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अफगानिस्तान की आपबीती: हर तरफ आंसू, बेबसी और लाचारी, तालिबानियों से घिरी मां बोली, बेटा हिंदुस्तान मत छोड़ना

Thu, 19 Aug 2021 09:03 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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अफगानिस्तान के छात्र। - फोटो : amar ujala
तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान में जिंदगी पर संकट है। कोई देश छोड़ना चाहता है तो कोई अपने ही वतन लौटना नहीं चाहता। ऐसा ही हाल है सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में एग्रीकल्चर से एमएससी कर रहे चार अफगानी छात्रों का। तालिबानियों से घिरी एक छात्र की मां ने बेटे को आपबीती सुनाते हुए कहा कि हिंदुस्तान मत छोड़ना। यहां का माहौल बहुत खराब है। हम बचेंगे या नहीं बचेंगे पता नहीं। बाजार बंद है, चारों तरफ तालिबानियों का कब्जा हो गया है। पूरा अफगानिस्तान डरा और सहमा हुआ है।



तालिबान के कब्जे वाले कुंदुज शहर निवासी टीवी बाजोरी का कहना है कि परिवार और मां ने हिंदुस्तान में ही रहने की सलाह दी है। टूटी-फूटी हिंदी बोलने वाले बाजोरी ने अपने शहर का हाल सुनाते हुए बताया कि तालिबानियों ने उनके शहर के बाजार जला दिए हैं। रोटी का संकट खड़ा हो रहा है। वह परिवार से मोबाइल पर बात कर रहे हैं, जिस पर परिवार ने घर नहीं लौटने की बात कही है। तालिबानियों का अत्याचार बढ़ रहा है। वह घरों में अंदर घुस रहे हैं और प्रत्येक घर में आठ-दस लोगों को तीनों समय का खाना बनाकर देने का दबाव बना रहे हैं। खुद परिवार के लोग भूखे रह रहे हैं।
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अफगानिस्तान का छात्र। - फोटो : amar ujala
कुंदुज के ही छात्र एत्तेहाद का कहना है कि कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिंदगी की सबसे मुश्किल घड़ी में वह परिवार के साथ नहीं होंगे। पूरे अफगानिस्तान के लिए वजूद का संकट खड़ा हो गया है। किसी की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। हर तरफ आंसू, बेबसी और लाचारी है। परिवार सहमा हुआ है। महिलाएं और बच्चे भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं। वह सोचकर ही डरे हुए हैं। 
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ग्रेटर अफगानिस्तान आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
बल्ख शहर के नजीब उल्ला खां का कहना है कि घर पर सब बेबस हैं। फोन करते हैं तो तालिबानियों की बर्बरता के किस्से परिवार के लोग बताते हैं। इंसानियत शर्मसार हो रही है। अमेरिका के हटते ही बल्ख प्रांत पर तालिबानियों ने कब्जा कर बर्बरता शुरू कर दी थी। हर व्यक्ति जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। मन करता है कि परिवार के बीच पहुंच जाएं, लेकिन बेहद लाचार हैं।

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तालिबान - फोटो : PTI
समनगान शहर के खेयरुद्दीन कहते हैं कि वह हिंदुस्तान में ही सुरक्षित हैं। मीडिया और परिवार के जरिए तालिबानियों की क्रूरता के बातें सुन रहे हैं। पूरा देश बेहद मजबूर हो गया है। हमारे भविष्य का भी कुछ पता नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अफगानिस्तान को मदद मिलनी चाहिए, लेकिन अभी तक ऐसा कोई बहुत बड़ा प्रयास किसी देश की ओर से नहीं किया गया है। पूरा देश सहमा हुआ है।
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सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में हॉस्टल। - फोटो : amar ujala
अंधेरे में हमारा भविष्य
इंटरनेशनल छात्रावास में रह रहे चारों छात्रों का कहना है कि बड़ी उम्मीदों के साथ पढ़ाई करने आए थे। उनका भविष्य अंधकार में है। वहां के हालात खराब हैं। अब वापस कैसे जाएंगे और हमारा क्या होगा, कुछ पता नहीं। हिंदुस्तान में हम सुरक्षित हैं। एमएससी के बाद पीएचडी में अगर एडमिशन मिलता है तो रुकेंगे, नहीं तो फिर वापस लौटना पड़ेगा।
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अफगानिस्तान के छात्र। - फोटो : amar ujala
चल रही थी शादी की तैयारी
छात्र टीवी बाजोरी ने बताया कि उसकी शादी भी तय हो गई है। यहां से लौटते ही जुलेखा से निकाह होना था। अब वीडियो कॉल पर बात होती है। जुलेखा ने कहा कि यहां मत आना, हम तो घर में कैद हैं। बस यह राहत है कि अभी तक परिवार के सदस्य सुरक्षित हैं।
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डॉ. आरके मित्तल, कुलपति कृषि विवि - फोटो : amar ujala
छात्रों को नहीं होने देंगे परेशानी
अफगानिस्तान के चार छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। आईसीएआर के द्वारा उनका एडमिशन किया गया था। यहां पर छात्रों को कोई परेशानी नहीं है, उनकी परिजनों से भी बात हो रही है। विवि स्तर से जो भी सुविधा होगी, उन्हें दी जाएगी। डिग्री पूरी होने के बाद वह जो भी वह निर्णय लेंगे विवि उनके साथ है। - डॉ. आरके मित्तल, कुलपति कृषि विवि
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