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डॉ. गिरिराज ने दिया था बयान, आखिर देश के मुस्लिम पाकिस्तान क्यों जाएं, वहां कोई धर्मशाला है क्या?

Mon, 10 Feb 2020 03:15 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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साहित्यकार गिरिराज किशोर की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
आखिर देश का मुसलमान पाकिस्तान क्यों जाए, वहां कोई धर्मशाला है क्या? जिसे जिन्ना का राज्य पसंद था, वह वहां चला गया और जिसे महात्मा का देश अच्छा लगा वह यहां रुक गया। शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी अपनी सियासत चमकाने के नाम पर गलत बयानबाजी करते रहते हैं।
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साहित्यकार गिरिराज किशोर की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
राम मंदिर निर्माण का विरोध करने वालों को अगर पाकिस्तान भेज दिया जाए तो कट्टर हिंदुओं को कहां भेजा जाए, यह रिजवी बताएं। साहित्यकार गिरिराज किशोर ने यह टिप्पणी पांच फरवरी 2018 को पीपीएन डिग्री कॉलेज में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में की थी।
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साहित्यकार गिरिराज किशोर की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
कहा था कि जिसे देखो, वही कट्टर मुस्लिमों को पाकिस्तान भेजने की बात कहता रहता है। यह गलत है और इसकी घोर निंदा करनी चाहिए। यहां का हर एक मुसलमान देशभक्त है और उसे किसी को अपनी देशभक्ति का प्रमाण देने की जरूरत नहीं है।

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साहित्यकार गिरिराज किशोर पत्नी के साथ (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
धर्म के नाम पर कुछ लोग देश को गलत दिशा में ले जा रहे हैं। इसलिए अब सबको एकजुट होकर तोड़ने वालों के बजाय जोड़ने वालों के साथ खड़ा होना होगा। जिस दिन ऐसा हो गया, उस दिन रिजवी जैसे लोगों की जुबान बंद हो जाएगी।
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साहित्यकार गिरिराज किशोर की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
मोदी के आलोचक, अटल के प्रशंसक
गिरिराज किशोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व विदेश मंत्री दिवंगत सुषमा स्वराज पर तंज किया था कि दोनों विदेश में जाकर हिंदी बोलने का दिखावा करते हैं, जबकि हकीकत यह है कि वह अपने भाषण की अंग्रेजी कॉपी लोगों में पहले ही बंटवा देते हैं।
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साहित्यकार गिरिराज किशोर की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
जिससे वह उनके शब्दों को समझकर खूब तालियां बजाते हैं। पीएम कई मौके पर हिंदी के शब्द ठीक तरह से नहीं बोल पाते। हिंदी दिखावे से नहीं, दिल से पढ़ी और बोली जाती है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी के ज्ञानी थे और उन्होंने विदेश में पहला भाषण हिंदी में दिया था, जिसकी कॉपी अंग्रेजी में नहीं बंटवाई गई थी।
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