पुराने जमाने की हसीनाओं (कारों) ने लोगों का दिल जीत लिया। कानपुर बिठूर गंगा महोत्सव के मौके पर निकाली गई विटेंज कार रैली में इन कारों का जलवा दिखा। जिसने भी इन्हें देखा, निहारता ही रह गया।
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कानपुर में विंटेज कार रैली
एनआरआई सिटी में रविवार दोपहर एक के बाद एक इन कारों को लेकर उनके मालिक पहुंचे। वहां पहले से जमा कुछ लोग इन कारों को देखते रह गए। कार को देखते ही सवाल शुरू हो जाते थे। यह कब की है। इसका मालिक कौन है। कहां से खरीदी। एवरेज कितना है।
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कानपुर में विंटेज कार रैली
कार मालिक लोगों के सवालों का जवाब बड़े आराम से देते दिखे। बच्चे, जवान, बूढ़े हर कोई अपनी पसंद की कार के सामने खड़ा होता और स्माइल के साथ सेल्फी लेने में जुट जाता। आम हो या खास ज्यादातर लोगों ने इन कारों में बैठकर अपनी हसरत पूरी की।
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कानपुर में विंटेज कार रैली
जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह और उनकी पत्नी गरिमा अपनी बेटियों के साथ रोल्स रॉयस में बैठे। एनआरआई सिटी से बिठूर गंगा महोत्सव को निकली रैली को आईजी आलोक सिंह और जिलाधिकारी ने झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली में दस कार थीं।
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कानपुर में विंटेज कार रैली
इस दौरान बिठूर गंगा महोत्सव समिति के सचिव नीरज श्रीवास्तव, विनायक श्री और अन्य लोग मौजूद रहे। रैली बिठूर में नानाराव पेशवा स्मारक पार्क में पहुंची। वहां नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने प्रतिभागियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि अब हर साल विंटेज कार रैली प्रशासन के साथ मिलकर निकाली जाएगी।
रोल्स रॉयस
यह राजा-रजवाड़े की कार कही जाती है। इसमें बैठकर लगता ही नहीं कि आप किसी कार में बैठे हैं। सोफे जैसी सीटें और खिड़कियों पर पर्दे राजसी ठाठ बयां करते हैं। इस कार में जर्मन सिल्वर का प्रयोग हुआ है। लालटेन जैसी लाइटें लगी हैं। यह एक लीटर में एक किमी चलती है।
फोर्ड पिकअप ए
यह कार मछली के शिकार के लिए प्रयोग की जाती थी। इसमें लंबी-लंबी रॉड लगी हैं। इसका एवरेज सात या आठ किमी प्रति लीटर है। कहा जाता है कि इस कार का प्रयोग जंगल में भी शिकार करने में किया जाता था।
ऑस्टिन 7
इस कार की छत हट जाती है। 1930 में ही इस कार में खड़े होने की सुविधा मिली थी। यह चार सीटर कार है।
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कानपुर में विंटेज कार रैली
फोर्ड जीप
इस कार का प्रयोग द्वितीय विश्व युद्ध में किया गया था। इस कार में एक विशेषता है। टायर निकालने के बाद रिम के सहारे रेल की पटरियों पर दौड़ाया जा सकता है।
फोर्ड एंजिला
शाहिद मिर्जा ने यह कार लखनऊ से पांच-छह साल पहले कबाड़ी से पांच लाख रुपये में खरीदी थी। इस कार को कानपुर के किसी नवाब की माना जाता है। यह कार गदर फिल्म में दिखाई गई थी। इसका एवरेज 10 से 12 किमी प्रति लीटर है।
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कानपुर में विंटेज कार रैली
विलीज जीप
यह अमरेकिन कंपनी की कार है। अब नहीं बनती है। इसमें स्पेशल गियर है। कचरे या कीचड़ में फंसने पर चौथा गियर लगाने पर आराम से निकल जाती है।
मॉरिस एट
इस कार का इंजन आठ हॉर्स पॉवर का है। इसमें तीन गियर हैं। यह 12 किमी प्रति लीटर का एवरेज देती है। रामेंद्र माथुर ने यह कार 1978 में कबाडी से खरीदी थी। इसके पार्ट्स सिर्फ इंगलैंड में मिलते हैं।