यूपी में तेज बारिश के साथ ओलों का गिरना कोई सामान्य घटना नहीं है। जानकारों ने इसे किसानों के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदायक बताया है।
आगे की स्लाइड में देखें, जब पानी एक बूंद के रूप में गिरता है ...
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पानी की बूंद का आकार गोल
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ओले गिर रहे
- फोटो : अमर उजाला
जब पानी एक बूँद के रूप में गिरता है तो पृष्ठ तनाव के कारण पानी की बूंद का आकार गोल हो जाता है। ठीक इसी तरह जब आसमान से पानी गिरता है तो वह बूँद के रूप में होता है, जोकि गोल होती है। जब तापमान शून्य से कम होता है तो ये गोल बूँदें ही बर्फ बन जाती हैं।
आगे की स्लाइड में, ये है कारण...
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बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़े
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ओलों की चादर से ढकी सीढ़ियां
- फोटो : अमर उजाला
कई बार इनमें बर्फ की कई सतहें होती हैं, जिसके कारण ये बड़े आकार के ओले के रूप में गिरती हैं। अचानक पानी की बूंदों के साथ बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़े गिरने लगते हैं, जिन्हें हम ओले यानि हेल स्टोर्म कहते हैं।
आगे की स्लाइड में, वो बर्फ बन जाता...पानी भाप बनकर ऊपर उठता रहता है
तापमान शून्य से कम होने पर गिरती बर्फ
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कानपुर के बिठूर में गिरे ओले
बर्फ पानी की ही एक अवस्था है और यह पानी के जमने से बनती है। जब भी पानी का तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस या इससे कम हो जाता है तो वो बर्फ बन जाता है।
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धीरे-धीरे और पानी जमता जाता है
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ऐसे गिरे औरैया में ओले
- फोटो : अमर उजाला
वाष्पोत्सर्जन की प्रक्रिया के द्वारा नदियों, तालाबों, झीलों और समुद्र का पानी भाप बनकर ऊपर उठता रहता है, जिसके फलस्वरूप बादल बनते रहते हैं। यही बादल बारिश करते हैं। जब आसमान में तापमान शून्य से कई डिग्री कम हो जाता है तो वहां हवा में मौजूद नमी संघनित हो जाती है और यह पानी की छोटी-छोटी बूंदों के रूप में जम जाती है। इन पर धीरे-धीरे और पानी जमता जाता है और अंततः ये बर्फ के गोल टुकड़ों का रूप धारण कर लेती हैं।
आगे की स्लाइड में, जब इनका बढ़ जाता है वजन...
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हवा से टकराकर ये पिघलने लगते हैं
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ओले
- फोटो : अमर उजाला
जब इन टुकड़ों का वजन काफी अधिक हो जाता है तो नीचे गिरने लगते हैं। गिरते समय वायुमंडल में मौजूद गरम हवा से टकरा कर ये पिघलने लगते हैं और पानी की बूँदों में बदल जाते हैं, जोकि बारिश के रूप में नीचे गिरते हैं। लेकिन बर्फ के अधिक मोटे और भारी टुकड़े जो पूरी तरह पिघल नहीं पाते हैं, वे बर्फ के छोटे-छोटे गोल-गोल टुकड़ों के रूप में ही धरती पर गिरते हैं।
आगे की स्लाइड में, सुबह गर्म- रातें ठंडी और फिर बादलों की गड़गड़ाहट...
बारिश के साथ गिरने वाले बर्फ के इन्हीं छोटे-छोटे गोल टुकड़ों को हम ओले कहते हैं। आमतौर से जब ओले गिरते हैं, तो बादलों में गड़गड़ाहट और बिजली की चमक बहुत अधिक होती है। जब कभी भी आप बादलों में गड़गड़ाहट और बिजली की चमक देखें तो समझ लीजिये कि बादलों का कुछ भाग निश्चित ही हिमांक से ऊपर है तथा कुछ भाग हिमांक से नीचे है। समान्यतः बादलों की गड़गड़ाहट उस समय होती है जब दिन गरम हों और वायु में काफी नमी हो। गरम और नम हवा ठंडी और शुष्क हवा से ऊपर उठना चाहती है। जैसे-जैसे यह ऊपर उठती है तो यह ठंडी होती जाती है और जल कणों के रूप में संघनित होती जाती हैं और छोटे-छोटे बर्फ के गोल टुकड़ों का आकार ले लेती है। यूपी के औरैया, दिबियापुर, कानपुर, उन्नाव, कन्नौज में तेज बारिश के साथ ओले गिरे हैं।