पांच हजार हेक्टेयर से अधिक फसलें बाढ़ के पानी से जलमग्न हो गईं। पूरे दिन बाढ़ का कहर गंगा के तटीय इलाकों में बना रहा। इससे ग्रामीणों के बीच बेचैनी के हालात बने रहे। अजीतनगर गांव में भी बाढ़ का पानी घुस गया।
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गंगा में बाढ़ से गांव में घुसा पानी।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कासगंज में हाईफ्लड लेवल पार कर उफनाई गंगा की धारा लगातार दूसरे दिन भी जिले में कहर बरपाती रही। सोमवार को जलस्तर हाईफ्लड लेवल से दस सेंटीमीटर ऊपर निकल गया। बाढ़ के पानी के तेज प्रवाह से शहवाजपुर-सुन्नगढ़ी मार्ग कट गया। इससे 30 से अधिक गांव का संपर्क कट गया है। उफनती गंगा की धार के कहर से ग्रामीण कराह उठे हैं। गंगा की बाढ़ से कई गांव की आबादी, खेती-बाड़ी और मार्ग प्रभावित हुए। लोग आवागमन के लिए नाव का सहारा ले रहे हैं। प्रशासन द्वारा मोटरबोट की मदद से राहत सामग्री भी बमुश्किल प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचाई जा रही है।
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खतरे के निशान से ऊपर बह रही गंगा।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गंगा में नरौरा बैराज से सुबह तक तीन लाख क्यूसेक से अधिक का प्रवाह बना रहा। इससे गंगा की धारा लगातार उफना रही है। कछला ब्रिज पर गंगा का हाईफ्लड लेविल 162.91 मीटर के निशान पर रहा। दूसरे दिन सोमवार को भी हाईफ्लड लेवल से दस सेंटीमीटर रिकॉर्ड की गई। हाईफ्लड स्तर गंगा ने रविवार को ही पार कर लिया था और शाम के बाद यह धारा और उफान भरने लगी।
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कासगंज में बाढ़।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रात करीब 10 बजे के बाद सुन्नगढ़ी-शहवाजपुर मार्ग में कटान शुरू हो गया। रात में ही कई मीटर सड़क बाढ़ के पानी से कट गई। इस सड़क के किनारे लगा विद्युत पोल भी धराशायी हो गया। सड़क काटकर उफनाती गंगा का पानी दूसरी ओर के ग्रामीण इलाके में पहुंच गया जिससे ग्रामीण घबरा गए। अचानक बने बाढ़ के हालात से बचाव के इंतजामों में जुट गए।
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कासगंज में बाढ़।
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इसी तरह से बाढ़ का पानी तटीय इलाकों में कहर बरपा रहा है। पांच हजार हेक्टेयर से अधिक फसलें बाढ़ के पानी से जलमग्न हो गईं। पूरे दिन बाढ़ का कहर गंगा के तटीय इलाकों में बना रहा। इससे ग्रामीणों के बीच बेचैनी के हालात बने रहे। अजीतनगर गांव में भी बाढ़ का पानी घुस गया। यहां बैलगाड़ी से लोग आवागमन करते देखे गए।
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कासगंज में बाढ़।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सोरोंजी के लहरा इलाके में बाढ़ का पानी चारों ओर नजर आ रहा है। यहां वृद्ध और मानसिक दिव्यांगों के लिए संचालित अपना घर आश्रम में भी पानी भर गया। लहरा के अलावा कादरवाड़ी, बघेला, दतलाना, डिंगलेशनगर, खड़ेरी, पिलोसराय सहित अन्य ग्रामीण इलाकों तक बाढ़ का पानी आबादी में पहुंच गया।
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बाढ़ के पानी से बिजली का खंभा भी गिर गया।
