नंद के आंगन में अभी कान्हा का जन्म नहीं हुआ है, लेकिन नंदगांव में उनकी बधाइयां गूंजने लगी हैं। सावन पूर्णिमा की रात नंदभवन में जैसे ही समाज गायन की शुरुआत हुई, पूरा वातावरण ब्रज की पारंपरिक बधाइयों से कृष्णमय हो उठा। बोलो री, नाहिंन की बिटिया नगर बुलावौ देय और आज बधायौ ब्रजराज कें, रानी जायौ मोहन पूत’ जैसे पदों ने ऐसा समां बांधा कि श्रद्धालुओं को लगा मानो नंदबाबा के घर कान्हा का जन्म हो चुका हो।
नंदीश्वर पहाड़ी स्थित नंदबाबा मंदिर में इन दिनों सुबह-शाम कृष्ण जन्म की बधाइयां सुनाई दे रही हैं। मंदिर में बैठे श्रद्धालु भी पारंपरिक पदों के साथ कृष्ण जन्म की कल्पना में डूबते नजर आ रहे हैं। बधाई गायन में ब्रज की लोक परंपरा, संगीत और कृष्ण भक्ति का ऐसा संगम दिखाई दे रहा है, जो श्रद्धालुओं को बरबस अपनी ओर खींच रहा है।