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यमुना नदी में समाया परिवार, 19 मौतों के बाद फिर पसरा गांव में मातम, देखें ये तस्वीरें

Mon, 29 Apr 2019 09:45 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
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घटना के बाद मौके पर पहुंचे अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
काठा नाव हादसे का दर्द अभी बागपत भूला भी नहीं है कि सोमवार को मवी कलां गांव के सामने फिर हादसा हुआ। भैंसा- बुग्गी यमुना नदी के बीच तेज बहाव में फंसकर पलट गई। इससे एक ही परिवार के चार सदस्य डूब गए। पिता-पुत्र ने किसी तरह तैरकर जान बचा ली। जबकि एमए की छात्रा और उसकी मां नदी में समा गई। नदी में डूबने से भैंसे की मौत हो गई। यहां खेतों तक जाना फिर किसानों के लिए मुसीबत बन गया।
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पीड़ित परिजन - फोटो : अमर उजाला
हादसे की सूचना पर सैकड़ों ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। हादसे की सूचना मिलते ही डीएम और एसपी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। एनडीआरएफ की टीम ने पहुंचकर नदी में मां-बेटी की तलाश की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया। स्थानीय गोताखोर भी नदी में दोनों की तलाश कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बुग्गी व भैंसें के शव को बाहर निकाला।
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यमुना नदी में समाया परिवार - फोटो : अमर उजाला
काठा गांव निवासी 65 वर्षीय किसान सहेंद्र की यमुना नदी के पार पांच बीघा कृषि भूमि है। जिसमें गन्ने की फसल खड़ी हुई है। सोमवार को सुबह करीब छह बजे  ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के पुल के पास से यमुना नदी पार करने लगे तो पानी का बहाव तेज होने के कारण भैंसा- बुग्गी नदी में पलट गई। बुग्गी में सवार किसान सहेंद्र, उसकी पत्नी राजबीरी (50), बेटी कोमल (20), दिव्यांग बेटा नीटू (30) नदी में डूब गए। किसान सहेंद्र और उसके बेटे नीटू ने तैरकर अपनी जान बचा ली, लेकिन मां-बेटी नदी में समा गई।

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यमुना नदी - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद नदी किनारे ग्रामीणों की भीड़ लग गई। ग्रामीणों ने पुलिस को हादसे की सूचना दी। पुलिस गोताखोरों के साथ पहुंची। मां-बेटी की तलाश कराई, लेकिन उनका कोई पता नहीं चला। एनडीआरएफ टीम को बुलाया गया। टीम ने यमुना नदी में कई किमी तक मोटर बोट से मां-बेटी की तलाश की। शाम तक भी उनका कुछ पता नहीं चल सका था।
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अधिकारियों को जानकारी देते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
वहीं डीएम पवन कुमार और एसपी शैलेश कुमार पांडेय भी पहुंचे। पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से भैंसें के शव व बोगी को नदी से बाहर निकलवाया। एसपी शैलेष कुमार पांडेय ने बताया कि यमुना नदी में मां-बेटी की तलाश कराई जा रही है। एनडीआरएफ टीम के साथ पुलिस भी लगी है।
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नदी में डूबे लोगों को ढूंढती टीम - फोटो : अमर उजाला
पहले भी हुआ था बड़ा हादसा
काठा गांव में फिर मातम है। इस बार नाव नहीं डूबी... भैंसा और बुग्गी पलट गई। पहले भी किसानों को खेतों तक जाना था और इस बार भी मौत से मुकाबला करते किसान खेत में ही जा रहे थे। फिर साबित हो गया कि सिस्टम अंधा भी है और बहरा भी। 19 लोगों की मौत के 19 महीने बाद सिर्फ गांव के बाहर चेतावनी बोर्ड लगाया। रकबा यमुना के पार है।
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नदी में लोगों को ढूंढती टीम - फोटो : अमर उजाला
किसान कहते हैं कि उन्हें या तो यमुना के इस पार ही जमीन दिला दी जाए या फिर गांव के सामने अस्थायी पुल का निर्माण किया जाए। प्रशासन को किसी बड़ी नाव का इंतजाम करना चाहिए।

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मौके पर जांच करते अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
बागपत के काठा गांव के किसानों की दो हजार बीघा जमीन यमुना नदी के पार है। सैकड़ों किसान और मजदूर रोजाना मौत से मुकाबला करते हुए नदी पार करते हैं। आए दिन हादसे होते हैं। नाव डूबी तब भी किसान खेतों में जा रहे थे और बुग्गी डूबी तब भी खेतों में जा रहे थे। किसान राममेहर, कृष्णपाल, सुरेश, सूरज ने कहा कि डीएम, एसडीएम और अन्य तमाम अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिए जा चुके हैं। मौके पर पहुंचे डीएम पवन कुमार से अस्थायी पुल के निर्माण की मांग की।

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किसान रोज ऐसे ही रास्ता पार करते हैं। - फोटो : अमर उजाला
इसलिए चुना था मवी कलां का रास्ता
किसानों ने बताया कि ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के निर्माण के समय मवी कलां गांव के पास यमुना नदी में अस्थायी पुल बनाया गया था। तभी से किसान इसी जगह से नदी पार करने लगे। किसानों ने कई बार प्रशासन को प्रार्थना पत्र देकर एक्सप्रेस-वे से रास्ता बनवाने की मांग की, लेकिन अनदेखी की गई।
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घटना के बाद मौके पहुंचे ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
कैसे छोड़ दें दो हजार बीघा जमीन
किसान राहुल, रामपाल का कहना है कि दो हजार बीघा जमीन से सैकड़ों किसान मजदूरों के घर चलते हैं, लेकिन प्रशासन मामले की गंभीरता नहीं समझ रहा है।  काठा गांव के किसान और मजदूर अगर अपने गांव के सामने से यमुना पार कर खेतों में जाएं तो दस मिनट का समय लगता है, लेकिन अगर ग्रामीणों को गौरीपुर मोड़ के पुल से घूमकर खेतों तक जाना पड़े तो एक चक्कर करीब 70 किमी का बैठता है। यही वजह है कि किसान और मजदूर यमुना पार करने को ही तरजीह देते हैं।

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