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हिस्ट्रीशीटर अजीत की हत्या के बाद पूर्वांचल में शुरू हो सकती है गैंगवॉर, बरामद असलहे दे रहे हैं सबूत  

Fri, 08 Jan 2021 09:14 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी अमर उजाला नेटवर्क, मऊ
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अजीत सिंह। - फोटो : अमर उजाला
यूपी के मऊ जिले के मुहम्मदाबाद गोहना के पूर्व ज्येष्ठ उप ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह की लखनऊ में हत्या के बाद पूर्वांचल में गैंगवॉर की आशंका बढ़ गई है। हत्या में .32 और 9 एमएम की पिस्टल के इस्तेमाल से यह जाहिर होता है कि पेशेवर हत्यारों ने घटना को अंजाम दिया होगा।

हालांकि अजीत के साथ साये की तरह रहने वाले मुहम्मदाबाद के भदीड़ गांव निवासी मोहर सिंह की तहरीर पर जेल में निरुद्ध आजमगढ़ के कुख्यात अपराधी ध्रुव सिंह उर्फ कुंटू सिंह, तरवा क्षेत्र निवासी पूर्व ब्लॉक प्रमुख अखंड प्रताप सिंह और पेशेवर अपराधी कन्हैया शर्मा उर्फ गिरधारी उर्फ डॉक्टर के अलावा दो अज्ञात बदमाशों के खिलाफ हत्या और हत्या की साजिश का मुकदमा दर्ज किया गया है।

अजीत सिंह की हत्या किन कारणों से की गई  है और इसमें किसका हाथ है, इसका खुलासा जांच के बाद ही हो सकेगा लेकिन हत्या में नामजद कुंटू सिंह का नाम आना कोई संयोग नहीं है। करीब दस वर्ष से दोनों के बीच अदावत चल रही थी।
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अजीत सिंह - फोटो : अमर उजाला
2005 में मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक क्षेत्र पंचायत प्रमुख पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित होने के बाद उस समय जेल में बंद अजीत सिंह ने कुंटू सिंह की आर्थिक मदद की और बाहुबल के दम पर अपनी पत्नी रानू सिंह को पहले बीडीसी चुनाव निर्विरोध जितवाया, फिर ब्लाक प्रमुख बनवाने में सफल रहे।

कुछ समय बाद पैसों के लेनदेन और क्षेत्र पंचायत में  कुंटू सिंह की दखलंदाजी और जबरन ठेके को लेकर अजीत सिंह की कुंटू सिंह से ठन गई। इस बीच कई मौके आए जब दोनों आमने-सामने आए। सबसे अधिक विवाद मुहम्मदाबाद गोहना रोडवेज स्थित शराब की दुकान को लेकर हुआ।
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अजीत सिंह (बायें) व घटनास्थल पर तैनात पुलिसकर्मी। - फोटो : अमर उजाला
इस दुकान का लाइसेंस अजीत सिंह कोलॉरा निवासी अपने मामा श्याम नारायण सिंह के नाम कराने में सफल रहे। लाखों की आमदनी वाली शराब दुकान हाथ से फिसलती देखकर कुंटू सिंह बौखला गया। उसने श्याम नारायण को धमकाना शुरू किया जिससे अजीत सिंह मैदान में उतर आया और कुंटू सिंह के विरुद्ध धमकी, हत्या की साजिश सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज करा दिया। 

2010 के ब्लॉक प्रमुख चुनाव में क्षेत्र पंचायत प्रमुख का पद अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित होने के बाद अजीत सिंह ने यहां से किनारा कर लिया। वह शराब और जमीनों की खरीद-फरोख्त के धंधे  से जुड़ने के साथ राजनीति में सक्रिय होने लगा। इसके बाद वर्ष 2015 में ब्लाक प्रमुख चुनाव में अपनी करीबी पिछड़ी जाति की महिला को चुनाव लड़वाया और काफी बड़े अंतर से जीत हासिल की।

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अजीत सिंह - फोटो : अमर उजाला
इस बीच उसका रुतबा तो बढ़ा ही साथ ही राजनीतिक और आर्थिक समृद्धि भी बढ़ गई, लेकिन दुश्मनी का डर हमेशा रहा। इसीलिए वह वाहनों का काफिला लेकर निकलता था। उसमें दर्जनों असलहाधारी सवार रहते थे।

इस बीच अपराध के पूर्व रिकार्ड को देखते हुए पुलिस की रिपोर्ट पर 31 दिसंबर को जिलाधिकारी ने उसे जिला बदर कर दिया जिससे वह लखनऊ स्थित आवास पर रहने लगा। अजीत की हत्या के बाद क्षेत्र के लोग दहशत में हैं। उनका कहना है कि गैंगवॉर अब और तेज होगा।
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अजीत सिंह - फोटो : अमर उजाला
अपना ब्लॉक प्रमुख बनवाना चाहता था कुंटू 
ब्लॉक प्रमुख चुनाव पर कुंटू सिंह की नजर शुरू से ही थी। अजीत सिंह से दूरी बढ़ने के बाद वह किसी प्रकार अपने करीबियों के माध्यम से ब्लॉक प्रमुख पद पर कब्जा जमाना चाहता था। इसके लिए उसने वाराणसी जनपद के चोलापुर क्षेत्र के कुख्यात अपराधी गिरधारी शर्मा उर्फ कन्हैया उर्फ डॉक्टर को मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक क्षेत्र के भदीड़- सोनौरा क्षेत्र पंचायत से बीडीसी चुनाव में उतारा, लेकिन अपराधी के चुनाव में उतरने के खिलाफ ग्रामीण एकजुट हो गए और उसे करारी शिकस्त मिली थी।
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