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बाढ़ से हर जगह हालात बेकाबू नजर आए। वहीं पटियाली इलाके के मूंजखेड़ा, नगला हंसी, नगला जयकिशन, राजेपुर कुर्रा, नगला तरसी, नगला खंदारी, नेथरा, इंद्राजसनपुर, मेहोला, नवाबगंज नगरिया, टिकुरी गठौरा, कुसौल, जिझोल, पनसोती, अलीपुर भकुरी, रिकहरा, गठैरा, निरदौली पुख्ता सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में बाढ़ का पानी आबादी तक पहुंच गया है।
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सड़क किनारे रहने को मजबूर ग्रामीण।
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जिन ग्रामीण इलाकों में आबादी प्रभावित हुई है उन इलाकों के ग्रामीणों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बाढ़ से बचाव करते हुए तमाम लोगों ने घर छत पर डेरा जमा लिया है, लेकिन जिनके घर कच्चे हैं और जो परिवार झोपड़ी में रहते है उनके सामने काफी दुश्वारियां उत्पन्न हो गई हैं। ऐसे परिवार सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं या सड़कों के किनारे जहां पानी नहीं है वहां डेरा जमा लिया है। सहावर के अजीतनगर, उलाई, रफातपुर, शहवाजपुर, बमनपुरा, चकरा, नगला ढाव, नगला चोखे सहित आस पास के ग्रामीण इलाकों में पानी भरा हुआ है। खेतों में कई कई फुट पानी भरा है जो फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है।
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गांव में घुसा गंगा का पानी।
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बाढ़ से ग्रामीणाें की बढ़ी मुसीबतें, कई ग्रामीणों पर पानी
इलाके के कई गांव तक बाढ़ के पानी की दस्तक हो चुकी है। ग्रामीणों ने बाढ़ से बचाव के लिए अपने पशुओं को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा दिया है और स्वयं भी बचाव करने में जुटे हुए हैं। लहरा, बघेला, दतलाना, पाठकपुर, कादरवाड़ी, पिलोसराय, भिलौर के मार्गों पर बाढ़ का पानी है वहीं आबादी और खेतों में भी पानी है। लहरा में बन रहे पानी ओवरहेड टैंक के चारों ओर पानी भरा हुआ है।
इससे टैंक को खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीण बाढ़ के बढ़ते प्रकोप को लेकर चिंतित हैं। उन्हें अंदेशा है कि बाढ़ का रूप और अधिक विकराल न हो जाए। ग्रामीण सुगड़ सिंह, श्योराज सिंह, सुनहरी लाल, राधेलाल सहित अन्य लोगों ने बताया कि 2009 के बाद इतना पानी पहुंच रहा है।
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गंगा पूजन करते लोग।
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परेशानी के बीच श्रद्धालुओं ने किया गंगा पूजन
गंगा में आई बाढ़ से उत्पन्न मुश्किलों सामना कर रहे लोग बेहद परेशान है। जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित हो गया है, लेकिन लोगों बीच गंगा के प्रति आस्था है। इसी आस्था के चलते कादरवाड़ी में गंगा की बाढ़ का पानी आने पर उच्च प्राथमिक विद्यालय के द्वार पर प्रधानाध्यापक घनेंद्र त्रिवेदी, समाजसेवी अतुल मिश्रा, पंकज मिश्रा, मास्टर सिंह, थान सिंह, वीरेंद्र सिंह ने गंगा का दुग्धाभिषेक किया और पूजा अर्चना की।
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कासगंज में बाढ़।
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बैराजों से पानी का प्रवाह-
हरिद्वार बैराज से- 124249 क्यूसेक
बिजनौर बैराज से- 127976 क्यूसेक
नरौरा बैराज से- 305041 क्यूसेक
कछला ब्रिज- 163.01 मीटर के निशान पर
बाढ़ का लेवल-
डेंजर लेवल- 162.40 मीटर के निशान पर
हाईफ्लड लेवल- 162.91 मीटर के निशान पर
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कासगंज में बाढ़।
