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पर्यटन दिवस विशेष: 'छोटी काशी', मेंढक मंदिर..., लखीमपुर खीरी में दुधवा के अलावा ये भी हैं पर्यटन स्थल

Fri, 27 Sep 2024 06:46 AM IST
मुकेश कुमार जितेंद्र अवस्थी, संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
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लखीमपुर खीरी के प्रमुख पर्यटन स्थल - फोटो : अमर उजाला
घूमने का प्लान बना रहे हैं तो लखीमपुर खीरी बेहतर विकल्प है। तराई में बसे उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में धार्मिक स्थलों के साथ प्राकृतिक सुंदरता भी है। दुधवा नेशनल पार्क में जंगल सफारी का लुत्फ उठा सकते हैं। बाघ, हाथी और अन्य वन्यजीवों के दीदार हो जाएंगे। थारू समाज की जीवन शैली से भी रूबरू होने का मौका यहां मिलता है। थारू व्यंजनों का लुत्फ भी उठाया जा  सकता है। सिंगाही का किला भी देख सकते हैं। 
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गोला गोकर्णनाथ, लखीमपुर - फोटो : instagram
छोटी काशी में बम-बम भोले की जयकार
जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर गोला गोकर्णनाथ छोटी काशी के नाम से मशहूर हैं। यहां के पौराणिक शिव मंदिर में माथा टेकने देश के दूर प्रांतों से भी लोग पहुंचते हैं। सावन में भोलेनाथ का जलाभिषेक करने को लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। गोला में कई अन्य प्राचीन मंदिर भी हैं। गोला पहुंचने के लिए लखनऊ से सीधी ट्रेन और बस सेवा है।
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ओयल का मेंढक मंदिर
ओयल का मेंढक मंदिर
जिले की धार्मिक पहचान में ओयल का मेंढक मंदिर भी शामिल है। मेंढक के आकार पर बने अनोखे मंदिर का विशेष महत्व है। मंदिर गेट पर बना कुंआ भी कई रहस्य समेटे है। ओयल भी लखनऊ से सीधी रेल सेवा और बस मार्ग से जुड़ा है। 

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दुधवा नेशनल पार्क में नकउहा नाले पर लगा स्वागत द्वार।
दुधवा नेशनल पार्क में बाघ और हाथियों का दीदार
दुधवा नेशनल पार्क का जिले की पर्यटन व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है। यहां सैलानियों को बाघ, हाथी और अन्य वन्यजीवों के दीदार होते हैं। जंगल सफारी का लुत्फ उठाने के साथ थारू व्यंजनों का स्वाद भी चखा जा सकता है। दुधवा में ही किशनपुर सेंक्चुरी भी प्राकृतिक नजारों से भरा है।
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दुधवा में विचरण करता गैंडा - फोटो : दुधवा
दुधवा पार्क में ही गैंडा पुनर्वासन योजना भी है। यहां गैंडे को भी देखा जा सकता है। झील, नदियों और अन्य नजारे आपको प्रकृति से जोड़ते हैं। दुधवा की लखनऊ से दूरी करीब 225 किमी है। लखीमपुर तक ट्रेन और बाद में बस व अन्य वाहनों से यहां पहुंचा सकता है। निजी वाहनों से भी यहां का सफर आसान रहता है।
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सई नदी का उद्गम स्थल - फोटो : अमर उजाला
सई और सरायन नदी का उद्गम स्थल
लखीमपुर के पसगवां ब्लॉक क्षेत्र में सई नदी का उद्गम स्थल है। यहां से निकलकर नदी कई जिलों से गुजरती है। सरायन नदी का उद्गम स्थल भी जिले के बांकेगंज ब्लॉक की एक ग्रामसभा से है। उद्गम स्थल पर कई कार्य भी प्रस्तावित हैं। सरायन नदी जिले में करीब 90 किलोमीटर की दूरी तय करती है। 
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लिलौटीनाथ शिव मंदिर - फोटो : अमर उजाला
लिलौटी नाथ और देवकली धाम
शहर से करीब नौ किलोमीटर की दूरी पर भगवान शिव का प्राचीन मंदिर लिलौटी नाथ धाम भी जिले के पर्यटन में स्थान रखता है। सावन में लोगों की यहां भीड़ जुटती है। शहर से करीब 10 किमी दूर देवकली धाम का शिवमंदिर भी आस्था का केंद्र हैं। मान्यता है कि यहां के तालाब की मिट्टी घर में रखने से सांप घर में नहीं आते। नाग पंचमी के दिन यहां विशेष पूजा होती है। 

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मीटर गेज ट्रेन - फोटो : अमर उजाला
मीटर गेज ट्रेन के सफर का मजा
लखनऊ-लखीमपुर से पीलीभीत रेलखंड तो ब्राॅड गेज में बदल गया, लेकिन जिले में मैलानी-पलिया रेलखंड पर अभी मीटर गेज ट्रेन के सफर का आनंद लिया जा सकता है। इस रेल मार्ग पर अभी छोटी ट्रेन ही दौड़ रही है। जो मैलानी से पलिया होकर नानापारा जाती है। ट्रेन जंगल से भी होकर गुजरती है। 
 
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शारदा बैराज - फोटो : अमर उजाला
इन स्थानों पर भी कर सकते हैं भ्रमण
शारदा बैराज, शारदानगर का बालाजी मंदिर, धौरहरा की रामलोक वाटिका, गज मोचन मंदिर, टेढ़ेनाथ शिव मंदिर से भी लोगों की आस्था जुड़ी है।

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