दहशतगर्द विकास दुबे के साथी जय की गिरफ्तारी के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। दरअसल विकास ने वारदात से एक दिन पहले जय से असलहे और रकम मंगाई थी। इससे आशंका है कि क्या दहशतगर्द ने एक दिन पहले से ही हमले की साजिश रचनी शुरू कर दी थी।
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Kanpur encounter
- फोटो : अमर उजाला
उसको पता था कि पुलिस केस दर्ज कर कार्रवाई करेगी। हालांकि पुलिस की तरफ से इस पर कोई जवाब नहीं मिल सका है। एक जुलाई को राहुल तिवारी और चौबेपुर के पूर्व एसओ विनय तिवारी विकास दुबे के घर पहुंचे थे। यहां पर विकास व उसके गुर्गों ने राहुल को पीटा था और जान से मारने की धमकी दी थी।
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kanpur encounter
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कसम खिलाकर एसओ ने बचाया था। कुछ देर बाद उसने जय बाजपेई को फोन असलहा, कारतूसत और पैसे मांगे। दूसरे दिन शाम जय विकास के पास गया और असलहा व दो लाख रुपये दिए। कुछ घंटों बाद पुलिस पर हमला हो गया। पुलिस को आशंका है कि राहुल तिवारी और एसओ से विवाद हुआ था। इसको लेकर शायद विकास को दबिश या बवाल की आशंका थी। इस वजह से एक दिन पहले ही उसने असलहे एकत्र कर लिए थे।
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कहीं राहुल को मारने की तैयारी में था विकास
एक जुलाई को हुए विवाद के बाद से विकास असलहा जुटाने लगा था। गुड्डन त्रिवेदी व अन्य साथियों से भी उसने उसी दिन बातचीत की है। ऐसे में आशंका है कि विकास शायद राहुल तिवारी को मारने की साजिश रचने लगा था। साथ ही में उसको पुलिस के आने की भी आशंका थी। इस तरह वो एक साथ दो से निपटने की तैयारी कर रहा था। फिलहाल अब जब तक विकास दुबे के फरार साथी नहीं पकड़े जाते तब तक इस बारे में सही तथ्य सामने नहीं आ पाएंगे।
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बता दें कि राहुल की शिकायत पर बिकरू गांव में दो जुलाई की रात को विकास दुबे के घर दबिश देने गई पुलिस की टीम पर घात लगाकर बैठे बदमाशों ने हमला कर दिया था। जिसमें सीओ सहित आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए। पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई कर विकास दुबे के पांच साथियों को मुठभेड़ में मार गिराया।
वहीं यूपी एसटीएफ ने विकास के 12 साथियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। नौ जुलाई की सुबह उज्जैन से कानपुर लाते समय विकास की कार पलट गई थी। इस दौरान उसने सिपाही की पिस्टल छीन कर भागने की कोशिश की पर पुलिस ने मुठभेड़ में विकास को भी मार गिराया था। इस पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी और जांच आयोग का गठन हुआ है।