बिकरु गांव में सीओ समेत आठ पुलिस कर्मियों की हत्या के मामले में सोमवार को एसएसपी कानपुर नगर प्रीतिंदर सिंह पहुंचे। उन्होंने कुख्यात विकास दुबे की कोठी और वारदात स्थल का बारीकी से मुआयना किया। चौबेपुर एसओ से पूरी जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने वारदात में शामिल फरार अन्य अपराधियों की जल्द गिरफ्तारी की बात कही।
दो जुलाई की रात बिकरू गांव में हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे व उसके कई साथियों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर दबिश देने गए सीओ समेत आठ पुलिस कर्मियों को मौत के घाट उतार दिया था। सोमवार को नवागंतुक एसएसपी प्रीतिंदर सिंह घटनास्थल का मुआयना करने के लिए बिकरू गांव पहुंचे।
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कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
सबसे पहले उन्होंने उस स्थान को देखा, जहां सीओ देवेंद्र मिश्र की नृशंस हत्या की गई थी। तत्पश्चात वारदात के अन्य स्थानों की गहनता से जांच पड़ताल की। उन्होंने एसपी ग्रामीण बृजेश श्रीवास्तव व इंस्पेक्टर बिल्हौर संतोष अवस्थी से हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे व उसके साथियों के घरों के बाबत भी जानकारी हासिल की और घटना के हर पहलू को बड़ी बारीकी से समझा।
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विकास दुबे का एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
एक माह पहले खून से लाल हो गई थीं बिकरू की गलियां
आज से ठीक एक माह पहले दो जुलाई की आधी रात सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा द्वारा कुख्यात विकास दुबे पर जादेपुर घस्सा निवासी राहुल तिवारी की तहरीर पर शिवराजपुर, बिठूर और चौबेपुर पुलिस के साथ दबिश दी थी। कुख्यात विकास दुबे गैंग ने सीओ बिल्हौर सहित एसओ शिवराजपुर महेश यादव, एसआई अनूप कुमार, नेबू लाल सहित आरक्षी जितेंद्र, सुल्तान, बबलू और राहुल की हत्या कर दी गई थी। पूरा गैंग पांडु नदी के गुप्त रास्ते से शिवली की ओर भाग गया था।
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कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने घटना के कुछ ही देर बाद तीन जुलाई को काशीनाथपुरवा में गैंग के सदस्य अतुल दुबे, प्रेम प्रकाश को मुठभेड़ में मार गिराया था। इसके बाद 8 जुलाई को मौदहा हमीरपुर में अमर दुबे, इटावा में प्रवीण उर्फ बउआ और पनकी कानपुर में प्रभात मिश्रा को मुठभेड़ में ढेर किया था। बिकरू के राशन विक्रेता दयाशंकर, गैंग के सदस्य श्यामू का चौबेपुर हाफ काउंटर हुआ था। घटना के एक माह बाद भी पुलिस और अन्य जांच अधिकारी पूरे मामले के खुलासे में लगे हुए हैं।
पुलिस के पहुंचते ही घरों में दुबके ग्रामीण
रक्षाबंधन के दिन बिकरू गांव पहुंचे एसएसपी प्रीतिंदर सिंह व अन्य पुलिस बल को देखकर ग्रामीण एक बार पुन: अपने-अपने घरों के भीतर दुबक गए। पुलिस कोई पूछताछ न करने लगे, इस आशंका से लोग दहशतजदा रहे। ग्रामीण अपने घरों की चौखट से बाहर नहीं निकले। यहां के ग्रामीणों में पुलिस कार्रवाई को लेकर अभी भारी दहशत बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार भले ही पूछताछ के दौरान पुलिस उन्हें प्रताड़ित न करें, लेकिन विकास दुबे से संबंधित कोई भी बात कहे जाने में भय सा लगता है।