मथुरा के केसीघाट पर रिवर फ्रंट निर्माण के कारण यमुना का जलस्तर काफी घट गया है। अगर यमुना का जलस्तर सामान्य दिनों की तरह होता तो मंजर और भी भयावह हो सकता था। गनीमत रही कि जलस्तर कम है। इसलिए बचाव दल ने कई जिंदगियों को बचा लिया।
मथुरा के वृंदावन में यमुना में हुए श्रद्धालुओं की मौत के मामले में बड़ी जानकारी सामने आई है। भीषण हादसे का सबब बने पांटून पुल को हटाने की कवायद की जा रही थी। श्रद्धालुओं से भरी मोटरबोट पांटून पुल के एंकर से उलझने के बाद पुल से टकराने के बाद पलट गई। हादसे के बाद 15 पीपों के पुल यमुना में बेलगाम होकर बहता रहा।
इस दौरान उसे रोकने की काफी मशक्कत की गई मगर सफलता नहीं मिली। पुल के यमुना में बेलगाम बहने के कारण बचाव कर्मियों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। यमुना में सिंचाई विभाग रिवर फ्रंट विकसित करने का काम कर रहा है। इसके लिए यमुना की बालू को हटाने के लिए ड्रेजिंग मशीन लगाई गई है। सूत्रों ने बताया कि इस ड्रेजिंग मशीन को दूसरी ओर लगाने में पीपों का पुल बाधा बन रहा था।
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मथुरा में हादसे के बाद पांटुन पुल के पास तलाशी अभियान चलाते गोताखोर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यही कारण था कि पीपों के पुल को हटाने का काम किया जा रहा था। पांटून पुल को बीच से हटा दिया गया। इसके बाद 15 पीपों के पुल को थामने के लिए नदी किनारे लगाए गए कुंडों को लोगों ने लोहे के गर्डर व रस्से बांधकर रोकने का प्रयास किया, लेकिन नदी के तेज बहाव के कारण 15 पीपों वाला यह पुल नदी में बहता चला गया।
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मथुरा में बोट हादसे के बाद मौके पर जमा भीड़ और पुलिस
- फोटो : पीटीआई
शुक्र रहा कि कोई और नाव इसकी चपेट में नहीं आई। बचाव कार्य में भी पीपों का पुल यहां से वहां नदी में तैरता रहा। इस कारण नदी में बचाव कार्य में जुटे सेना, एसडीआरएफ व स्थानीय गोताखोरों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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मथुरा में बोट हादसे के बाद मौके पर जमा भीड़ और बचाव अभियान चलाती पुलिस
- फोटो : पीटीआई
कम किया था प्रवाह...
मथुरा के केसीघाट पर रिवर फ्रंट निर्माण के कारण यमुना का जलस्तर काफी घट गया है। अगर यमुना का जलस्तर सामान्य दिनों की तरह होता तो मंजर और भी भयावह हो सकता था। गनीमत रही कि जलस्तर कम है। इसलिए बचाव दल ने कई जिंदगियों को बचा लिया।
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मथुरा में बोट हादसे के बाद मौके पर जमा भीड़
- फोटो : पीटीआई
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना कि यमुना का जलस्तर कम होने के बाद यमुना किनारे जगह-जगह से बालू आदि को हटाया जा रहा है। इससे बचाव कार्य में जुटे दल को काफी मदद मिली। कम पानी होने से बचावकर्मी आसानी से श्रद्धालुओं तक पहुंच सके और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला जा सका।
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मथुरा में बोट हादसे के बाद बचाव अभियान चलाते जवान
- फोटो : पीटीआई
पत्नी का पति से छूटा हमेशा लिए साथ
घायल श्रद्धालु अनिल और उनकी पत्नी जिला संयुक्त चिकित्सालय में उपचार के लिए लिए अचेतावस्था में एबुलेंस से पहुंचे। पति अनिल की जान बच गई जबकि उनकी पत्नी 55 वर्षीय सपना की जान नहीं बच सकी। पंजाब के मोगा निवासी अनिल हंस ने बताया कि वह वृंदावन घूमने आए थे।
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मथुरा हादसे के बाद बचाव अभियान चलाते जवान
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पूरा दल भगवान कृष्ण की नगरी में आकर खुश था। वह अपनी पत्नी के साथ आए थे लेकिन कुछ ही पल में खुशी गम में बदल गई। उन्होंने आखों में आंसू और रुंधे गले से बताया कि पत्नी सपना का जीवन नहीं रहा। उनके देखते देखते पत्नी की जान चली गई। मोटरबोट में वह कीर्तन करते हुए चल रह थे।
