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किन्नर महासम्मेलन का चटाई पूजन और बड़े खाने के साथ हुआ समापन, कई अनजाने रहस्यों से उठा पर्दा

Tue, 28 Jan 2020 04:46 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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सम्मेलन में आयोजित कार्यक्रम में किन्नर - फोटो : अमर उजाला
मेरठ के कंकरखेड़ा में आयोजित किन्नर महासम्मेलन का चटाई पूजन और बड़े खाने के साथ सोमवार शाम को समापन हो गया। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन हुआ। बॉलीवुड और लोकगीतों पर किन्नर जमकर थिरके।
महासम्मेलन में शाम ढलने के समय सूरज की किरणों में सोने और हीरे के आभूषण जगमगा रहे थे। नृत्य का अंदाज कुछ ऐसा था कि बॉलीवुड स्टार्स का शो भी फीका पड़ जाए। देखें झलकियां: -
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सम्मेलन में डांस करते किन्नर - फोटो : अमर उजाला
सम्मेलन में कोकिला दिल्ली, बिदामी दिल्ली, शकुंतला चावला मलियाना मेरठ, आपा अलीगढ़, राजकुमारी हापुड़, रवीना दिल्ली सहित उनकी टोली को विमला किन्नर दौराला-कंकरखेड़ा ने भेंट स्वरूप तांबे की परात, प्लेट और लड्डू दक्षिणा में दी।

सम्मेलन के समापन समारोह के दौरान किन्नरों ने जमकर नाचगाना किया और धार्मिक अनुष्ठानों को पूरा किया।
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सम्मेलन में आयोजित कार्यक्रम में किन्नर - फोटो : अमर उजाला
आयोजक किन्नर विमला ने बताया कि इस दौरान कलश यात्रा, चाक पूजन, घट स्थापना, शिव मंदिर में विशेष पूजा की गई। मायरा रस्म, चटाई रस्म, कलश रस्म के साथ किन्नरों को इनाम देकर विदा किया गया।
राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड और प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए किन्नरों ने शहर के लोगों को सुख शांति का आशीर्वाद दिया। सैनिकों के लिए विशेष प्रार्थना की।
 
 

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सम्मेलन में पहुंचे किन्नर - फोटो : अमर उजाला
कल्पित कथाओं के खुले रहस्य
सम्मेलन में किन्नरों ने बहुत सी कल्पित कथाओं के रहस्यों का खुलासा किया। समाजसेवी किन्नर रिंकी और किन्नर मोहिनी ही कहा कि थर्ड जेंडर को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं। जिसमें मृत्यु उपरांत शवों को रात में जलाना, जन्म के तुरंत किन्नर बच्चे को किन्नरों द्वारा जबरन ले जाना आदि हैं। उन्होंने ज्यादातर बातों को समाज द्वारा बुनी हुई कहानी बताया। 
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सम्मेलन में आयोजित कार्यक्रम में किन्नर - फोटो : अमर उजाला
लोगों का मानना है कि मृत्यु के बाद किन्नर के शव को जूतों से पीटते हुए खड़ाकर ले जाते हैं। किन्नर रिंकी ने बताया कि ऐसा नहीं है। किन्नर जहां रहता है, उसके आसपास के लोग भी शवयात्रा में शामिल होते हैं। किन्नर जिस धर्म को मानता है, उसी पद्धति से उसका अंतिम संस्कार होता है।
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सम्मेलन में अलग राज्यों में किन्नर - फोटो : अमर उजाला
रिंकी ने बताया कि किन्नर बच्चे को स्वयं उसके माता पिता अपने पास नहीं रखना चाहते। ऐसे में किन्नर समाज ही उसका साथ देता है। कोई भी अकेले जीवन यापन नहीं कर सकता। किन्नर समाज के साथ हम लोग स्वेच्छा से आते हैं।  समय के साथ किन्नर समाज की प्रथाओं में भी बदलाव आया है।
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सम्मेलन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल किन्नर - फोटो : अमर उजाला
धार्मिक मान्यताओं को निभाया 
इस दस दिवसीय कार्यक्रम में धार्मिक मान्यताओं को पूरी तरह निभाया गया। यहां आम लोगों को जाने की अनुमति नहीं थी।

आयोजक किन्नर विमला और मनीषा ने बताया कि उनके समाज में इस तरह के आयोजन गोपनीय ढंग से किए जाते हैं। यहां पूजन विधि भी अलग थी। खिचड़ी तौलने के साथ कार्यक्रम में गद्देदारों को निश्चित तौल के हिसाब से खिचड़ी दी गई। 
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कार्यक्रम में डांस करते किन्नर - फोटो : अमर उजाला
किन्नर समाज करता है इरावन की पूजा
किन्नर समाज इरावन को अपना ईश्वर मानता है। अर्जुन और नाग कन्या उलूपी के पुत्र इरावन हैं। किन्नर मोहिनी ने बताया कि उनका सबसे बड़ा तीर्थस्थल तमिलनाडु में है। यहीं पर विवाह आदि कार्यक्रम भी होते हैं।

विशेष समय पर यहां 18 दिन तक धार्मिक आयोजन चलता है। 17वें दिन भगवान इरावन के साथ विवाह रचाते हैं और अगले दिन श्रृंगार उतारकर विधवा की तरह विलाप करते हैं। किन्नर जीवन में एक बार तीर्थ पर अवश्य जाता है। 
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