मथुरा के लोग तेजी से कैंसर की चपेट में आ रहे हैं। इनमें युवाओं और महिलाओं की भी अच्छी खासी संख्या है। इसकी बड़ी वजह पान मसाला, गुटखा, तंबाकू और धूम्रपान का सेवन करना है। वहीं महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। मंगलवार को विश्व कैंसर दिवस है।
जिले में कैंसर अपने पैर पसार रहा है। इसमें सर्वाइकल कैंसर तेजी से महिलाओं को अपना शिकार बना रहा है। डॉ. शीला शर्मा मेमोरियल चैरिटेबल कैंसर संस्थान की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. भावना शर्मा ने बताया कि सर्विक्स, जो योनि और गर्भाशय को जोड़ता है, उसमें होने वाले कैंसर को सर्वाइकल कैंसर कहा जाता है। सर्विक्स के सेल्स, प्रोकैंसरस सेल्स में परिवर्तित होने लगते हैं, यानी ऐसे सेल्स जो आगे चलकर कैंसर में बदल सकते हैं। संस्थान में जितने कैंसर मरीज पहुंच रहे हैं उनमें 45 प्रतिशत महिलाएं हैं। इन 45 प्रतिशत में लगभग 40 प्रतिशत महिलाएं सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित हैं। बीते चार वर्षों के आंकड़े देखे जाएं तो हमारे यहां ही लगभग 7200 सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित महिलाओं की ओपीडी हो चुकी है।
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ब्रेस्ट कैंसर
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सर्वाइकल कैंसर के लक्षण
पेट के निचले हिस्से में दर्द होना, यूरिन में खून आना, शारीरिक संबंध बनाने के बाद रक्तस्त्राव होना, पीरियड्स के दौरान नॉर्मल से अधिक ब्लीडिंग होना, पीरियड्स खत्म होने के बाद भी ब्लीडिंग होना, खूनी या पानी जैसा वेजाइनल डिसचार्ज होना, जिसमें से अजीब से गंध आए, थकान, भूख न लगना, पीठ में दर्द, पैरों में सूजन सर्वाइकल कैंसर के मुख्य लक्षण हैं।
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ब्रेस्ट कैंसर
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बचाव के उपाय
डॉ. भावना शर्मा ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर से बचाव का सबसे कारगर तरीका 9-14 साल की उम्र में एचपीवी वैक्सीन लगवाना है। सुरक्षित तरीके से शारीरिक संबंध बनाना, पैप टेस्ट कराना और धूम्रपान न करना भी बचाव के उपाय हैं।
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कैंसर से बचाव
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जिले में कैंसर के इलाज की सरकारी सुविधा नहीं
मथुरा में सरकारी स्तर पर कैंसर के उपचार के लिए कोई इंतजाम नहीं हैं। सरकारी अस्पताल में कैंसर विशेषज्ञ नहीं हैं। यह दुर्भाग्य ही है कि यहां सरकारी स्तर पर कैंसर के रोगियों का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है।