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मथुरा हादसे के बाद बचाव अभियान चलाते जवान
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
लोगों ने बचाया
जिला संयुक्त चिकित्सालय में उपचार करा रहीं पंजाब के जगराऔ निवासी 57 वर्षीय राजेंद्र कौर ने आंखों देखा हाल बयां किया। वह बार-बार रो रही थीं। उन्होंने बताया कि मोटरबोट एक दूसरे के पीछे चल रहीं थीं।
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मथुरा में बोट हादसे के बाद मौके पर जमा भीड़ और पुलिस
- फोटो : पीटीआई
37 श्रद्धालुओं से भरी मोटरबोट पांटून पुल के पास पानी कम होने कारण रेत में फंस गई। मोटरबोट को आगे बढ़ाया तो सामने पुल था। इसी दौरान हादसा हो गया। मोटरबोट गहरे पानी में डूब गई। कुछ लोगों को पुल पर खड़े लोगों ने बचाया और यमुना के किनारे पहुंचाया।
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मथुरा में बोट हादसे के बाद मौके पर जमा भीड़ और बचाव अभियान चलाती पुलिस
- फोटो : पीटीआई
मथुरा : यमुना में पांटून पुल से टकराकर पलटी मोटरबोट, 11 श्रद्धालुओं की मौत
मथुरा के वृंदावन में केसीघाट और बंशीवट के बीच पांटून पुल से टकराकर श्रद्धालुओं से भरी एक मोटरबोट पलटने से शुक्रवार को छह महिलाओं समेत 11 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। बोट पर लुधियाना, हिसार और मुक्तसर के करीब 37 श्रद्धालु सवार थे। बताया जा रहा है कि पांटून पुल को लापरवाही से हटाया जा रहा था जिसकी चपेट में मोटरबोट के आने से हादसा हुआ।
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मथुरा में बोट हादसे के बाद मौके पर जमा भीड़ और बचाव अभियान चलाती पुलिस
- फोटो : पीटीआई
स्थानीय गोताखोरों और पीएसी ने तत्परता दिखाते हुए 22 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जबकि लापता लोगों की तलाश में सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। देर रात तक पांच श्रद्धालुओं का पता नहीं चल पाया था। शनिवार सुबह एक श्रद्धालु का शव मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर दुख व्यक्त किया है।
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मथुरा में बोट हादसे के बाद मौके पर जमा भीड़
- फोटो : पीटीआई
शुक्रवार सुबह लुधियाना व हिसार से दो बसों में लगभग 130 श्रद्धालुओं के दो दल वृंदावन पहुंचे थे। इनमें सबसे ज्यादा लुधियाना के हैं। डीआईजी शैलेश पांडेय ने बताया कि इसी दल के 37 श्रद्धालु मोटरबोट पर यमुना की सैर कर रहे थे।
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मथुरा हादसे के बाद शव लेकर जाते पुलिसवाले
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
केसीघाट और बंशीवट के बीच अचानक मोटरबोट लहराने लगी और पांटून पुल से टकराकर पलट गई। मोटरबोट पलटते ही उसमें सवार श्रद्धालु यमुना में डूबने लगे और चीखपुकार मच गई। आसपास के लोगों के शोर मचाने पर स्थानीय गोताखोरों ने यमुना में छलांग लगाकर डूब रहे लोगों को बचाने का काम शुरू किया।
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मथुरा हादसे के बाद यूपी एसडीआरएफ के जवान
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सूचना पर पुलिस के साथ पीएसी के गोताखोर भी पहुंचे और 22 श्रद्धालुओं को बचा लिया। जिनमें से आठ को वृंदावन के रामकृष्ण मिशन अस्पताल व मांट स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया।
मथुरा में बोट हादसे के बाद मौके पर जमा भीड़
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हादसे के बाद कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण, जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह, डीआईजी शैलेश पांडेय और पुलिस अधीक्षक सिटी राजीव कुमार सिंह मौके पर पहुंच गए। जिलाधिकारी ने सेना की मदद मांगी। सेना की टुकड़ी भी मौके पर पहुंच गई और बचाव कार्य में जुट गई। देर रात तक बचाव कार्य चलता रहा।