मलियाना नरसंहार
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उन्होंने बताया कि कोर्ट में केस के न टिकने की यह भी बड़ी वजह रही कि जो वादी बनाए गए, उन तक को नहीं पता था कि किस-किस के नाम लिखे गए हैं, एफआईआर उनसे एसओ ने अपने हिसाब से लिखवाई थी। इसके अलावा जो गवाह पेश किए गए, उनमें से भी छह लोगों ने यह गवाही दी कि नामजद किए गए लोग गोली चलाने वाले नहीं हैं, बल्कि गोली तो तत्कालीन प्रशासन के कहने पर पीएसी और पुलिसवालों ने चलाई थी, जिनसे लोगों की मौत हुई। जांच आयोग ने इन सब मामलों को संज्ञान में लिया था। मलियाना दंगे में 63 लोगों की मौत हो गई थी।