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बाढ़ से पशुओं के लिए भी खड़ा हुआ संकट
जिले की बाढ़ आपदा के बीच पशुओं के लिए चारे और बांधने के लिए सूखे स्थान और सुरक्षित स्थान की समस्या का पशुपालकों को सामना करना पड़ रहा है। पशुपालकों ने जहां-तहां सुरक्षित एवं सूखा स्थान मिलने पर बांध दिया है। पशुओं के लिए हरे चारे का संकट भी पैदा हो रहा है। क्योंकि ग्रामीण खेतों में पानी भरा होने के कारण चारा काटकर नहीं ला पा रहे। वहीं तमाम बाढ़ पीड़ित इलाकों में हर जगह पानी होने के कारण पशु बाढ़ के पानी में ही बंधे हैं।
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पानी में डूबे खेत।
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बमनपुरा में एक पशुपालक ने अपनी सभी भेड़ यात्री प्रतीक्षालय के पास सुरक्षित स्थान दिखाई देने पर बांध दी। सड़क के किनारे पानी बह रहा था। इसके अलावा बाढ़ प्रभावित इलाकों के उन मार्गों पर भी पशुओं को बांध दिया जहां पानी नहीं था। ग्रामीण भूदेव सिंह ने बताया कि खेतों में काफी पानी भर गया है। बाढ़ के कारण खेतों से चारा काटने नहीं जा पा रहे। ऐसी स्थिति में पशुओं को सूखा चारा खिलाया जा रहा है। पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर बांधा गया है। वहीं नगला ढाव के संजेश कुमार ने बताया कि बाढ़ से पशुओं के चारे की परेशानी हो रही है। ग्रामीण सूखे चारे का सहारा ले रहे हैं।
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बोट में निरीक्षण के लिए निकले अधिकारी।
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पलटने से बची मोटर बोट, दूधियों की साइकिलें बहीं
गंगा में आई बाढ़ अब रौद्र रूप लेती जा रही है। बहाव तेज होने से ग्रामीणों की मुसीबतें बढ़ती जा रही है। सोमवार दोपहर गांव नगला दुर्जन से नगला नरपत जा रही मोटर बोट पलटने से बची। हालांकि संतुलन बिगड़ने के कारण मोटर बोट एक तरफ अधिक झुक गई। जिसेस उनमें सवार दूधियों की साइकिलें पानी के तेज बहाव के साथ बह गईं। गनमत रही कि इस दौरान नाविक ने तत्काल धैर्य और सूझबूझ दिखाते हुए मोटर बोट को पलटने से बचा लिया।
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सुरक्षित स्थान की ओर जाते ग्रामीण।
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बाढ़ के पानी का बहाव तेज होने से गांव नगला नरपत और नगला दुर्जन के बीच काफी कटान हो गया है। इससे दोनों गांव के बीच गहरा कुंड जैसा बन गया है। इसे पार करने के लिए प्रशासन ने एक मोटर बोट लगाई है। इसी के जरिये ग्रामीण आवश्यक काम होने पर दूसरी जगहों पर आवागमन कर पा रहे हैं। सोमवार की दोपहर मोटर बोट में नगला दुर्जन से मुंजखेड़ा और नगला नरपत के करीब 15 ग्रामीण सवार होकर अपने गांव जा रहे थे।
बोट में पशुओं को सुरक्षित स्थान पर ले जाते ग्रामीण।
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उनकी मोटर बोट जैसे ही गहरे कुंड में पहुंची, तभी तेज बहाव में फंस गई। इससे मोटर बोट एक तरफ झुकने लगी। मोटर बोट को पलटते देख उसमें सवार लोगों में खलबली मच गई। इस दौरान नाविक ने सूझबूझ से काम लिया और मोटर बोट को तेज बहाव से किसी तरह बाहर निकाल लिया। वहीं, मोटर बोट की छत पर रखीं दूधिया हरवीर और नीरज निवासी मुंजखेड़ा की साइकिलें पानी में गिरकर तेज बहाव के साथ बह गईं। लोगों का कहना है कि गनीमत रही कि मोटर बोट नहीं पलटी, वरना बड़ा हादसा हो जाता।