन साल पहले समूह से जुड़ी। 15 हजार रुपये लेकर काम की शुरुआत की। कविता बताती हैं कि उन्होंने कहीं ट्रेंनिंग नहीं लीं। घर की महिलाओं के साथ बैठकर ही धागे एवं डोरियों से गणेश जी, सजावटी आइना, लटकन, कान्हा जी के झूले, झूमर, पॉट, तितल, कुशन आदि बनाना सीखा। दिवाली पर उन्हें लगभग 20 हजार रुपये की बचत हो जाती है। उनके साथ दो और महिलाएं इसी तरह के उत्पाद अपने हाथों से तैयार करती हैं। उनके बनाए उत्पाद 200 से 600 रुपये तक के हैं।