लखीमपुर खीरी जिले में शारदा नदी की तेज कटान के कारण रूरा सुल्तानपुर गांव के ग्रामीण अपने घर तोड़ने को मजबूर हैं। नदी किनारे करीब 60-70 घर खतरे में हैं। ग्रामीण ईंट व अन्य सामान बचाने के लिए खुद ही घर गिरा रहे हैं।
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कटान पीड़ितों ने लगाई मदद की गुहार
- फोटो : अमर उजाला
लखीमपुर खीरी जिले में मजदूरी कर एक-एक रुपये जोड़कर जमीन खरीदी और उस पर अपना आशियाना खड़ा किया। वर्षों की मेहनत से बनाए घर को अब ग्रामीण अपने हाथों से तोड़ने को मजबूर हैं। वजह है शारदा नदी की कटान, जो लगातार गांव की ओर बढ़ रही है। गोला तहसील क्षेत्र के बिजुआ ब्लॉक के रूरा सुल्तानपुर गांव में नदी तेजी से कटान कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कई घरों के आसपास जमीन कट चुकी है और खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। घर इसलिए तोड़ रहे हैं, जिससे ईंट व अन्य सामान को सुरक्षित बचाया जा सके।
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खुद अपना घर तोड़ रहे ग्रामीण
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रूरा सुल्तानपुर गांव के ग्रामीणों के मुताबिक नदी किनारे करीब 60 से 70 घर हैं। कटान को देखते हुए सुरेश, विश्वनाथ, लाल बहादुर, अशोक, भूपेंद्र और संतोष समेत कई ग्रामीण अपने घरों को खुद ही तोड़ चुके हैं। उनका कहना है कि घर नदी में समाने का इंतजार करने से बेहतर है कि जो सामान बच सकता है, उसे सुरक्षित निकाल लिया जाए। घरों के साथ खेत और जमीन भी नदी की कटान की भेंट चढ़ रही है।
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शारदा नदी के किनारे बैठे बुजुर्ग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
धूप में दिन, बारिश में भीगकर कट रही रात
ग्रामीणों ने बताया कि सिर छिपाने के लिए पक्की छत नहीं बची है। दिन में तेज धूप में खुले आसमान के नीचे रहना पड़ रहा है तो कभी अचानक बारिश होने पर भीगते हुए रात गुजारनी पड़ती है। बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से रहने के लिए अभी तक समुचित व्यवस्था नहीं की गई है।
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ग्रामीण हरीलाल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रामीणों का कहना है कि खाने की व्यवस्था भी नियमित नहीं है। एक दिन भोजन मिलता है तो अगले दिन परेशानी खड़ी हो जाती है। कई परिवार चटनी और सूखी रोटी के सहारे रात काटने को मजबूर हैं। घर टूटने के बाद कई दिनों से चूल्हा तक नहीं जला है। ग्रामीणों का दर्द है कि जब घर और जमीन ही नदी में समा रही है तो बच्चों को कहां रखें और उन्हें क्या खिलाएं।
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कटान की जद में मकान
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मंदिर भी कटान की कगार पर
ग्रामीणों के अनुसार शारदा नदी अब गांव के बेहद करीब पहुंच गई है। कटान की चपेट में आने से मंदिर भी खतरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार मौके पर आते हैं तो केवल मंदिर तक जायजा लेकर लौट जाते हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि टूटे हुए घरों तक पहुंचकर उनकी स्थिति देखी जाए और प्रभावित परिवारों की तत्काल मदद की जाए। एक बार किट मिली है
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कटान पीड़ित ग्रामीण
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रामीणों ने विधायक और प्रशासन से गुहार लगाते हुए कहा कि साहब, हमारा घर और जमीन जा रही है। कम से कम रहने और खाने की व्यवस्था तो करा दीजिए। बच्चों को लेकर कहां जाएं और कैसे दिन-रात गुजारें।
खुद अपना घर तोड़ रहे ग्रामीण
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव तहसील और जिला मुख्यालय से दूर होने के कारण जिम्मेदार अधिकारी उनकी समस्या पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से तत्काल मौके का निरीक्षण कर सुरक्षित स्थान पर रहने की व्यवस्था, भोजन और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।