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कहानी उस रात की जब शीला दीक्षित भरी बरसात में कार से पहुंची थीं कानपुर और फिर भूल गईं थीं रास्ता

Sun, 21 Jul 2019 04:42 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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शीला दीक्षित - फोटो : Amar ujala
कांग्रेस की कद्दावर नेता और दिल्ली की तीन बार मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित का शनिवार को दिल्ली के एस्कॉर्ट अस्पताल में निधन हो गया। यूपी के उन्नाव और कन्नौज से उनका बहुत ही गहरा नाता है। उन्नाव में उनकी ससुराल है तो कन्नौज से उनकी राजनीतिक डोर बंधी हुई है। हम आपको आज उस रात की कहानी बताने जा रहे हैं जब पति विनाेद दीक्षित की एक फोन कॉल पर शीला भरी बरसात में कार चला कर कानपुर पहुंची और फिर कुछ ऐसा हुआ कि उनका ये सफर हमेशा के लिए यादगार हो गया। 
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शीला दीक्षित - फोटो : अमर उजाला
शीला को कॉलेज के जमाने में विनोद दीक्षित से प्यार हुआ, जो शादी तक पहुंचा। विनोद दीक्षित आईएएस अफसर थे। शीला के बेटे संदीप दीक्षित किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वो कांग्रेस के सांसद रह चुके हैं। शीला का ससुराल यूपी में है इसी को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने उन्हें सीएम कैंडिडेट बनाया था। 
 
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शीला दीक्षित - फोटो : Amar Ujala
विनोद ने शीला को एक बस में प्रपोज किया था। शीला बताती हैं, 'हम दोनों डीटीसी की 10 नंबर बस में बैठे हुए थे। अचानक चांदनी चौक के सामने विनोद ने मुझसे कहा, मैं अपनी मां से कहने जा रहा हूं कि मुझे वो लड़की मिल गई है जिससे मुझे शादी करनी है। मैंने उनसे पूछा, क्या तुमने लड़की से इस बारे में बात की है? विनोद ने जवाब दिया, 'नहीं, लेकिन वो लड़की इस समय मेरे बगल में बैठी हुई है।'
 

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शीला दीक्षित (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
शीला बताती हैं कि, 'मैं ये सुनकर अवाक रह गई। उस समय तो कुछ नहीं बोली, लेकिन घर आ कर खुशी में खूब नाची। मैंने उस समय इस बारे में अपने मां-बाप को कुछ नहीं बताया, क्योंकि वो जरूर पूछते कि लड़का करता क्या है? मैं उनसे क्या बताती कि विनोद तो अभी पढ़ रहे हैं।'
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शीला दीक्षित - फोटो : अमर उजाला
दो सालाें के लंबे इंतजार के बाद दोनों शादी के बंधन में बंध गए। शुरू में विनोद के परिवार में इसका खासा विरोध हुआ, क्योंकि शीला ब्राह्मण नहीं थीं। विनोद ने 'आईएएस' की परीक्षा दी और पूरे भारत में नौंवा स्थान प्राप्त किया। उन्हें उत्तर प्रदेश काडर मिला।
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शीला दीक्षित - फोटो : ani
एक दिन लखनऊ से अलीगढ़ जाते समय विनोद की ट्रेन छूट गई थी। उन्होंने शीला से अनुरोध किया था कि वो उन्हें ड्राइव कर कानपुर ले चलें ताकि वो वहां से अपनी ट्रेन पकड़ लें। उस समय शीला ने रात में ही भारी बरसात के बीच विनोद को अपनी कार में बैठा कर 80 किलोमीटर दूर कानपुर ले गईं थी। वो अलीगढ़ वाली ट्रेन पर चढ़ गए थे। जब शीला स्टेशन के बाहर गईं तो उन्हें कानपुर की सड़कों का रास्ता नहीं पता था।
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शीला दीक्षित का निधन - फोटो : Amar Ujala
उस वक्त रात के डेढ़ बजे थे। शीला ने कुछ लोगों से लखनऊ जाने का रास्ता पूछा, लेकिन कुछ पता नहीं चल पाया। सड़क पर खड़े कुछ मनचले उन्हें देख कर किशोर कुमार का वो मशहूर गाना गाने लगे, ' एक लड़की भीगी भागी सी।' तभी वहां कॉन्स्टेबल आ गया। वो उन्हें थाने ले गया था। वहां से शीला ने एसपी को फोन किया, जो उन्हें जानते थे। उन्होंने तुरंत दो पुलिस वालों को शीला के साथ कर दिया। शीला ने उन पुलिस वालों को कार की पिछली सीट पर बैठाया और खुद ड्राइव करती हुई सुबह 5 बजे वापस लखनऊ पहुंचीं थीं।
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