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कड़ाके की ठंड ने बढ़ाई दिल-दिमाग के मरीजों की तादाद, ऐसे करें बचाव

Sun, 07 Jan 2018 11:40 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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कड़ाके की ठंड
कड़ाके की ठंड द‌िल द‌िमाग के मरीजाें के ल‌िये अाफत बन कर अाई है। एेसे में अस्पताल में द‌िल अाैर द‌िमाग के मरीजाें की लाइन लगी हुई है। तापमान गिरते ही बड़ी संख्या में आने लगे चिलब्लेंस के मरीज, उंगलियों में आ रही सूजन स्कैबीज, सोरायसिस के मरीज भी बढ़े हैं।

 
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डेमो पिक
पारा गिरते ही हैलट अस्पताल की ओपीडी में चिलब्लेंस के मरीज बड़ी संख्या में आने लगे हैं। स्कैबीज और सोरायसिस के मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। हैलट के चर्म रोग विभाग में शनिवार को बहुत भीड़ रही। हैलट के वरिष्ठ चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. सुशील चंद्रा और डॉ. डीपी शिवहरे ने बताया कि ठंड बढ़ने के बाद हाथ -पैरों की उंगलियों में सूजन की शिकायत लेकर सबसे ज्यादा मरीज आ रहे हैं।
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डेमो पिक
ठंडे पानी में ज्यादा देर तक काम करने से चिलब्लेंस बीमारी हो जाती है। इसमें हाथों-पैरों की उंगलियों में सूजन, जलन और दर्द होता है। अगर सही से इलाज न किया जाए तो घाव बन जाते हैं। इसके अलावा ठंड में स्नान न करने या गंदे कपड़े पहनने से लोग स्कैबीज का शिकार हो रहे हैं। दरअसल, गंदे कपड़ों में जीवाणु पनपते हैं, जो इस बीमारी की वजह बनते हैं। स्कैबीज के मरीजों को खुजली होती है।
 

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डेमो पिक
यह संक्रामक रोग है। मरीज का तौलिया, कपड़े, बिस्तर अलग कर देने चाहिए। सोरायसिस के मरीजों की भी संख्या बढ़ गई है। इसमें शरीर में लाल चकत्ते पड़ते हैं। इसमें डॉक्टर की सलाह पर ही इलाज करना चाहिए।

 
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डेमो पिक
हाथों-पैरों में वैसलीन या गरी का तेल लगाएं। ज्यादा देर तक पानी में काम न करें। बर्तन, कपड़े धोने में गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें। स्नान के बाद शरीर को अच्छी तरह पोछें। धुले कपड़े पहनें। गरम पानी से नियमित स्नान करें। दस्ताने-मोजे जरूर पहनें। 
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